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महिला पुलिसकर्मियों ने गिरफ्तार किया, अस्पताल भी वही लेकर गईं: प्रज्वल रेवन्ना की ‘मर्दानगी’ का होगा मेडिकल टेस्ट, 6 जून तक SIT की हिरासत में

कई महिलाओं के यौन शोषण और सेक्स टेप बनाने के आरोपित जेडीएस के निलंबित सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु कोर्ट ने 6 जून तक के लिए एसआईटी की हिरासत में भेज दिया है। प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े मामले की जाँच एसआईटी कर रही है। प्रज्वल रेवन्ना अपने खिलाफ केस दर्ज होने के बाद जर्मनी भाग गया था, जहाँ से लौटते ही बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट पर उसे महिला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रज्वल रेवन्ना को शुक्रवार (31 मई 2024) को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की अदालत में पेश किया गया था, जिसने रेवन्ना को उन्हें 6 जून तक के लिए एसआईटी की हिरासत में भेज दिया। उसे जर्मनी से बेंगलुरु पहुँचने के फौरन बाद एसआईटी ने शुक्रवार को तड़के ही गिरफ्तार कर लिया था और पूछताछ शुरू कर दी थी। उसे तीन महिला अधिकारियों ने बेंगलुरु हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था।

प्रज्वल रेवन्ना को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस की टीम उसे एसआईटी दफ्तर ले गई, उसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका मेडिकल चेकअप किया गया। अस्पताल में प्रज्वल की रक्तचाप, रक्त शर्करा स्तर और हृदय समेत अलग-अलग मेडिकल जाँच की गई। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी प्रज्वल की ‘पोटेंसी’ (पुंसत्व) जाँच कराने पर भी विचार कर रही है। यह जाँच इस बात का पता लगाने के लिए की जाती है कि बलात्कार का आरोपी पीड़िताओं का यौन उत्पीड़न करने में सक्षम है या नहीं।

गिरफ्तारी से बचने की आखिरी कोशिश हुई फेल

म्यूनिख से बेंगलुरु पहुँचने से पहले हासन के सांसद ने गिरफ्तारी से बचने का अंतिम प्रयास करते हुए जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। प्रज्वल के खिलाफ यौन शोषण के तीन मामले दर्ज हैं, जबकि उनकी माँ ने कथित अपहरण के मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया है। हालाँकि भवानी इस मामले में आरोपित नहीं हैं लेकिन एसआईटी उनकी कथित भूमिका की जाँच करना चाहती है।

गौरतलब है कि जनता दल (सेक्युलर) के संरक्षक एच. डी. देवेगौड़ा के पोते और हासन लोकसभा क्षेत्र से जेडीएस के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना पर महिलाओं का यौन शोषण करने का आरोप है। उनके खिलाफ अभी तक यौन उत्पीड़न के तीन मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इसके बाद वो जर्मनी भाग गया था, लेकिन वहाँ से लौटते ही उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

‘PoK पर हमारा अधिकार नहीं’: अब पाकिस्तान के हाईकोर्ट में ही उड़ी मुल्क के दावों की धज्जियाँ, बताया गया ‘विदेशी क्षेत्र’

पाकिस्तान की सरकार ने अदालत में ये मान लिया है कि उसके कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK पर उसका कोई कानूनी हक नहीं है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि जिस व्यक्ति की तलाश की जा रही है, वो अभी ‘आजाद कश्मीर’ में एक मामले में न्यायिक हिरासत में है। चूँकि ‘आजाद कश्मीर’ हमारा नहीं है, इसलिए उसे हम पेश नहीं कर सकते। वो ‘विदेशी जमीन’ पर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद हाई कोर्ट में पाकिस्तान सरकार के वकील ने कहा कि ‘आजाद’ कश्मीर हमारी ज़मीन नहीं है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में इस्लामाबाद से अगवा कवि अहमद फराद के मामले में सुनवाई चल रही थी। इस दौरान सरकार के वकील ने कहा कि कवि अहमद फराद इस वक्त ‘आजाद’ कश्मीर में 2 जून तक की रिमांड पर हैं। सरकारी वकील के इस दावे पर हाई कोर्ट ने भी हैरान जताई है और पूछा कि अगर आजाद कश्मीर एक विदेशी क्षेत्र है, तो फिर पाकिस्तानी रेंजर्स वहाँ कैसे पहुँच गए। कोर्ट में इस मामले में अभी सुनवाई जारी रहेगी।

बता दें कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर को दुनिया को दिखाने के लिए 2 टुकड़ों में बाँटा है। एक को वो आजाद कश्मीर कहता है, जिसके राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री भी होते हैं। इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है। तो दूसरे पर वो गिलगित-बाल्टिस्तान एजेंसी के नाम से राज करता है। कुछ समय पहले पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान के क्षेत्र को लेकर कुछ कानूनी बदलाव भी किए थे।

