पाकिस्तान में ईद उल अजहा से पहले डकैती का नया ट्रेंड सामने आया है। वहाँ बदमाश अब दिनदहाड़े लोगों की बकरियाँ चुराने लगे हैं। ये वो बकरियाँ होती हैं जिन्हें लोग अपने घर कुर्बानी देने के लिए खरीदकर लेकर आते हैं। इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आई है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि एक युवक खुली सड़क पर दिन के उजाले में अपनी बकरियों को घुमा रहा था। इसी बीच एक होंडा गाड़ी आई, उसमें से तीन लोग निकले और बकरी डकैती की घटना को अंजाम दिया गया।
वीडियो में देख सकते हैं कि गाड़ी से निकलकर पहले उस युवक को बंदूक दिखाकर एक बदमाश ने रोका और फिर बाकी दोनों बदमाशों ने बकरे पकड़े और गाड़ी में जबरदस्ती ठूँस कर खुद गाड़ी में बैठ गए। इसके बाद जो लड़का गन लेकर खड़ा था वो भी गाड़ी में बैठ गया और सब वहाँ से फरार हो गया।
बताया जा रहा है लाहौर के इकबाल शहर में दिन-दहाड़े बकरियों की डकैती हुई है। अब वहाँ लोग अपने जानवरों को घर से बाहर लाने-ले जाने से डरने लगे हैं।सोशल मीडिया पर भी इस घटना की सीसीटीवी फुटेज वायरल है।
लाहौल विला कुव्वत, ये हालत हो गई है पाकिस्तान की ?
इसे देख अन्य लोग हैरानी जता रहे हैं। पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़ा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्या वहाँ ऐसी स्थिति हो गई कि लोगों को बकरे चुराकर अपने त्योहार मनाने पड़ रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि महंगाई के कारण पाकिस्तान में ऐसी चोरियाँ आम हो रही हैं।
कभी कॉन्ग्रेस के मुखपत्र की तरह रहे एनडीटीवी में बड़े ओहदे पर रहे रवीश कुमार आजकर यूट्यबर बन चुके हैं, लेकिन उनके अंदर बैठा एक खास विचारधारा का कार्यकर्ता यू-ट्यूब पर भी उनसे वही काम करा रहा है, जो वो न्यूज चैनल के पर्दे पर किया करते थे। खुद को ‘निष्पक्ष’ बताकर ‘भौकाल’ टाइट रखने वाले रवीश कुमार ने 30 मई 2024 को एक नया वीडियो अपने यू-ट्यूब चैनल पर पोस्ट किया है, जिसमें वो ममता बनर्जी की रैलियों के बारे में बता रहे हैं। बता तो क्या ही रहे हैं, खुद की जुबान से न सिर्फ ममता बनर्जी की भाषा बोल रहे हैं, बल्कि वो ये साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि दूसरे नेताओं की रैलियों को कवर करने वाले चैनल और पत्रकार गोदी मीडिया के लोग हैं और वो ‘महा पत्रकार’ हैं, जो ‘गरीबों’ यानी जिनको कोई पूछने वाला नहीं, उन्हें दिखा रहे हैं।
रवीश कुमार इस वीडियो में ममता बनर्जी की बातों को दोहराते दिख रहे हैं। कंटेंट और रिसर्च के नाम पर इस वीडियो में कुछ भी नहीं है, सिवाय ममता बनर्जी के आरोपों को दोहराने और बीजेपी-नरेंद्र मोदी से अपनी नफरत-खीझ दिखाने के।
रवीश कुमार संदेशखाली के वीभत्स मुद्दे को बीजेपी की साजिश से जोड़ते हैं और इसके बारे में पूरे देश को जानकारी हुई, तो गलती गोदी मीडिया की हुई। रवीश कुमार ये नहीं बताते कि संदेशखाली मुद्दे को कवर करते हुए कितने पत्रकारों को ममता बनर्जी की सरकार ने अपना शिकार बनाया। कितनी जमीनों को शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों ने दशक भर से कब्जा किया था, कितनी कृषि योग्य भूमि को टीएमसी के गुंडों ने तालाब बना दिया था। चूँकि ममता बनर्जी ने कहा कि ये बीजेपी की साजिश थी और इसे गोदी मीडिया ने ही कवर किया, ऐसे में रवीश कुमार ने एकदम पालतू वाली स्टाइल में उन्हीं बातों को दोहरा दिया। उनकी ये बकवास 22.10 मिनट से 22.55 के बीच सुन सकते हैं।
जिन्हें कोई दिखा नहीं रहा, ये कैसा दावा?
