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गो तस्करों से लड़ते थे सुजीत सोनी, जंगल में युवती के साथ मिली लाश: बजरंग दल नेता की ‘मौत’ पर पुलिस थ्योरी से भड़के स्थानीय, कहा- जानवरों की बिछाई तारों ने ली जान

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में रविवार (26 मई 2024) रात बजरंग दल के सह-संयोजक सुजीत सोनी और एक 22 साल की शादीशुदा महिला की हत्या के मामले में पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये लोग बड़कीमहरी के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनकी गिरफ्तारी के बाद एक थ्योरी दी है, जिसे सुन बजरंग दल के कार्यकर्ता और नगरवासी संतुष्ट नहीं हैं।

पुलिस ने इस मामले में 3 लोगों को पकड़कर बताया कि इन आरोपितों ने जंगली जानवर का शिकार करने के लिए डुमरखी जंगल में तरंगित तारों को बिछाया था। इसी की चपेट में आकर बजरंग दल सह-संयोजक और महिला की मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, इन आरोपितों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। साथ ही इनकी बताई जगह से तार, खुंटी, लाठी और अन्य सामान भी बरामद हुआ है। हालाँकि पुलिस द्वारा लिए गए एक्शन से अन्य नगरवासी संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने हत्या के इस मामले में पुलिस पर लीपापोती का आरोप लगाते हुए चक्काजाम करके प्रदर्शन किया। इस दौरान टायर जलाकर विरोध किया गया।

वहीं राज्य मंत्री रामविचार नेताम ने इस मामले में एक प्रेस रिलीज जारी की है। उन्होंने कहा है कि यह घटना दुखद है। अगर इस मामले में पुलिस की जाँच से पीड़ित परिवार संतुष्ट नहीं है तो मामले में उच्च स्तरीय जाँच कराई जाएगी। इसके साथ ही सारी हर संभव मदद प्रदान की जाएगी।

बता दें कि रविवार (26 -27 मई) रात को बजरंग दल के सह संयोजक सुजीत सोनी की और युवती की हत्या का मामला सामने आया था। 5 दिन पहले की रिपोर्टों में बताया गया था कि आरोपितों ने बजरंग दल के सह संयोजक को इतना पीटा की उनकी हड्डियाँ टूट गईं। वहीं उनका गला काटने की भी कोशिश की गई। बाद में शव को डुमरखी ढाबे से 100 मीटर दूर जंगल में फेंका गया।

इसमें बजरंग दल सह-संयोजक के साथ जो महिला का शव मिला था उसकी पहचान किरण काशी की थी। शुरू में पुलिस ने कहा था कि युवक-युवती को मारने के बाद युवती के शव को जलाने का भी प्रयास हुआ था। आशंका जताई जा रही थी कि ये मामला पुलिस प्रसंग का हो सकता है या फिर गौ तस्करी से संबंधित। पुलिस ने हर एंगल से जाँच करने की बात इस मामले में कही थी। लेकिन ‘शिकार’ वाला एंगल पता चलने के बाद इसी पर गिरफ्तारी हुई।

इतना कंफ्यूजन क्यों है मी लॉर्ड? MP हाई कोर्ट ने इस्लामिक कानून का हवाला हिंदू+मुस्लिम की शादी को बताया ‘अवैध’, इलाहाबाद HC ने कहा- अलग धर्म वाले स्पेशल मैरिज एक्ट में कर सकते हैं शादी

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने एक हालिया निर्णय में कहा है कि अलग-अलग धर्मों का पालन करने वाले महिला-पुरुष विशेष विवाह अधिनियम (स्पेशल मैरिज एक्ट) के तहत विवाह कर सकते हैं। हाई कोर्ट ने कहा है कि इसके लिए उनमें से किसी को भी अपना धर्म बदलने की आवश्यकता नहीं है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की जस्टिस ज्योत्सना शर्मा ने एक दम्पत्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया है। इन्होंने हाई कोर्ट से खुद की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा की माँग की थी। उनका कहना था कि उन दोनों के रिश्ते में धर्म अलग अलग होने की वजह उन्हें धमकियाँ मिल रहीं थी।

उनकी इस बात का कोर्ट में राज्य ने विरोध किया और बताया कि दोनों ने विवाह का एग्रीमेंट किया है। राज्य ने कहा है कि ऐसा कोई भी विवाह कानून के अंतर्गत मान्य नहीं है। राज्य ने दोनों को सुरक्षा देने का विरोध हाई कोर्ट ने किया।

राज्य की इस दलील के विरुद्ध दंपत्ति ने बताया कि वह विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करना चाहते हैं लेकिन जब तक उन्हें सुरक्षा नहीं मिलती तब तक वह इस विवाह के लिए आगे नहीं बढ़ सकते और कोर्ट में अपना पंजीकरण नहीं करवा सकते।

कोर्ट ने दोनों तरफ की दलीलों को सुनते हुए कहा, ” हमारी राय में, एग्रीमेंट से विवाह करना निश्चित रूप से कानून में अमान्य है। हालाँकि, कानून दोनों को धर्मांतरण के बिना विशेष विवाह अधिनियम के तहत कोर्ट मैरिज के लिए आवेदन करने से नहीं रोकता है।”