दरअसल, पाकिस्तान की कोशिश रहती है कि वो कश्मीर को अलग देश के तौर पर दिखाए, लेकिन उसका दोगलापन उसे हर बार एक्सपोज कर देता है। एक तरफ वो भारत के कश्मीर में आजादी के नारे लगवाता है, तो दूसरी तरफ अपने कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके को दो हिस्सों में बाँटकर राज करता है। हालाँकि भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि पूरा कश्मीर भारत का है और भारत उसे लेकर रहेगा। ऐसे में इस्लामाबाद हाई कोर्ट में पाकिस्तान के सरकारी वकील के कबूलनामे ने पाक अधिकृत कश्मीर पर भारत के कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य दावे को भी मजबूत कर दिया है।

पिछली तिमाही में 7.8% की रफ़्तार से बढ़ी भारत की अर्थव्यवस्था, पूरे साल का GDP विकास दर 8.2%: ‘मोदी 3.0’ से पहले ही आने लगी खुशखबरी, देखें आँकड़े

लोकसभा चुनाव 2024 का सिर्फ अंतिम चरण ही बचा हुआ है और 4 जून को इसकी पूरी संभावना है कि भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से पहले ही GDP (सकल घरेलू उत्पाद) विकास दर ने भारत को खुशखबरी दी है। विश्लेषकों की उम्मीदों को पार करते हुए भारत की GDP ने वित्तीय वर्ष 2023-24 की अंतिम तिमाही में 7.8% की रफ़्तार से भाग कर सबको चौंका दिया है।

केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2024 में भारत की अर्थव्यवस्था ने 8.2% की रफ़्तार से छलांग भरी, इसके बने रहने पूरी संभावना है। वहीं इससे पिछली तिमाही में भी विश्लेषकों ने भारत की GDP के विकास दर को 8.4% आँका था, लेकिन जब आँकड़े सामने आए तो ये 8.6% था। वहीं अगर इससे पहले की बात करें तो Q1 में देश की जीडीपी की रफ़्तार 8.2% और Q2 में ये आँकड़ा 8.1% था। साफ़ है, वैश्विक कोरोना महामारी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था ने रफ़्तार पकड़ ली है।

फरवरी 2024 में जो आँकड़े जारी किए गए थे, उसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत की अर्थव्यवस्था के 7.8% के विकास दर से बढ़ने की संभावना जताई गई थी, लेकिन अब इसकी समीक्षा कर के इसे 8.2% कर दिया गया है, जो दिखाता है कि देश सही रास्ते पर है और सरकारी की नीतियाँ उम्मीदों पर न सिर्फ खरी उतर रही हैं बल्कि उनका क्रियान्वयन भी सही तरीके से हो रहा है। भारत की ‘ग्रॉस डोमेस्टिक वैल्यू (GDV)’ भी 7.2% की गति से बढ़ी है। पिछले साल ये आँकड़ा 6.7% था।

GVA के विकास में सबसे अधिक योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का है, जो 9.9% की रफ़्तार से बढ़ी है। बताया जा रहा है कि निवेश बढ़ने और सर्विस सेक्टर के तेज़ गति से बढ़ने के कारण ये संभव हो पाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन आँकड़ों के जारी होने के बाद बधाई देते हुए कहा है कि देश के मेहनती लोगों के कारण ये संभव हुआ है, भारत विश्व का सबसे तेज़ी से विकास करता देश बना हुआ है। उन्होंने दोहराया कि ये तो सिर्फ ट्रेलर है।

चुनाव परिणाम जारी होने से पहले ही कॉन्ग्रेस पार्टी ने मानी हार? प्रवक्ताओं को ExitPolls पर चर्चा से दूर रहने का आदेश, TV पर नहीं दिखेंगे

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने बड़ा फैसला लिया है। सातवें चरण में मतदान समाप्त होने के बाद अलग-अलग टीवी चैनलों, सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर होने वाले एग्जिट पोल डिबेट में कॉन्ग्रेस पार्टी अपने प्रवक्ताओं को नहीं भेजेगी। कॉन्ग्रेस पार्टी के इस फैसले से आम जनता के बीच क्या संदेश जाएगा, शायद इस फैसले से पहले पार्टी ने इस पर विचार नहीं किया।

कॉन्ग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा ने एक्स पर इस बात को रखा। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आगामी एग्जिट पोल डिबेट्स में पार्टी द्वारा भाग ना लिये जाने के निर्णय पर हमारा वक्तव्य : मतदाताओं ने अपने मत दे दिया है एवं मतदान के परिणाम मशीनों में बंद हो चुके हैं। 4 जून को परिणाम सबके सामने होंगे। भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की नज़रों में परिणाम घोषित होने से पहले किसी भी तरह के सार्वजनिक अनुमान लगा कर घमासान में भाग ले कर टीआरपी के खेल का कोई औचित्य नहीं है। किसी भी बहस का मक़सद दर्शकों का ज्ञानवर्धन करना होता है। कॉन्ग्रेस पार्टी 4 जून से डिबेट्स में फिर से सहर्ष भाग लेगी।”