रवीश कुमार का ये दावा कि नेशनल मीडिया पीएम नरेंद्र मोदी के अलावा किसी को नहीं दिखा रहा, ये सरासर झूठ है। बदमाशी है। प्रियंका गाँधी ने इस लोकसभा चुनाव में 100 से ज्यादा बार मीडिया से बातचीत की है। प्रियंका गाँधी का इंटरव्यू लेने राजदीप सरदेसाई (रविश के पुराने साथी) पूरे दल-बल और मालिकान के साथ गए थे, तो अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का मीडिया इंटरव्यू हर रोज आता है। अरविंद केजरीवाल, राहुल गाँधी की मीडिया कवरेज भी सबके सामने है।
बात करते हैं उनके इस वीडियो की मालकिन ममता बनर्जी की। जाधवपुर में चल रही उनकी पदयात्रा से राजस्थान के चुरु निवासी किसी व्यक्ति या मतदाता को क्या मतलब हो सकता है, जो वो ममता बनर्जी की पदयात्रा को लाइव टीवी पर देखे। उसे देखना ही होगा, तो वो यूट्यूब पर देख लेगा। आजकल सारी राजनीतिक पार्टियाँ यू-ट्यूब का इस्तेमाल कर भी रही हैं। ऐसे में रवीश कुमार का ये कहना, कि वो ममता बनर्जी को दिखा रहे हैं, इसलिए वो गोदी मीडिया नहीं, बल्कि सब गोदी मीडिया है, बेहद मचकानी बात है। खुद सोचिए, चूँकि रवीश ने बताया भी है कि साउथ कोलकाता में ममता बनर्जी ने 35 डिग्री सेल्सियस की गर्मी में 12 किमी की पदयात्रा की, जो बहुत जोरदार रही। ऐसे में मैं ये जानना चाहूँगा कि साउथ कोलकाता में ममता बनर्जी की पदयात्रा का शिमला में बैठे किसी आम आदमी का क्या लेना-देना?
वैसे, विपक्ष की रैली खूब दिखाई जा रही है, सभी के सोशल मीडिया हैंडल पर देखेंगे, तो ये दिखता जाएगा, लेकिन रवीश कुमार को नहीं दिखता, क्योंकि आँखों में एक खास पट्टी बाँध रखी है। रवीश की मानें, तो विपक्ष की रैली दिखानी चाहिए, तभी वो गोदी मीडिया में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन सिर्फ ममता बनर्जी की रैली और ममता बनर्जी की बातों को दोहराने वाले को ‘तलवा चाटने वाला पत्रकार’ कह सकते हैं कि नहीं, ये रवीश से पूछा जाना चाहिए।
खैर, सर्टिफिकेट आजतक मुफ्त में बँटते हैं, तो रवीश कुमार भी अपनी एक ब्रांच ‘गोदी मीडिया’ और ‘पिडी मीडिया’ की खोलकर बैठ गए हैं। जिसे वो गोदी मीडिया बोल दें, उस पर गोदी मीडिया का ठप्पा लग जाता है और बाकी लोग ‘पिडी मीडिया’ के हिस्से हैं ही।
पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस में पुलिस ने नाबालिग आरोपित की माँ को गिरफ्तार कर लिया है। उसने ही अपने ब्लड सैंपल को बेटे के ब्लड सैंपल से बदला था, ताकि शराब पीकर एक्सीडेंट करने वाला उसका नाबालिग बेटा बच जाए। इस मामले की जानकारी सामने आने के बाद से वो फरार हो गई थी, लेकिन अब पुणे पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच, नाबालिग के दोस्त ने बताया है कि आरोपित किशोर शराब के नशे में धुत होकर गाड़ी चला रहा था। हादसे के समय स्टेयरिंग उसी के हाथ में थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्लड सैंपल बदलने के मामले का खुलासा होने के बाद शिवानी अग्रवाल मुंबई भाग गई थी, लेकिन वो शुक्रवार (31 मई 2024) की रात पुणे लौट आई। उसके आते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में ससून अस्पताल के दो डॉक्टर और एक वार्ड बॉय पहले से ही पुलिस की हिरासत में हैं। शिवानी अग्रवाल के साथ ही इस केस में विशाल अग्रवाल को भी नामजद किया गया है। वो डॉक्टरों से लगातार संपर्क में था और सैंपल बदलने के लिए उसी ने पैसों की पेशकश की थी।