कोर्ट ने इस दौरान दोनों को आदेश दिया कि वह अगली सुनवाई से पहले अपनी विवाह के लिए कदम उठाएँ, जिससे उनकी गंभीरता साबित हो सके। कोर्ट ने दम्पत्ति से कहा है कि वह विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह करे और इसका साक्ष्य कोर्ट के सामने प्रस्तुत करे।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दिया था विपरीत फैसला

जहाँ इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निर्णय दिया है कि अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह कर सकते हैं वहीं मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने हाल ही में इसका विपरीत निर्णय दिया था। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस्लामिक कानूनों को आधार बनाते हुए बताया था कि अग्नि-मूर्ति को पूजने वाली हिन्दू महिला और मुस्लिम पुरुष का विवाह नहीं हो सकता।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बताया था कि हिन्दू लड़की और मुस्लिम लड़के का विवाह अगर विशेष विवाह अधिनियम के तहत हुआ होगा तो भी उसे इस्लामिक कानून के हिसाब से फासिद माना जाएगा। हाई कोर्ट ने कहा था, ”मुस्लिम कानून के अनुसार, किसी मुस्लिम लड़के का किसी ऐसी लड़की से विवाह वैध विवाह नहीं है जो मूर्तिपूजक या अग्निपूजक हो। भले ही विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हो, लेकिन वो विवाह वैध नहीं माना जाएगा, इसे अनियमित (फासीद) विवाह ही माना जाएगा।”

जबलपुर हाई कोर्ट ने एक हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जिसमें हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह की इच्छा जताई थी। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि वो दोनों अपना-अपना ही धर्म मानना जारी रखेंगे, जो एक-दूसरे का धर्म नहीं अपनाना चाहते।

विवाह के बाद भी हिंदू महिला हिंदू धर्म को मानेगी और मुस्लिम पुरुष मुस्लिम धर्म को। ऐसे में इस जोड़े को पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए, ताकि वो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह का रजिस्ट्रेशन करा सकें। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा था कि जो भी विवाह पर्सनल लॉ के अंतर्गत मान्य नहीं है, उन्हें विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत वैध नहीं माना जा सकता। विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह करने के लिए दोनों में से किसी एक को अपना धर्म बदलना होगा।

दो हाई कोर्ट के एक जैसे मामले पर अलग-अलग दृष्टिकोण अपनाए जाने के बाद पशोपेश की स्थिति पैदा हो गई है। जो विवाह एक राज्य में वैध माना गया है, वह दूसरे राज्य में अवैध माना जा रहा है। इसके अलावा अंतरधार्मिक विवाह करने वालों में भी इन दो अलग-अलग फैसलों से पशोपेश की स्थिति पैदा होगी। इसके अलावा देश के सभी हाई कोर्ट के फैसले अन्य अदालतों में उद्धृत किए जाते हैं। यदि दो हाई कोर्ट अलग-अलग फैसले देते हैं तो अन्य अदालतों में भी इनका उदाहरण देना मुश्किल होगा और एक के जवाब में दूसरा निर्णय रखा जाएगा।

भारत का 100 टन सोना घर लौटा, इंग्लैंड के बैंक से लेकर आई RBI: कभी गिरवी रखती थी सरकारें, अब देश के अपने ही भंडार में हो रहा शिफ्ट

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपना 100 टन सोना इंग्लैंड से वापस मँगा कर भारत में रखवाया है। अब यह सोना इंग्लैंड की जगह भारत में रखा है। आने वाले कुछ दिनों और भी सोना भारत वापस आने वाला है। अब यह सोना RBI के पास रखा गया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिजर्व बैंक के पास वर्तमान में 822 टन सोना है। इसमें से 100.3 टन सोना भारत में रखा गया है जबकि 413.8 टन अभी विदेशों में रखा हुआ है। इसके अलावा 308 टन सोना भारत में नोट जारी करने के लिए रखा गया है।

रिजर्व बैंक ने बीते कुछ सालों में में विदेशों में सोने के बढ़ते भारतीय स्टॉक के चलते इसे अपने देश वापस लाने का निर्णय किया है। रिजर्व बैंक आगे और भी सोना विदेशों से मँगा कर देश रखेगी। बताया गया है कि रिजर्व बैंक दोबारा से 100 टन सोना देश को वापस ला सकती है।

परम्परागत रूप से विश्व के अधिकांश देश लंदन में ही अपना सोना रखते आए हैं। भारत भी अपना सोना अब तक लंदन में रखता था लेकिन अब उसने निर्णय लिया है कि अपने सोने की बड़ी मात्रा देश के अंदर ही रखेगा। रिजर्व बैंक जहाँ विदेशों से सोना लेकर आ रही है, वहीं वह लगातार नया सोना खरीद भी रही है।

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2022-23 में 34.3 टन जबकि 2023-24 में 27.7 टन नया सोना खरीदा है। भारत का लगातार सोना खरीदना यह दिखाता है कि उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत है और वह अपने वित्तीय सुरक्षा प्रबन्धन को मजबूत कर रहा है। रिजर्व बैंक विश्व के उन चुनिंदा बैंकों में से एक है जो सोना खरीद रहे हैं।