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सात चरणों में मतदान हुआ है। आखिरी चरण का मतदान 1 जून को है। इसके बाद तमाम न्यूज चैनल अनुमानों और गणनाओं पर आधारित एग्जिट पोल्स जारी करते हैं। इन चैनलों पर पिछले कई सालों से कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ताओं को निराशा ही हाथ लगती है। ऐसे में इस बार कॉन्ग्रेस पार्टी ने तय किया है कि वो लोकसभा चुनाव के नतीजे 4 जून को आने के बाद ही अपने प्रवक्ताओं को चैनलों पर डिबेट के लिए भेजेगी।

लोकसभा चुनाव में AI के इस्तेमाल से कॉन्ग्रेस ने BJP को बदनाम करने के लिए ली इजरायली कंपनी की मदद, लेकिन हुई फेल : OpenAI ने ब्लॉक किए सारे प्रयास

चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने दावा किया है कि भारत के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। हालाँकि कंपनी ने कहा कि उसने उन कोशिशों को नाकाम कर दिया है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि कंपनी ने रूस, चीन, इजराइल और ईरान से शुरू होने वाले दुष्प्रचार फैलाने वाले अभियानों को बाधित किया है। भारत की मौजूदा सरकार, बीजेपी के खिलाफ माहौल तैयार करने और कॉन्ग्रेस के पक्ष में लोगों का मन बदलने की कोशिश करने में एक इजरायली कंपनी का हाथ पाया गया, लेकिन उसकी कोशिशों को नाकाम कर दिया गया।

अमेरिकी कंपनी ओपनएआई का दावा है कि उसने ऐसे गुप्त अभियानों को रोका है, जो भारत में चुनावों पर असर डालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल का उपयोग करने की कोशिश कर रहे थे। ओपनएआई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल स्थित एक नेटवर्क ने ‘भारत पर केंद्रित टिप्पणियाँ बनाना शुरू कर दिया, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी की आलोचना की गई और विपक्षी कॉन्ग्रेस पार्टी की प्रशंसा की गई।’ भारतीय चुनावों पर केंद्रित इस गतिविधि को मई में देखा गया था।

ओपनएआई की रिपोर्ट में उन अभियानों का हवाला दिया गया है, जिनमें एआई का उपयोग गुप्त अभियानों के लिए किया गया था। उन अभियानों का उपयोग जनता की राय में हेरफेर करने या राजनीतिक नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया गया था। ओपनएआई की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि हमने इन खतरनाक फर्मों को कई तरह से हमारे मॉडल का उपयोग करते हुए देखा।

रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि इजरायल से संचालित अकाउंट्स के एक समूह का उपयोग गुप्त अभियानों के लिए कंटेंट बनाने और एडिटिंग करने के लिए किया गया था। यह कंटेंट एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, वेबसाइट और यूट्यूब पर शेयर किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘मई की शुरुआत में इस नेटवर्क ने अंग्रेजी भाषा के कंटेंट के साथ भारत में दर्शकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।’

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ‘यह बिल्कुल साफ है कि भाजपा कुछ भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा और/या उनकी ओर से फैलाई जा रही गलत सूचना और विदेशी हस्तक्षेप का निशाना थी और है।’ उन्होंने इसे देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक खतरा बताया।

ओपनएआई के टूल का उपयोग अलग-अलग भाषाओं में लेख लिखने, सोशल मीडिया अकाउंट के लिए मनगढ़ंत नाम और कुछ छोटे आर्टिकल्स लिखने के लिए किया गया। आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस टूल का दुरुपयोग करके अलग-अलग देशों के समूहों ने जनता की राय में हेरफेर करने और राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की है। इस अभियान में रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा में संघर्ष, भारत में चुनाव और अमेरिका में राजनीतिक गतिशीलता जैसी भू-राजनीतिक मुद्दों को लक्षित किया जाना था।

ओपनएआई ने कहा है कि वह समय-समय पर ऐसे रिपोर्ट जारी करती रहेगी की कैसे और कहाँ उसके एआई टूल का उपयोग दुष्प्रचार फैलाने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने यह भी कहा है कि जो यूजर्स एआई टूल्स का दुरुपयोग करेंगे और कंपनी के नियमों का उल्लंघन करेंगे उनके अकाउंट्स पर बैन लगा दिया जाएगा। रूसी और इजरायली समूह द्वारा AI टूल के दुरुपयोग से किसी भी प्रकार का नुकसान अब तक नहीं देखा गया है।