बता दें कि पुलिस की जाँच में ये बात सामने आई है कि शराब के नशे में धुत नाबालिग के ब्लड सैंपल को उसकी माँ के ब्लड सैंपल से ही बदला गया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक नाबालिग लड़के की माँ शिवानी अग्रवाल ने पुणे के ससून जनरल अस्पताल में अपना ब्लड सैंपल दे दिया था। इस सैंपल को ही उनके बेटे के सैंपल के साथ बदल दिया गया। ये हेराफेरी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रीहरि हलनोर और उनके स्टाफ ने की थी। इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद डॉ. हलनोर और डॉ. अजय तावड़े को गिरफ्तार कर लिया गया था।
दरअसल, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट में पहले ब्लड सैंपल में अल्कोहल नहीं पाया गया। संदेह होने पर एक दूसरे अस्पताल में फिर टेस्ट किया गया। यहाँ खुलासा हुआ कि ब्लड सैंपल दो अलग-अलग व्यक्तियों के थे। दूसरे टेस्ट की रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस को शक हुआ कि ससून अस्पताल के डॉक्टरों ने आरोपित को बचाने के लिए सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है।
लोकसभा चुनाव 2024 में सातवें और आखिरी चरण का मतदान जारी है। मतदान की शुरुआत से ही पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसाओं की खबरें सामने आने लगी हैं। हर बार की तरह इस बार भी टीएमसी कार्यकर्ताओं ने विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर हमला किया। कहीं बमबाजी की है, तो कहीं लाठियों का सहारा लिया है। वहीं, दक्षिण 24 परगना जिले में टीएमसी के गुंडों द्वारा धमकाने पर बिफरी भीड़ ने ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को तलाब के पानी में फेंक दिया। इस बीच, संदेशखाली और भाँगड़ में बम भी चलाए गए हैं।
चुनाव आयोग ने बताया है कि दक्षिण 24 परगना जिले के कुलताई में ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को निशाना बनाया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जानकारी दी है कि ‘आज (1 जून 2024) की सुबह 6.40 बजे 19-जयनगर (एससी) पीसी के 129-कुलतली एसी में बेनीमाधवपुर एफपी स्कूल के पास सेक्टर अधिकारी के रिजर्व ईवीएम और कागजात स्थानीय भीड़ द्वारा लूट लिए गए और 1 सीयू, 1 बीयू, 2 वीवीपीएटी मशीनों को एक तालाब के अंदर फेंक दिया गया… सेक्टर अधिकारी द्वारा एफआईआर दर्ज की गई है और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सेक्टर के तहत सभी छह बूथों में मतदान प्रक्रिया निर्बाध रूप से चल रही है। सेक्टर अधिकारी को नए ईवीएम और कागजात उपलब्ध कराए गए हैं।’
West Bengal Chief Electoral Office tweets, "Today morning at 6.40 am Reserve EVMs & papers of Sector Officer near Benimadhavpur FP school, at 129-Kultali AC of 19-Jaynagar (SC) PC has been looted by local mob and 1 CU, 1 BU , 2VVPAT machines have been thrown inside a pond…FIR… pic.twitter.com/fciLxNL9jL
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के कुलतई में बूथ संख्या 40, 41 पर भीड़ द्वारा कथित तौर पर ईवीएम और वीवीपैट मशीन को पानी में फेंक दिया गया। स्थानीय लोगों ने बताया कि मतदाताओं को कथित तौर पर टीएमसी समर्थकों ने धमकी दी है। इससे गुस्साई भीड़ ने ईवीएम को निशाना बनाया और मशीनों को तालाब में फेंक दिया। हालाँकि यहाँ मशीनों को बदला गया और मतदान का काम जारी है।
VIDEO | Lok Sabha Elections 2024: EVM and VVPAT machine were reportedly thrown in water by a mob at booth number 40, 41 in Kultai, South 24 Parganas, #WestBengal.