भारत का यह सोना वापस देश में लाने के लिए रिजर्व बैंक को विशेष इंतजाम भी करने पड़े थे। रिजर्व बैन ने इसके लिए विशेष विमान की व्यवस्था की थी। इसके अलावा इस पर केंद्र सरकार ने कस्टम ड्यूटी भी माफ़ कर दी थी। हालाँकि, रिजर्व बैंक को इस सोने को देश में लाने के बाद GST देनी पड़ी है।

1991 में गिरवीं रख दिया गया था देश का सोना

जहाँ वर्तमान में रिजर्व बैंक विदेशों से अपना सोना वापस लाकर देश में रख रही है, वहीं लगभग 3 दशक पहले की कॉन्ग्रेस-तीसरे मोर्चे की सरकारों ने भारत का सोना गिरवीं रख दिया था। 1991 में अर्थव्यवस्था के कुप्रबन्धन की वजह से उपजे आर्थिक संकट के कारण भारत को अपना सोना विदेशों में भेज कर गिरवीं रखना पड़ा था।

जुलाई, 1991 में कॉन्ग्रेस की नरसिंह राव वाली सरकार ने डॉलर जुटाने के लिए सोना विदेशी बैंकों के पास गिरवीं रखा था। जुलाई 1991 में नरसिंह राव सरकार ने 46.91 टन सोना इंग्लैंड की बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान के पास गिरवीं रखा था ताकि 400 मिलियन डॉलर जुटाए जा सकें। सोना गिरवीं रखे जाने से पहले भारत ने सोना बेचा भी था।

मई 1991 में भारत ने स्विट्ज़रलैंड की UBS बैंक को सोना बेचा था, इसके जरिए सरकार ने 200 मिलियन डॉलर जुटाए थे। बताया गया कि यह वह सोना था जो कि तस्करों से पकड़ा गया था और देश की बैकों के पास जमा था। रिपोर्ट बताती हैं कि इस दौरान 20 टन सोना बेचा गया था।

अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने इस खबर को लेकर कहा है कि यह भारत के लिए बड़ा बदलाव है। उन्होंने एक (पहले ट्विटर) पर लिखा, “जबकि किसी की निगाह इस पर नहीं गई थी, तब RBI ने अपने सोने के रिजर्व को वापस भारत से भारत में स्थानांतरित कर दिया है। अधिकांश देश अपना सोना बैंक ऑफ इंग्लैंड के वॉल्ट्स में या ऐसे कुछ स्थानों पर रखते हैं (और इसके लिए फीस भी देते हैं)। भारत अब अपना अधिकांश सोना अपने पास रखेगा। यह एक लंबा सफ़र है क्योंकि 1991 में देश का सोना रातोरात बाहर ले जाया गया था।”

हिंदू युवती को रेप के वीडियो से किया बदनाम, पीड़िता की शादी तय हुई तो घर में तलवार लेकर उठाने घुसा: पिता-भाई के हाथ-पैर तोड़े, मध्य प्रदेश में सलीम गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के अशोक नगर में एक 22 साल की हिंदू लड़की से रेप करके, उसकी वीडियो बनाकर उसे बदनाम करने वाले सलीम पर अब लड़की के परिजनों से मारपीट का आरोप लगा है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के घरवालों ने उसकी शादी कहीं तय कर दी थी। ऐसे में आरोपित ने अपने साथियों के साथ मिलकर घर जाकर पहले लड़की को उठवाया और उसके बाद उसके माता-पिता-भाई के साथ मारपीट भी की गई। इस दौरान भाई-पिता के हाथ भी तोड़े गए।

बताया जा रहा है कि जब लड़की के घर में ये लोग घुसे तो इनके हाथ में हथियार थे। किसी के हाथ में लोहे की रॉड थी और किसी के हाथ में तलवार थी। मारपीट के कारण परिवार ने चिल्लाना शुरू किया तो आवज सुन आसपास के जब ज्यादा लोग इकट्ठा हुए, तब जाकर आरोपित ने लड़की को छोड़ा। इस दौरान आरोपितों के हाथ में तलवारें और लोहे की रॉड थी। इन लोगों ने उस लड़के को भी धमकाया जिसकी सगाई लड़की से होने वाली थी।

केस में मुख्य आरोपित का नाम सलीम है। ऐसे में जब हिंदू संगठनों को सूचना मिली तो कुछ हिंदू कार्यकर्ता थाने गए। वहाँ उन्होंने पीड़ित परिवार की शिकायत को दर्ज कराया। एक मामला पीड़िता ने रोते-रोते रेप का दर्ज हुआ, वहीं पीड़िता के पिता की शिकायत पर दूसरा मामला भी दायर कराया गया। इसमें मुख्य आरोिपत सलीम, जोधा, समीर और शाहरुख को बनाया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले के संबंध में पुलिस ने बताया कि जब मामला संज्ञान में आया तो आरोपितों के खिलाफ दो मामले दर्ज हुए। इसके बाद मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी हुई और उसे जेल भिजवा दिया गया। पुलिस अन्य आरोपितों की पकड़ के लिए दबिश दे रही है। जाँच के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी

माँ का बह रहा था खून, बगल में बैठा था 3 साल का बेटा… बच्चे के सामने मोहम्मद उमर ने किया रेप, सिर पार मारी ईंट: 500 CCTV की जाँच के बाद दिल्ली पुलिस ने पकड़ा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के गीता कॉलोनी इलाके में एक 25 साल की महिला के साथ दुष्कर्म की घटना घटी है। बताया जा रहा है महिला जिस ई-रिक्शा पर बैठी थी उसी के चालक ने उसे नशीला पदार्थ पिलाकर उसका रेप किया। पुलिस ने इस संबंध में छानबीन के बाद मोहम्मद उमर नाम के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। आगे की जाँच जारी है।

पुलिस कमीश्नर (नॉर्थ) मनोज कुमार मीणा ने बताया कि 26 मई को कोतवाली पुलिस थाने में लूटपाट संबंधी पीसीआर कॉल आई थी। पुलिस शिकायत सुन मौके पर पहुँची तो वो घायल अवस्था में थी और उसके खून बह रहा था। बगल में महिला का तीन साल का बेटा भी था।

पुलिस फौरन महिला को अस्पताल लेकर गई। वहाँ उसकी मेडिकल जाँच हुई और सामने आया कि आरोपित ने महिला के साथ रेप किया है। वहीं महिला ने भी थोड़ी स्थिति सुधरने के बाद मीडिया में बयान दर्ज कराया।

महिला ने बताया कि वो बिहार की रहने वाली है और पंजाब अपने पति से मिलने जा रही थी। 26 मई को वो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन उतरी और सदर बाजार गई। लौटते समय जब उसने ई-रिक्शा किया तो ऑटो चालक ने उसे कोल्ड ड्रिंक पीने को दी। उसी को पीने के बाद वह बेहोश हो गई।

इसके बाद आरोपित महिला को अपने साथ सुनसान इलाके में ले गया। वहाँ पहले उसने उसका बलात्कार किया। जब महिला को होश आने लगा तो महिला ने इसका विरोध किया। इस पर आरोपित ने महिला को चुप कराने के लिए उसके सिर पर ईंट मार दी। महिला दोबारा बेहोश हो गई। होश आने पर पता चला कि महिला का फोन और 3000 नकद रुपए उसके गायब हैं।

पुलिस ने महिला की शिकायत पर जाँच शुरू की। करीबन 500 सीसीटीवी फुटेज जाँचने के बाद एक बैट्री रिक्शा की पहचान हुई और आरोपित की तस्वीर सामने आई। इसके बाद तलाशी अभियान शुरू हुआ। करीबन 150 रिक्शा मालिकों से पूछताछ के बाद उमर पकड़ में आया।

पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर उसके पास से पीड़िता का फोन और अपराध में इस्तेमाल किया गया रिक्शा बरामद कर लिया है। उमर के पकड़े जाने के बाद ये भी सामने आया कि उमर पहले भी लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दे चुका है। अब उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 376, 308, 328, 379 के तहत एफआईआर दर्ज हुई है।

34 दिन बाद भारत लौटा प्रज्वल रेवन्ना, SIT ने बेंगलुरु एयरपोर्ट से किया गिरफ्तार: कर्नाटक सेक्स स्कैंडल खुलासे के बाद भाग गया था जर्मनी

यौन शोषण के आरोपों में घिरे JDS सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु के केम्पागौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से SIT ने गिरफ्तार कर लिया है। वह यूरोप से वापस आए हैं। उनकी फ्लाइट के उतरते ही SIT ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते और MLA एचडी रेवन्ना के बेटे रेवन्ना की फ्लाइट शुक्रवार (31 मई, 2024) रात 12 बजे के आसपास बेंगलुरु आई। वह जर्मनी के म्यूनिख से भारत वापस आए हैं। उनके एयरपोर्ट पर आने से पहले ही SIT ने उनको गिरफ्तार करने की तैयारी कर ली थी।

रेवन्ना से अभी पूछताछ चल रही है। उन्हें रात में पूछताछ के लिए CID दफ्तर ले जाया गया था। उन्हें रात भर यहीं रखा गया है। SIT शुक्रवार (31 मई, 2024) को उन्हें कोर्ट के सामने पेश करेगी जहाँ वह पूछताछ के लिए उनकी रिमांड की माँग करने वाली है।

प्रज्वल रेवन्ना ने भारत आने से पहले इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए एक याचिका लगाई थी। बेंगलुरु की एक अदालत ने इस पर SIT को जवाब दाखिल करने को कहा था। उनकी जमानत पर शुक्रवार को सुनवाई भी होनी है। प्रज्वल रेवन्ना ने 29 मई को ही ऐलान किया था कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों का सामना करने के लिए भारत 31 मई को लौटेंगे।

JDS सांसद 27 अप्रैल को कर्नाटक के हासन में लोकसभा चुनाव समाप्त होने के बाद देश छोड़ कर चले गए थे। उन्होंने भारत अपने ऊपर लग रहे हजारों महिलाओं के यौन शोषण के आरोपों के बीच छोड़ा था। उन पर कर्नाटक के भीतर 2000 से अधिक महिलाओं का यौन शोषण करने का आरोप लगा था।