प्रधानमंत्री, पॉवर स्टार, किंग-क्वीन, भतीजा और बेटी… 7वें व अंतिम चरण की 57 सीटें मतदान के लिए तैयार, पिछली बार 32 NDA ने किया था अपने नाम

लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण का मतदान शनिवार (1 जून, 2024) को शाम तक संपन्न हो जाएगा। इसके साथ ही मतगणना की प्रतीक्षा चालू हो जाएगी। 4 जून को परिणाम स्पष्ट हो जाएँगे। 7 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ की 57 सीटों पर इस चरण में चुनाव होंगे। उत्तर प्रदेश की वाराणसी, जहाँ से खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लड़ रहे हैं, वहाँ भी इसी चरण में वोट डाले जाएँगे। उनके खिलाफ कॉन्ग्रेस ने अजय राय को उतारा है, जो 2009, 2014 और 2019 में हार कर यहाँ से पराजय का हैट्रिक लगा चुके हैं।

वहीं बिहार का काराकाट, जो रोहतास और औरंगाबाद जिलों की विधानसभाओं को मिला कर बना है, वहाँ पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री व RLM संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा NDA की तरफ से मैदान में हैं, उनके सामने भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने निर्दलीय उतर कर उनकी चिंता बढ़ा दी है। वहीं महागठबंधन ने यहाँ से CPI(ML)L के राजाराम सिंह कुशवाहा को उतारा है। पाटलिपुत्र से 2 हार के बाद एक बार फिर भाजपा के रामकृपाल यादव के सामने लालू यादव की सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती मैदान में होंगी। रामकृपाल यादव यहाँ से 2 बार सांसद रहे हैं, 3 बार वो पटना से चुने गए थे। पहले वो RJD में हुआ करते थे।

7वें चरण की बात करें तो इसमें उत्तर प्रदेश और पंजाब की 13-13, पश्चिम बंगाल की 9, बिहार की 8, ओडिशा की 6, हिमाचल प्रदेश की 4 और झारखण्ड की 3 सीटों के अलावा चंडीगढ़ में चुनाव होना है। 904 प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद होगी, जिसमें हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा के टिकट पर लड़ रहीं अभिनेत्री ‘क्वीन’ फेम कंगना रनौत भी शामिल हैं। उनके सामने कॉन्ग्रेस के मंत्री व बुशहर रियासत के मानद राजा विक्रमादित्य सिंह हैं, जिनके पिता वीरभद्र सिंह 6 बार हिमाचल प्रदेश के CM रहे। विक्रमादित्य की माँ कॉन्ग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष हैं।

हिमाचल प्रदेश के ही हमीरपुर से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर लगातार 5वीं बार जीत दर्ज करने के लिए उतरेंगे। उनके पिता प्रेम सिंह धूमल भी यहाँ से सांसद रहे हैं, 2 बार HP के CM भी बने। पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी TMC के टिकट पर मैदान में हैं। वो 2014 और 2019 में यहाँ से जीत चुके हैं। 2019 में इन 57 में से 32 सीटों पर NDA की विजय हुई थी। पंजाब में सबसे कड़ा मुकाबला है, जहाँ कॉन्ग्रेस, AAP, अकाली दल और भाजपा चारों अलग-अलग लड़ रहे हैं।

‘टुकड़े-टुकड़े होते देख ख़ुशी मिलती है’: बच्चों से प्रतिमाओं पर थुकवाता और लात मरवाता था जेवियर, जहाँ PM मोदी कर रहे साधना वहाँ से विवेकानंद का नाम मिटाने की थी साजिश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव 2024 का 7वाँ और अंतिम चरण का प्रचार-प्रसार खत्म होने के बाद तमिलनाडु के कन्याकुमारी स्थित ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ में 45 घंटे की तपस्या की। इस दौरान वो निराहार और मौन रहे। आपको बता दें कि ये वही जगह है जहाँ कभी माँ कन्याकुमारी ने तपस्या की थी, आज भी उनके चरण-चिह्न यहाँ हैं। विवेकानंद तैर कर समुद्र में स्थित इस शिला पर पहुँचे थे और यहाँ ध्यान किया था। यहीं उन्हें ज्ञान प्राप्त हुए और ‘भारत माता’ का विचार उनके मन में आया।

क्या आपको पता है जब सन् 1962 में विवेकानंद के नाम पर यहाँ स्मारक बनवाने का विचार RSS ने शुरू किया, तब उसका ईसाइयों ने खासा विरोध किया। कारण – ईसाई इसे ‘सेंट जेवियर’ के नाम पर पहचान देना चाहते थे। यही कारण है कि उन्होंने यहाँ एक बड़ा क्रॉस लगा दिया था, शिलालेख फेंक दिया था और ईसाई नाविकों ने निर्माण कार्य का बहिष्कार कर दिया था। इस कारण केरल से नाविक बुलाने पड़े थे। ईसाईयों के आतंक के कारण यहाँ धारा-144 लगानी पड़ी थी।