पत्रकार सुभी विश्वकर्मा ने 2 जगहों पर बमबारी की घटना की जानकारी दी है। उन्होंने वीडियो भी पोस्ट किए हैं। पहली घटना जाधवपुर लोकसभा क्षेत्र के भाँगड़ इलाके की है, जहाँ बमबाजी की गई। वहीं, संदेशखाली में भी बमबाजी की वारदात सामने आई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अधिकारी महिलाओं और महिला बूथ कार्यकर्ताओं के साथ ही मतदाताओं को टीएमसी के पक्ष में वोटिंग के लिए धमका रहे हैं।
With polling for the Lok Sabha Elections in its last leg, tensions broke out in the Jadhavpur constituency of #Bengal.
Reports of bombings surfaced in the Bhangar area, and similar incidents were reported from Sandeskhali, where police conducted door-to-door checks on women's ID… pic.twitter.com/SVsRerLZvU
पश्चिम बंगाल बीजेपी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधा है। बीजेपी ने पूछा है कि ये बम कहाँ से आ रहे हैं। पश्चिन बंगाल बीजेपी ने एक्स पर लिखा, “सातवें चरण के मतदान में भी टीएमसी का आतंक जारी है। सतुलिया, भांगड़ में बम धमाके हो रहे हैं। ममता बनर्जी, जो जानती हैं कि ये बम कौन बना रहा है, फिर भी ये धमाके होने दे रही हैं। ममता बनर्जी, ये सारे बम कहाँ से आ रहे हैं?”
TMC’s reign of terror persists in the seventh phase of voting.
Bomb blasts are rampant in Satulia, Bhangar. Mamata Banerjee, who knows exactly who is making these bombs, is still allowing these explosions to occur.
लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम चरण में सुबह 9 बजे तक 11.31 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 14.35%, झारखंड में 12.15%, बिहार में 10.58%, चंडीगढ़ में 11.6%, यूपी में 12.94%, ओडिशा में 7.69%, पंजाब में 9.64% और पश्चिम बंगाल में 12.64% मतदान हुआ है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 57 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वाराणसी सीट भी शामिल है। जिन सीटों पर आज वोटिंग हो रही है, उसमें पंजाब और यूपी की 13-13 सीटें, पश्चिम बंगाल की 9 सीटें, बिहार की 8 सीटें, ओडिशा की 6 सीटें, हिमाचल प्रदेश की 4 सीटें, झारखंड की 3 सीट और एक चंडीगढ़ सीट शामिल है।
नेपाल में तैनात चीन के राजदूत चेन सॉन्ग ने नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र बुधथोकी को धमकाने का प्रयास किया, लेकिन उसे मुँह की खानी पड़ी। दरअसल, वरिष्ठ पत्रकार गजेंद्र बुधथोकी ने पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बनाने के लिए चीन से मिले कर्ज को लेकर बड़ा दावा किया था, लेकिन चीनी राजदूत चेन सॉन्ग उनसे एक्स पर ही उलझ गए। उन्होंने पत्रकार के दावे को गलत बताते हुए माफी की माँग की थी, लेकिन पत्रकार ने कहा कि उनके पास आधिकारिक दस्तावेज हैं, ऐसे में चीन के राजदूत उन्हें धमकाने की कोशिश न करें।
Do not intimidate me, know your boundaries Mr. Chen, I have evidence from the Nepal Government. https://t.co/B061GIsx0y
— Gajendra Budhathoki ♿ (@gbudhathoki) May 29, 2024
इस विवाद की शुरुआत तब हुई, जब पत्रकार गजेंद्र बुधाथोकी ने दावा किया कि ‘पोखरा एयरपोर्ट के लिए लोन पर ब्याज दर का भुगतान 2% नहीं बल्कि 5% की दर से किया जा रहा है।’ इसे चीनी राजदूत चेन सॉन्ग ने सरासर गलत बताते हुए लिखा, ‘मैं अपने जीवन में इससे बड़ा झूठ नहीं देखा। सार्वजनिक तौर पर जो जानकारी उपलब्ध है, उसके बावजूद इतना बड़ा झूठ बोलने की हिम्मत कर रहे हो’।
पत्रकार ने इसके जवाब में कहा कि ‘मैं सबूतों के साथ पर्दाफाश करूँगा।’ इसके बाद चीनी राजदूत धमकाने वाली भाषा पर उतर आए। और लिखा, ‘मेरी माँग है कि ‘तुम और जिनकी भी तुम नुमाइंदगी करते हो, उनकी तरफ से औपचारिक तौर पर माफी माँगो।’
एक-दूसरे पर हमलावर हुए पत्रकार और चीनी राजदूत
क्या है पोखरा एयरपोर्ट से जुड़े कर्ज जाल का मामला?