प्रज्वल रेवन्ना की इस संबंध में कुछ कथित वीडियो भी वायरल की गईं थी। उनके घर काम करने वाली एक महिला ने भी प्रज्वल रेवन्ना और उनके पिता एचडी रेवन्ना के विरुद्ध मामला दर्ज करवाया था। महिला ने आरोप लगाए थे कि उसका यौन उत्पीड़न करने के साथ ही उसे डराया धमकाया गया।

प्रज्वल रेवन्ना के मामले में विदेश मंत्रालय ने बताया है कि उनका डिप्लोमेटिक पासपोर्ट निलंबित करने की कार्रवाई चालू हो गई है। उन्हें इस संबंध में नोटिस जारी किया गया है और 10 दिन के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। उन्होंने इसी डिप्लोमेटिक पासपोर्ट के सहारे देश छोड़ा था।

बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा पर सुपरस्टार रजनीकाँत : ऋषिकेश के दयानंद आश्रम में बिताई थी रात, पिछले साल भी इन धामों में गए थे थलाइवा

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकाँत उत्तराखंड की यात्रा पर हैं। उन्होंने अपनी फिल्मों की शूटिंग पूरी करने के बाद हर साल की तरह इस साल भी केदारनाथ और बदरीनाथ की यात्रा शुरू कर दी है। वो बुधवार की शाम को ही देहरादून के जॉली ग्रांट एयरपोर्ट पहुँचे और फिर ऋषिकेश के लिए निकल गए। गुरुवार को उन्होंने बदरीनाथ और केदारनाथ की यात्रा शुरू कर दी। वो पिछले साल भी यात्रा पर देवभूमि उत्तराखंड पहुँचे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऋषिकेश में स्थित दयानंद आश्रम से रजनीकाँत का गहरा नाता है। वो हर साल यहाँ आते हैं। गुरुवार को रजनीकाँत गंगा आरती करने के बाद यात्रा पर आगे निकल गए। यहाँ वो पिछले साल भी पहुँचे थे, जब उनकी फिल्म जेलर रिलीज हुई थी।

अपनी उत्तराखंड यात्रा को लेकर रजनीकाँत ने कहा, ‘पूरी दुनिया को आध्यात्मिकता की जरूरत है, क्योंकि यह हर इंसान के लिए महत्वपूर्ण है। आध्यात्मिक होने का मतलब है शांति और सुकून का अनुभव करना और मूल रूप से इसमें ईश्वर में विश्वास करना शामिल है। हर साल में अपनी आध्‍यात्‍म‍िक यात्राओं से एक एक अलग और नया अनुभव प्राप्‍त करता हूँ।’

कुछ दिन पहले अबू धाबी में किया था दर्शन, गोल्डन वीजा भी मिला

बता दें कि रजनीकाँत ने बीते दिनों अबू धाबी में ही BAPS हिंदू मंदिर जाकर दर्शन किए थे। मंदिर से रजनीकाँत का वीडियो BAPS हिंदू मंदिर के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट की गई थी। रजनीकांत को यूएई के संस्कृति और पर्यटन विभाग ने गोल्डन वीजा दिया है। सुपरस्‍टार ने गोल्‍डन वीजा मिलने पर सहयोग के लिए अबू धाबी सरकार और अपने दोस्‍त, लुलु ग्रुप के चेयरमैन एमए यूसुफ अली का आभार व्यक्त किया था।

सिल्वर स्क्रीन पर अब भी रजनीकाँत का चलता है जादू

हाल ही में रजनीकाँत ने टीजे ज्ञानवेल के डायरेक्‍शन में बन रही ‘वेट्टैयन’ की शूटिंग पूरी की है। इस फिल्‍म में वह अमिताभ बच्चन के साथ नजर आएँगे। यह रजनीकाँत के करियर की 170वीं फिल्‍म है। ‘वेट्टैयन’ इसी साल अक्टूबर महीने में रिलीज होगी। वह आगे लोकेश कनगराज के डायरेक्‍शन में फिल्‍म ‘कुली’ में भी नजर आएँगे।

200+ रैली और रोडशो, 80 इंटरव्यू… 74 की उम्र में भी देश भर में अंत तक पिच पर टिके रहे PM नरेंद्र मोदी, आधे तक भी नहीं पहुँच पाए राहुल गाँधी

लोकसभा चुनाव 2024 का रण अब समाप्ति की ओर है। 1 जून 2024 को सातवें चरण का मतदान होगा और 4 जून को नतीजे आ जाएँगे। इस लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान थम चुका है। इस चुनाव प्रचार अभियान की अगुवाई की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। पूरे चुनाव में वो देश भर की यात्रा करते रहे, जनसभाओं को संबोधित करते रहे। रोड शो करते रहे और मीडियो को इंटरव्यू देते रहे। पूरे चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर तरफ छाए रहे। उन्हें कोई नेता चुनौती नहीं दे पाया।