लेकिन, संघ के सरकार्यवाह एकनाथ रानडे ने काम अपने हाथ में लिया और इसे संपन्न कराया। 1964 में इसका निर्माण शुरू हुआ और 1970 में इसका उद्घाटन हुआ। जवाहरलाल नेहरू सरकार में संस्कृति मंत्री हुमायूँ कबीर को लगता था कि इस स्मारक के बनने से इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता कम हो जाएगी। लेकिन, उन्हें भी किसी तरह मनाया गया। इस प्रकार, भारत सेंट फ्रांसिस जेवियर के नाम पर एक हिन्दू स्थली के अतिक्रमण से बच गया और इसका नाम देश भर में गूँज रहा है।

भारत पहुँच कर हिन्दुओं पर अत्याचार कर के और उन्हें फँसा कर उनका धर्मांतरण कराने वाला फ्रांसिस जेवियर कौन था, आइए बताते हैं। यहाँ हम हिन्दुओं और भारत को लेकर उसकी सोच की बात करेंगे। वो 16वीं शताब्दी में भारत आया था। उसने भारत से जो पत्र भेजे थे, उससे उसके विचारों और उसकी सोच के बारे में पता चलता है। एक पत्र में उसने लिखा था कि अगर ईसाई मजहब में कुछ ऐसे लोग होते जो अपने फायदे की सिर्फ नहीं सोचते, तो ‘काफिरों’ की एक बड़ी संख्या को हिन्दू बनाया जा सकता था।

भारत को गोवा को इसे धर्मांतरण का अड्डा बनाने वाले फ्रांसिस जेवियर ने ये प्रार्थना करने के लिए कहा था कि यूरोप से और भी ईसाइयों को यहाँ अपना मजहब फैलाने के लिए भेजा जाना चाहिए। उसने गोवा में एक कॉलेज खोला, उसमें ‘मूर्तिपूजक’ युवकों को भर्ती कर के उन्हें लैटिन सिखाया जाता था, फिर ईसाई मजहब की शिक्षा दी जाती थी। ‘Santa Fe’ नामक इस कॉलेज में 500 छात्रों के बैठने की व्यवस्था की, इसके संचालन के लिए धन की कोई कमी नहीं थी।

फ्रांसिस जेवियर हिन्दुओं को ‘मूर्तिपूजक’, ‘काफिर’ या ‘विधर्मी’ कह कर संबोधित करता था। उसने उस पत्र में अपने इस कॉलेज का जिक्र करते हुए आशा जताई थी कि इससे निकले छात्र पूरे भारत में ईसाई महाब को फैलाएँगे। इसी पत्र में उसने बताया है कि ‘मूर्तिपूजक’ समुदाय का एक वर्ग है जिसे ब्राह्मण कहते हैं – वो देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, धर्म के अंधविश्वासी अनुष्ठान करते हैं, मंदिरों व प्रतिमाओं की देखभाल करते हैं। उसने ब्राह्मणों के लिए ‘दुनिया का सबसे विकृत और दुष्ट समाज’ जैसी आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग किया है।

फ्रांसिस जेवियर ब्राह्मणों से इतना क्षुब्ध था कि उन्हें उसने ‘झूठा और धोखेबाज’ तक करार दिया। इसका कारण ये था कि उसका मानना था कि अगर ब्राह्मणों का विरोध होता तो वो पूरे क्षेत्र को ईसा मसीह का अनुयायी बना देता। इसीलिए, उसने एक सदाचारी ब्राह्मण का धर्म-परिवर्तन करा के बच्चों को ईसाई मजहब की शिक्षा देने का काम सौंप दिया। एक बार एक पत्र में उसने एक घटना का जिक्र किया था। वो एक मंदिर में घुस गया था जहाँ 200 श्रद्धालु जमा थे और वहाँ जाकर ईसाई मजहब के बारे में उन्हें बताने लगा।

सन् 1542 में जेवियर लिखता है कि उसके तर्कों से लोग खुश हुए और उससे कई सवालों के जवाब पूछा। इस दौरान उसने हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए लिखा है कि भारतीय स्वयं काले हैं इसीलिए उनके देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ भी काली होती हैं, और उनमें इतना तेल लगाया जाता है कि वो दुर्गन्ध देती है। उसने इन प्रतिमाओं के लिए ‘घृणित, बदसूरत और भयानक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उसका जोर खासतौर पर विद्वान ब्राह्मणों को मित्र बना कर हिन्दू धर्म को नीचा दिखाना और ईसाई मजहब को श्रेष्ठ दिखाने पर था।