दुनिया में बहुत सारे देश चीनी कर्ज के जाल में फँसकर तबाह हो चुके हैं। श्रीलंका, पाकिस्तान जैसे देशों की हालत किसी से छिपी नहीं है, तो नेपाल भी उसी जाल में फँस चुका है। चीन एक ओर अमेरिका से टक्कर लेने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी ओर वो छोटे-छोटे देशों को विकास परियोजनाओं का लालच दिखाकर कर्ज के जाल में फँसा रहा है। भारत के पड़ोसी नेपाल में भी ऐसी ही स्थिति बन गई है, जहाँ ड्रैगन ने प्रेशर डालकर पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनवा तो लिया, लेकिन अब ये प्रोजेक्ट नेपाल सरकार के गले की फाँस बन गई है। ऊपर से पोखरा एयरपोर्ट को बनाने वाली सरकारी कंपनी को इतना महँगा लोन मिला है कि वो मूलधन तो छोड़िए, ब्याज भी नहीं चुका पा रही है। ब्याज की बात तो काफी बाद में, वो अपने परिचालन का खर्च तक नहीं निकाल पा रही है।
इस बीच, ये बात सामने आ रही है कि चीन ने कागजों पर तो पोखरा एयरपोर्ट के लिए 2% की ब्याज दर से लोन दिया है, लेकिन पोखरा एयरपोर्ट अथॉरिटी से 5% प्रतिशत ब्याज दर की वसूली हो रही है। इस पूरे मामले की पोल नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार ने खोली, तो नेपाल में चीन का राजदूत उन्हें सोशल मीडिया पर ही धमकाने लगा। इसके बाद ये मामला बढ़ गया और नेपाल के साथ ही चीन भी बैकफुट पर आता दिख रहा है, क्योंकि जिस प्रोजेक्ट को लेकर चीन ने 2% ब्याज दर का दिखावा किया, वो 5% प्रतिशत निकला है, ऐसे में आम जन का आक्रोश भी बढ़ता दिखा है।
पोखरा एयरपोर्ट के निर्माण लागत पर 5% ब्याज की वसूली
क्या है ब्याज दर का मामला?
दरअसल, चीन ने आधिकारिक तौर पर इस एयरपोर्ट के निर्माण के लिए 2% पर ही लोन दिया है, लेकिन एयरपोर्ट परिचालन करने वाली कंपनी को इसे 5% पर ही लौटाना है। लोक ऋण प्रबंधन कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, हवाई अड्डे के निर्माण के लिए सरकार द्वारा चीन से लिए गए लोन की ब्याज दर केवल दो प्रतिशत है। लेकिन चीनी सरकार और नेपाल सरकार के बीच समझौते में दो तरह के लोन हैं। पहली तरह का लोन- 2 % के हिसाब से और दूसरा 0% के हिसाब से। लेकिन मामला यहाँ पर ये फँसता है कि नेपाल के वित्त मंत्रालय और पोखरा एयरपोर्ट अथॉरिटी के बीच एक अन्य समझौता हुआ है, जिसमें चीनी पैसा सीधे एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास न जाकर, नेपाल सरकार के पास गया। और अब पैसा नेपाल सरकार के माध्यम से चीन को जाएगा। चूँकि ये लोन गवर्नमेंट टू बैंक है। ऐसे में नेपाली वित्त मंत्रालय इस लोन पर 2% नहीं, बल्कि 5% की दर से एयरपोर्ट अथॉरिटी से पैसा वसूल रही है। ये 3% का मार्जिन नेपाल सरकार रख ले रही है। ऐसे में पोखरा एयरपोर्ट का परिचालन करने वाली कंपनी को लोन की दर 5% ही पड़ रहा है और ये जानकारी आधिकारिक है। यही दावा पत्रकार ने भी किया है।
वैसे, एक बात और है कि इस एयरपोर्ट का उद्घाटन जब 1 जनवरी 2023 को हुआ था, तो चीन ने दुनिया को ये बताने की कोशिश की थी कि ये प्रोजेक्ट उसके अति-महत्वाकाँक्षी प्रोजेक्ट बीआरआई का हिस्सा है, लेकिन नेपाल सरकार ने उसके दावे को खारिज करते हुए साफ कर दिया था कि अभी तक नेपाल में बीआरआई के तहत कोई भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ है। चीन का दावा झूठा है।
त्राहि-त्राहि कर रहा नेपाल, लोन को अनुदान में बदलने की माँग