वहीं, विपक्ष के लिए सबसे बड़े नेता के तौर पर राहुल गाँधी रैलियों, जनसभाओं के मामले में आधे पर भी नहीं पहुँचे, तो मीडिया को इंटरव्यू देने के मामले में कहीं भी पीएम मोदी की बराबरी नहीं करते दिखे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रैलियों में पीछे छोड़ने वाले उनके सहयोगी और देश के गृहमंत्री अमित शाह का नाम है, जिन्होंने पीएम मोदी से ज्यादा रैलियों, जनसभाओं को संबोधित किया। हालाँकि रोड शो और मीडिया इंटरव्यू में वो भी पीछे रह गए।

आखिरी दिन सभी नेताओं ने झोंकी पूरी ताकत

लोकसभा चुनाव 2024 की घोषणा होने के साथ ही चुनाव प्रचार गुरुवार (30 मई 2024) को थम गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के होशियारपुर में अपनी आखिरी रैली की और वो अब तमिलनाडु के रामेश्वरम में ध्यान लगा रहे हैं। पीएम मोदी के अलावा राहुल गाँधी, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कॉन्ग्रेस की नेता प्रियंका गाँधी जैसे बड़े नेताओं ने आखिरी दिन जनसभाओं, रैलियों में हिस्सा लिया। ममता बनर्जी ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन कोलकाता में 8 किमी लंबी पदयात्रा की।

बता दें कि लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण में 1 जून को मतदान होना है। देश के 8 राज्यों और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश को मिलाकर कुल 57 सीटों पर मतदान होना है। इसी चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट भी है, तो योगी आदित्यनाथ का गढ़ गोरखपुर भी। चंडीगढ़ और पंजाब के साथ ही बिहार और अन्य राज्यों में भी मतदान होना है।

रैलियों, जनसभाओं में पीएम मोदी ने मारी बाजी

लोकसभा चुनाव 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुल 206 सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 मीडिया इंटरव्यू भी दिए हैं। पिछली बार साल 2019 के चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 68 दिनों में 145 सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था, लेकिन इस बार उन्होंने 75 दिनों में 206 सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया है।

लोकसभा चुनाव 2024 के सात चरणों वाले लंबे-चौड़े चुनावी कार्यक्रम के दौरान दिग्गजों ने खूब जोर लगाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अमित शाह ने कुल 188 रैलियाँ, रोड शो में हिस्सा लिया। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पार्टी के चुनावी कार्यक्रम भी इसमें जोड़ लिए जाएँ तो संख्या 221 तक पहुँच जाती है। गृह मंत्री अमित शाह ने पूरे चुनाव में हवाई मार्ग और सड़क मार्ग से 1 लाख 10 हजार किलोमीटर की दूरी कवर की। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने 107 रैलियाँ और रोड शो किए तो अखिलेश यादव ने 69 रैलियों और 4 रोड शो में हिस्सा लिया। वहीं, ममता बनर्जी ने 61 रैलियों, रोड शो और पदयात्राओं में हिस्सा लिया।

बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दो अप्रैल 2024 से 30 मई 2024 तक 23 राज्यों और चार केंद्र शासित राज्यों का दौरा किया। उन्होंने 125 लोकसभा सीटों पर प्रचार किया और 134 चुनावी सभा और रोड शो किए। जेपी नड्डा ने चुनाव में कुल 85,957 किलोमीटर की यात्रा की। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी खूब सक्रिय रहे और उन्होंने कुल 101 चुनावी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने 94 रैलियाँ की और सात रोड शो किए।

कॉन्ग्रेस की बात करें तो राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खड़गे भी खूब सक्रिय दिए। सबसे ज्यादा सक्रियता प्रियंका गाँधी की रही, जिन्होंने 140 से ज़्यादा रैलियाँ और रोड शो किए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से 100 बार बातचीत की। वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने 100 से ज़्यादा रैलियाँ, 20 से ज़्यादा प्रेस कॉन्फ्रेंस और 50 से ज़्यादा इंटरव्यू दिए। हालाँकि बिहार के नेता सभी से आगे निकल गए। बिहार में तेजस्वी यादव ने 6 अप्रैल से कुल 251 जनसभाओं को संबोधित किया, तो बिहार के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने 551 छोटी-बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया।

जहाँ माता कन्याकुमारी के ‘श्रीपाद’, 3 सागरों का होता है मिलन… वहाँ भारत माता के 2 ‘नरेंद्र’ का राष्ट्रीय चिंतन, विकसित भारत की हुंकार

30 और 31 मई को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के शहर कन्याकुमारी के प्रवास पर रहेंगे। देश में चल रहे लोकसभा चुनाव अब अपने अंतिम चरण की ओर है, सिर्फ सातवें चरण का मतदान बाकि है। अपने इतने व्यस्त कार्यक्रम के बीच प्रधानमंत्री मोदी का कन्याकुमारी जाना कोई साधारण घटनाक्रम नहीं है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी में ‘विवेकानंद शिला स्मारक’ में स्थित स्वामी विवेकानंद की मूर्ति ओर ‘ध्यान मंडपम’ में ध्यान ओर साधना करने वाले हैं। इस स्मारक के साथ स्वामी विवेकानंद का नाम जुड़ा हुआ है क्योंकि उन्होंने भी यहाँ ध्यान ओर साधना की थी।