फ्रांसिस जेवियर के इन पत्रों को पढ़ने से ये भी मालूम होता है कि उसने मछुआरों के बच्चों का गलत इस्तेमाल किया। उन्हें क्रॉस पहना कर ईसाई मजहब की शिक्षा दी, फिर माता-पिता द्वारा आपत्ति जताने की स्थिति में इन बच्चों को अपने अभिभावकों से ही लड़ाई-झगड़ा करने के लिए सिखाया जाता था, मंदिरों को ध्वस्त करने के लिए इन बच्चों का इस्तेमाल किया जाता था। बताया जाता है कि सन् 1545 के मई-जून में उसने मात्र एक महीने में 10,000 लोगों का त्रावणकोर में ईसाई धर्मांतरण कराया था।

त्रावणकोर के तत्कालीन राजा, जो कि पुर्तगाल का दोस्त था, उससे अनुमति लेकर फ्रांसिस जेवियर ने तेज़ी से ईसाई धर्मांतरण का कार्य शुरू किया और गाँव-गाँव घूमने लगा। मंदिरों को गिरा दिया जाता था, प्रतिमाओं के टुकड़े-टुकड़े कर कर दिए जाते थे। त्रावणकोर में उसने एक साल में 45 चर्च स्थापित किए। राजा से उसे धन भी प्राप्त होता था। जनवरी 1545 में उसने कोचीन से जो पत्र लिखा था, उससे भारतीयों को लेकर उसकी सोच के बारे में और स्पष्ट पता चलता है।

उसने लिखा है, “जब सभी बपतिस्मा ले लेते हैं, तो मैं उनके झूठे देवताओं के सभी मंदिरों को नष्ट करने और सभी मूर्तियों को टुकड़े-टुकड़े करने का आदेश देता हूँ। मैं आपको यह नहीं बता सकता कि यह सब होते हुए देखकर मुझे कितनी खुशी हो रही है, उन लोगों द्वारा मूर्तियों को नष्ट होते हुए देखना जो हाल ही में उनकी पूजा करते थे। मैं सभी शहरों और गाँवों में ईसाई धर्म के सिद्धांतों को स्थानीय भाषा में लिखकर छोड़ता हूँ और साथ ही यह भी बताता हूँ कि सुबह और शाम के स्कूलों में इसे किस तरह पढ़ाया जाना चाहिए।”

Baptism कराते-कराते फ्रांसिस जेवियर कई बार थक जाता था, क्योंकि वो पूरे के पूरे गाँव को ईसाई बना देता था। वो बच्चों का धर्मांतरण करा के उन्हें मंदिरों में ले जाता था और उनसे गाली बकवाता था। इन बच्चों का इस्तेमाल वो मूर्तियों को गिराने, उन्हें तोड़ने, उन पर थूकने और उन्हें रौंदने के लिए करता था। मूर्तियों पर बच्चों से लात मरवाता था। कलाकारों के पास जा-जा कर उन्हें मूर्तियाँ गढ़ने से मना किया जाता था। सोचिए, इस जेवियर का नाम अगर कन्याकुमारी में गूँज रहा होता तो हम भारतीय संस्कृति से कितनी दूर खड़े होते।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कन्याकुमारी जाना देश की संस्कृति एकता को बनाए रखने, हमें अपने विरासतों को पहचानने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ाने में भी मदद करेगा। लोग स्वामी विवेकानंद के बारे में अधिकाधिक पढ़ेंगे, माँ कन्याकुमारी की कथा के बारे में जानेंगे और साथ ही ये भी जानेंगे कि कैसे तमिलनाडु की कन्याकुमारी हो या असम की कामाख्या, गुजरात की अंबा देवी हो या फिर बंगाल की काली – सनातन धर्म एक है और भारत की एकता को एक सूत्र में बाँधता है।

जर्मनी में इस्लाम विरोधी रैली में चाकू से हमला, ताबड़तोड़ किया वार: पुलिस की गोली से ढेर हुआ हमलावर

जर्मनी में एक रैली के दौरान एक इस्लामी कट्टरपंथी ने चाकू से हमला कर दिया। उसने अपने हमले में कई लोगों को घायल कर दिया, जिसमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। इस हमले में रैली के दौरान बोल रहे इस्लाम विरोधी प्रचारक माइकल स्टूर्जेनबर्गर भी घायल हो गए। हालाँकि पुलिस कर्मियों ने लोगों को बचाने के लिए हमलावर को भी ढेर कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रैली का यूट्यूब पर लाइव प्रसारण किया जा रहा था, जिसे सिटीजन्स मूवमेंट पैक्स यूरोपा (बीपीई) ने मैनहैम शहर में आयोजित किया था। सिटीजन्स मूवमेंट पैक्स यूरोपा ऐसा ग्रुप है, जो यूरोप के इस्लामीकरण के खिलाफ आवाज उठाता रहा है।

इस रैली में यूरोप में तेजी से फैल रहे इस्लाम को लेकर चर्चा हो रही थी, जिसमें मािकल स्टूर्जेनबर्गर को भी भाषण देना था। वो उस समय मंच पर ही मौजूद थे, लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथी ने उन्हें चाकुओं से गोद दिया। यूट्यूब पर प्रसारित इस हमले की फुटेज में सारे घटनाक्रम साफ दिख रहे हैं। जिसमें हमलावर उनपर ताबड़तोड़ हमले करता दिखा। इसके बाद पुलिस ने उसे रुकने की चेतावनी दी, लेकिन उसने एक पुलिस अधिकारी पर ही हमला बोल दिया, जिसके बाद एक अन्य पुलिसकर्मी ने उसे बिल्कुल पास से गोली मार दी और वो गिर पड़ा। थोड़ी देर में उसके शरीर ने हरकत करनी बंद कर दी।

पुलिस ने इस हमले में घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया है। पुलिस ने थोड़े समय बाद एक बयान जारी किया और बताया कि हमलावर नीचे रंग के लोवर में था और उसकी पीठ पर बैग भी था। उसने अचानक हमला किया और लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला।

हाल के महीनों में जर्मनी में इस्लाम और शरणार्थी समस्या को लेकर चर्चा बढ़ी है, खासतौर पर दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों मुख्य रूप से ‘अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी’ (एएफडी) पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता के बीच। जर्मनी शरणार्थियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य रहा है। बता दें कि जर्मनी में मुस्लिम शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। साल 2015 के बाद से अब तक 10 लाख लोग जर्मनी में शरण ले चुके हैं।

बाथरूम, बेडरूम, पोर्न स्टार को पैसा… पहली बार अमेरिका का कोई पूर्व राष्ट्रपति 34 मामलों में दोषी करार, क्या अब चुनाव लड़ पाएँगे डोनाल्ड ट्रंप?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को न्यूयॉर्क कोर्ट में गुरुवार (30 मई 20) को करीबन 34 मामलों में दोषी करार दिया गया है। अमेरिका के इतिहास में पहली बार है कि कोई पूर्व राष्ट्रपति, कोर्ट में दोषी पाया गया हो। करीबन 6 हफ्ते चली सुनवाई के बाद न्यूयॉर्क की कोर्ट ने अपना यह निर्णय दिया।

ट्रंप के खिलाफ आरोप था कि उन्होंने पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल को पैसे देकर चुप कराया ताकि उनके चुनावों पर प्रभाव न पड़े। इसके अलावा चुनावी प्रचार के दौरान बिजनेस रिकॉर्ड में हेराफेरी भी की ताकि उसका मुनाफा वो चुनाव प्रचार में ले सकें। ट्रंप के विरुद्ध ये सारे मामले राष्ट्रपति बनने से पहले दर्ज हुए थे। 2016 में इन केसों को शुरू किया गया था। इसके बाद उनके ऊपर आपराधिक केस चला।

न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने 6 हफ्तों में 22 गवाहों को सुनने के बाद अपना निर्णय दिया है। इन गवाहों में स्टॉर्मी डेनियल्स का नाम भी था। उन्होंने तो कोर्ट में बाथरूम और बेडरूम से जुड़ी ऐसी बातें बता डाली थीं कि जज को खुद उन्हें चुप होने को कहना पड़ा था। जजों ने इस मामले में फैसला सुनाने के बाद दो दिन तक विचार विमर्श किया, फिर 12 मेंबर की ज्यूरी ने ट्रंप को दोषी करार दिया।

अब पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को सजा क्या दी जाएगी इस पर कोर्ट 11 जुलाई 2024 को अपना फैसला देगा, लेकिन इस बीच जो सबसे बड़ा सवाल उठ रहा है वो ये कि क्या इन आरोपों के सिद्ध होने के बाद ट्रंप को अमेरिका में चुनाव लड़ने का अधिकार होगा या फिर नहीं?

रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट के निर्णय से ट्रंप के चुनाव लड़ने न लड़ने के फैसले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि अमेरिका में ऐसा कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है जो उन्हें जेल से बतौर राष्ट्रपति सेवा देने से रोके। तो अगर, ऐसी स्थिति आती है, ट्रंप चुनाव लड़ते हैं, जीतते हैं तो उनके लिए पद छोड़ने का कोई संकट नहीं आएगा। ये बात अलग है कि न्यायिक व्यवस्था इस पर अपने हिसाब से निर्णय लेकर कोई और रास्ते का सुझाव दे।

अप्रैल में आए एक एमर्सन पोल के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए 43 फीसद लोगों ने डॉनल्ड ट्रंप को पंसद किया था वहीं 42 ने बाइडेन को। ऐसे में दोनों के बीच आगामी चुनावों में कड़ाके की टक्कर हो सकती है। 11 जुलाई के बाद ट्रंप अगर जेल जाते भी हैं तो उन्हें चुनाव कैंपेन करने का अधिकार होगा, लेकिन दोषी पाए जाने के बाद वो चुनावों के मतदान में शामिल हो पाएँगे या नहीं, ये अभी पुष्टि नहीं हो सकती।