अपने सम्पूर्ण भारत के प्रवास के बाद जब स्वामी विवेकानंद दिसंबर 1892 को कन्याकुमारी पहुँचे तो उन्होंने माता कन्याकुमारी मंदिर के दर्शन किए और फिर समुद्र के बीच में स्थित शिला पर तैर कर गए। इस शिला पर 25, 26, 27 दिसंबर 1892 को स्वामी विवेकानंद ने साधना करने के बाद भारत के पुनरुत्थान के लिए अपना कार्य शुरू किया।

स्वामी विवेकानंद की ध्यानस्थली होने के अतरिक्त इस शिला की दो और विशेषताएँ हैं। पहली यहाँ माता कन्याकुमारी के ‘श्रीपाद’ आज भी विद्यमान हैं। और दूसरी, यह शिला ‘तीन सागरों’ के संगम के बीचोंबीच स्थित है।

दक्षिण भारत के अंतिम छोर कन्याकुमारी में स्थित इस शिला पर बाद में स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी पर उनका स्मारक बनाने का विचार आया। 1972 में ‘विवेकानंद केंद्र’ की स्थापना करके इस स्मारक को जीवंत करने का कार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक माननीय एकनाथ रानाडे ने किया था।

स्वामी विवेकानंद का संन्यासी जीवन से पूर्व का नाम भी नरेंद्र था और भारत के प्रधानमंत्री भी नरेंद्र हैं। जगह भी वही है, शिला भी वही है और चिंतन का विषय भी। ध्यान और चिंतन भारतवासियों के लिए जीवन पद्धति का भाग है। लेकिन अधिकतर व्यक्ति अपनी आत्मोन्नति और आत्मविकास के लिए ध्यान और चिंतन करते हैं।

स्वामी विवेकानंद का कन्याकुमारी की शिला पर किया हुआ ध्यान इसलिए इतना प्रसिद्ध और चर्चित हुआ क्योंकि यह ध्यान और चिंतन व्यक्तिगत लाभ और हानि पर न केंद्रित होते हुए राष्ट्र के पुनरुत्थान पर केंद्रित था। उस समय भारत पर अंग्रेजों का शासन था। राजनीतिक गुलामी के साथ-साथ आर्थिक और सांस्कृतिक तौर पर भी भारत अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा था। भारतीय नवसंतति आत्मसम्मान, आत्मगौरव और आत्मविश्वास खो चुकी थी। उस समय स्वामी विवेकानंद ने उनके अंदर अतीत के प्रति गर्व और भविष्य के प्रति विश्वास जागृत किया था। उन्होंने कहा था:

“मेरा विश्वास युवा पीढ़ी में है, आधुनिक पीढ़ी में है। उनमें से मेरे कार्यकर्ता आएँगे। वे शेरों की तरह पूरी समस्या का समाधान करेंगे।”

आज भारत को स्वाधीन हुए 75 वर्षों से ज्यादा हो गया है। हर क्षेत्र में भारत ने उन्नति की है। चाहे वह एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति के तौर पर हो या फिर अन्य क्षेत्र। कृषि, दूध उत्पादन, उद्योग, वाणिज्य, विज्ञान, अंतरिक्ष मिशन, सेना, खेल – हर क्षेत्र में हमने वैश्विक पटल पर झंडे गाड़े हैं। आज भारत के पास विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा के तौर पर ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ भी है। विश्व के सबसे बड़े रेल और सड़क नेटवर्क वाले देशों की श्रेणी में भी भारत का नाम आता है।

भारत आज एक विकासशील देश है और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उसने ‘विकसित भारत’ बनने की हुंकार भरी है। यह मात्र स्वप्न नहीं है बल्कि संकल्प है। इसका एक उदाहरण है विश्व के अनेकों देशों का भारत के प्रति बढ़ता विश्वास, जिसकी एक झलक हमें G20 सम्मेलन में दिखी भी। इतिहास में भारत अकेला ऐसा देश है, जो भले ही विकासशील देशों की श्रेणी में आता है लेकिन उसे ‘वर्ल्ड लीडर’ के तौर पर देखा जा रहा है।

इसलिए प्रधानमंत्री मोदी का ध्यान और चिंतन व्यक्तिगत ना रहते हुए ‘विकसित भारत’ पर केंद्रित होगा। स्वामी विवेकानंद ने पश्चिम के सामने हुंकार भरी थी कि आने वाली शताब्दी भारत की होगी। उस स्वप्न को अब पूर्ण करना होगा। इसलिए चाहे वह स्वामी विवेकानंद हों या अब प्रधानमंत्री मोदी… चिंतन का विषय व्यक्तिगत नहीं राष्ट्रीय है, जिसका केंद्र बिंदु भारत माता हैं।

स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शहर शिकागो में आयोजित ‘विश्व धर्म महासभा’ में जो भारतीय संस्कृति का परिचय करवाया, उसी क्रम में 27 सितम्बर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ का प्रस्ताव रख कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे आगे बढ़ाया। इसकी सफलता हमें 11 दिसम्बर 2014 को मिली, जब संयुक्त राष्ट्र में 177 सदस्य देशों द्वारा 21 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई।