दरअसल, ट्रम्प अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य के निवासी हैं और वहाँ का नियम कहता है कि अगर कोई शख्स किसी आपराधिक मामले में दोषी पाया जाता है तो उससे वोट करने का अधिकार छीन लिया जाता है। हालाँकि सजा पूरी होने के बाद उसे वो अधिकार वापस मिल जाता है। ट्रंप के मामले में सजा मुकर्रर होने के बाद निर्णय आने के बाद फैसला होगा कि उनके अधिकार छिनेगा या उनके पास ये अधिकार रहेगा।

बता दें कि ट्रंप से पूर्व अमेरिका में सदी पहले सिर्फ ‘यूजीन वी डेब्स’ एकलौते ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने जेल में रहकर राष्ट्रपति बनने के लिए कैंपेन चलाया था। उनके बाद से अमेरिका के इतिहास में अब तक कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया है जिसमें कोई दोषी करार शख्स चुनाव लड़ रहा हो। देखना है कि इस बार प्रथा बदलती है या वही रहेगी।

इससे पहले 5 अप्रैल 2023 को ट्रंप के खिलाफ मैनहैटन की कोर्ट में 34 आरोप तय किए गए थे। उस समय भी उनके खिलाफ पोर्न स्टार को चुप कराने और बिजनेस रिकॉर्ड में गलत जानकारी देने के आरोप लगे थे। इस बार भी उनके खिलाफ इन्हीं 34 मामलों में सुनवाई हुई।

न्यूयॉर्क की कोर्ट ने जब अपना निर्णय सुनाया तो ट्रंप बिलकुल चुप थे, उन्होंने फैसला सुनकर न में सिर हिलाया। उन्होंने कहा कि ट्रायल में धोखाधड़ी हुई है। उन्होंने जज को भी भ्रष्टाचारी कहा। साथ ही बोले कि अब लोग 5 नवंबर को अपना फैसला देंगे। जो उन्हें कलंकित करने के लिए किया गया वो सब जानते हैं।

कभी जो बनना चाहते थे राजदीप सरदेसाई जैसा ‘पत्रकार’, उन्होंने ही बताया क्यों मनमोहन सरकार ने दिया ‘पद्मश्री’: बताया- स्टिंग की सीडी दबाकर बचाई थी सरकार

दूरदर्शन न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ‘DO News’ पर वैभव सिंह के साथ पॉडकास्ट में अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि जब वो TV पत्रकार नहीं थे तब पहले राजदीप सरदेसाई के बहुत बड़े फैन हुआ करते थे और उनके जैसा बनने की सोचते थे। उन्होंने कहा कि जिस तरह से राजदीप सरदेसाई खबर पेश करते थे, उन्हें बहुत अच्छा लगता था। राजदीप सरदेसाई तब NDTV का हिस्सा हुआ करते थे।

हालाँकि, अब अशोक श्रीवास्तव खुल कर राजदीप सरदेसाई की आलोचना करते हैं। उन्होंने समझाया है कि आखिर वो क्यों राजदीप सरदेसाई के खिलाफ हैं। इसके लिए उन्होंने 16 साल पुरानी घटना को याद किया। बकौल अशोक श्रीवास्तव, तब कैश फॉर वोट कांड हुआ था, राजदीप सरदेसाई जिस चैनल के हेड थे अगर वो उस स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित कर देता तो शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती।

अशोक श्रीवास्तव ने आगे बताया, “मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए पैसों का जो लेनदेन हुआ था, उस पर एक स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। राजदीप सरदेसाई उस स्टिंग ऑपरेशन को देखने के बाद एक संपादक के रूप में निर्णय लिया कि इसे टेलीकास्ट करने से पहले वो इसकी जाँच करेंगे। आपने जाँच के नाम पर कई महीनों तक उसे रोक कर रखा। मनमोहन सिंह की सरकार बन गई, उसके बाद राजदीप सरदेसाई को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है।”

अशोक श्रीवास्तव ने इस घटना का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या ये चीजें हमें बतातीं नहीं, इशारा नहीं करतीं कि क्या कुछ चल रहा है? बता दें कि राजदीप सरदेसाई को जनवरी 2008 में पद्मश्री दिए जाने की घोषणा हुई थी, तब वो ‘ग्लोबल ब्रॉडकास्ट न्यूज़’ (GBN) के एडिट-इन-चीफ थे। बता दें कि अमेरिका से परमाणु करार का विरोध करते हुए वामदलों ने UPA से समर्थन वापस ले लिया था, जिसके बाद सरकार को बहुमत साबित करना था। इसी दौरान भाजपा सांसदों को घूस की पेशकश की गई थी।