विवेकानंद शिला स्मारक: संघर्ष और निर्माण की कहानी

एकनाथ रानडे की पुस्तक ‘कथा विवेकानंद शिला स्मारक की’ हमें स्मारक निर्माण के विभिन्न पहलुओं से अवगत करवाती है। इस स्मारक के निर्माण का विचार स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी पर उत्पन्न हुआ, जो 1970 में माननीय एकनाथ रानाडे के प्रयासों से पूर्ण हुआ।

तमिलनाडु के तब के मुख्यमंत्री भक्तवसलम ने उस शिला पर निर्माण करने से स्पष्ट मना कर दिया था। इनके अलावे केंद्रीय सांस्कृतिक मामलों के मंत्री हुमायूँ कबीर ने ‘शिला पर स्मारक प्राकृतिक सौंदर्य को खराब कर देगा’ कह कर बाधाएँ खड़ी की थीं। अंततः जीत लेकिन एकनाथ रानडे के दृढ़ निश्चय की ही हुई।

अपने कुशल प्रबंधन, धैर्य एवं पवित्रता के बल पर माननीय एकनाथ रानाडे ने इस मुद्दे को राजनीति से दूर रखते हुए विभिन्न स्तरों पर स्मारक के लिए लोक संग्रह किया। रानाडे ने विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों को अपनी विचारधारा से ऊपर उठकर ‘भारतीयता की विचारधारा’ में पिरो दिया और तीन दिन में 323 सांसदों के हस्ताक्षर लेकर तब के गृहमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के पास पहुँच गए। जब इतनी बड़ी संख्या में सांसदों ने स्मारक बनने की इच्छा प्रकट की तो संदेश स्पष्ट था कि पूरा देश स्मारक की आकांक्षा करता है।

समाज को स्मारक से जोड़ने के लिए लगभग 30 लाख लोगों ने 1 रुपया, 2 रुपए और 5 रुपए भेंट स्वरूप दिए। उस समय के लगभग 1% युवा जनसंख्या ने इसमें भाग लिया। रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी वीरेश्वरानंद महाराज ने स्मारक को प्रतिष्ठित किया और इसका औपचारिक उद्घाटन 2 सितंबर, 1970 को भारत के राष्ट्रपति श्री वीवी गिरि ने किया।

‘अल्लाह माफ़ नहीं करेगा’: कुरान की कसम देकर 16 साल की लड़की का बलात्कार करता था मौलवी शाहनवाज, 7 माह की गर्भवती हुई नाबालिग

बिहार के मधुबनी में मौलवी कारी शाहनवाज एक 16 साल की किशोरी का रेप करता था। वो उसे कुरान की कसमें देता था और कहता था कि ‘किसी से बताओगी तो अल्लाह माफ नहीं करेगा।’ पीड़ित किशोरी का साल भर से अधिक समय से मौलवी रेप करता रहा। जब बच्चों की क्लास खत्म हो जाती, तो वो किशोरी को रोक लेता और मुँह में कपड़ा ठूँसकर उसके साथ संबंध बनाता। यही नहीं, किसी से बोलने पर चाकू का डर दिखाता। किशोरी डर की वजह से किसी को कुछ बता ही नहीं पाई, लेकिन जब वो 7 माह की गर्भवती हो गई, तो घर वालों को कुछ शक हुआ, तब जाकर ये मामला खुला।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला मधुबनी जिले के खुटौना थाना इलाके का है। जहाँ एक मदरसे के हेड मौलवी कारी शाहनवाज, जिस पर बच्चों को कुरान की आयतें सिखाने की जिम्मेदारी थी। उसने मदरसे की बच्ची को ही अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया। कुरान की आयतें सिखाते-सिखाते कब उसकी नीयत 14-15 साल की बच्ची पर डोल गई, और उसे वो अपनी हवस का शिकार बनाने लगा, ये किसी को पता ही नहीं चला। कारी शाहनवाज बच्चों की छुट्टी के बाद उसे रोक लेता और बच्चों के जाने के बाद मदरसे में ही उसके मुँह में कपड़ा ठूँसकर अपना मुँह काला करता।

पीड़ित किशोरी की अम्मी से पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि कारी शाहनवाज मेरी बेटी को कुरान का डर दिखाता और कहा कि अगर किसी से कुछ कहा तो अल्लाह माफ नहीं करेगा। वो चाकू का भी डर दिखाता था। लेकिन बच्ची के शरीर में हो रहे बदलावों की वजह से घर वालों की नजर पड़ी, तो पूछताछ करने पर मामला सामने आया। पीड़ित की अम्मी ने कहा कि मौलवी ने बच्ची के अब्बू से कहा था कि ‘बेटी पढ़ने में तेज है, उसे पढ़ने के लिए मेरे पास भेजा करो।’

इस मामले में खुटौना थानाध्यक्ष नीतीश कुमार ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। वहीं मदरसा के हेड मौलवी द्वारा नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म की सूचना से ग्रामीण आक्रोशित हैं, ग्रामीणों ने मौलवी को सख्त सजा देने की माँग की है। साथ ही आक्रोशित लोगों ने मदरसा में ताला जड़ दिया है।