वैसे, पोखरा एयरपोर्ट को बनाकर नेपाल सरकार बुरी तरह से फँस चुकी है। उसे जिस कमाई की उम्मीद थी, वो तो छोड़िए, अपने परिचालन का खर्च भी इस एयरपोर्ट से नहीं निकल पा रहा है। पोखरा एयरपोर्ट का संचालन करने वाली कंपनी ने ब्याज की एक किश्त दी है, लेकिन मार्च 2024 में जाने वाली दूसरी किस्त वो चुका नहीं पाई है। इसके बाद नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प दहाल प्रचंड ने चीन की यात्रा की तो पोखरा एयरपोर्ट की असलियत सामने आई। दरअसल, पोखरा एयरपोर्ट पर कमाई न होने की वजह से नेपाल अभी इसका ब्याज भी नहीं भर पा रहा है, ऐसे में मूल धन कैसे लौटाएगा? इसलिए नेपाल सरकार चाहती है कि चीन इस कर्जे को ‘अनुदान’ मान ले और उससे पैसों की वसूली न करे। बाकी चीन पूरी दुनिया में ऐसे देशों के साथ क्या कर रहा है, वो किसी से छिपा नहीं है। पड़ोसी श्रीलंका का मामला ही देख लीजिए।
शुरुआत से ही विवादों में घिरा रहा एयरपोर्ट, जमकर हुआ भ्रष्टाचार
पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन तो गया है, लेकिन इसकी कोई जरूरत नहीं थी। मार्च 2024 में नेपाल के महालेखा परीक्षक ने राष्ट्र को सरकारी खर्चों की ऑडिट रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें वित्त मंत्री वर्षमान पुन की भूमिका की जाँच की माँग की गई है। महालेखा परीक्षक ने कहा कि पोखरा एयरपोर्ट बनाने का फैसला बिना किसी स्टडी के लिए ही ले लिया गया। इसमें कई खामियाँ भी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पोखरा में इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जरूरी नहीं होने पर भी इसे बनाने की मंजूरी देना अपने आप में भ्रष्टाचार है। उस समय के वित्तमंत्री वर्षमान पुन, जो अब भी प्रचंड सरकार के वित्तमंत्री हैं, उन्होंने चीनी ठेकेदारों को फायदा पहुँचा है। यही नहीं, चीनी कंपनी को 2 अरब रुपये से ज्यादा की टैक्स छूट दी गई, ये भी भ्रष्टाचार है।
पिछले साल चीनी कंपनी के कर्मचारियों पर पड़ा था छापा
पोखरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने वाली चीनी कंपनी पर भ्रष्टाचार में घिरे होने की वजह से पिछले साल 1 नवंबर 2023 को बड़ी छापेमारी हुई थी और कर्मचारियों के बैंक खातों को सील कर दिया गया था। नेपाल के भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी ‘अख्तियार दुरुपयोग अनुसंधान आयोग’ ने चीनी कंपनी सीएएमसी इंजीनियरिंग के दफ्तर पर छापेमारी की थी। एयरपोर्ट पर खराब गुणवत्ता का काम और कमीशनखोरी के आरोपों पर ये छापेमारी हुई थी। दरअसल, 1 जनवरी से 2023 से ही शुरु हो चुके इस एयरपोर्ट के रडार और वीएचएफ सिस्टम में कई बार खराबी आ चुकी है और जहाजों को आधे रास्ते से वापस भेजना पड़ रहा था। इसके बाद भ्रष्टाचार की शिकायत पर ये छापेमारी की गई थी।
कई महिलाओं के यौन शोषण और सेक्स टेप बनाने के आरोपित जेडीएस के निलंबित सांसद प्रज्वल रेवन्ना को बेंगलुरु कोर्ट ने 6 जून तक के लिए एसआईटी की हिरासत में भेज दिया है। प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े मामले की जाँच एसआईटी कर रही है। प्रज्वल रेवन्ना अपने खिलाफ केस दर्ज होने के बाद जर्मनी भाग गया था, जहाँ से लौटते ही बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा एयरपोर्ट पर उसे महिला पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रज्वल रेवन्ना को शुक्रवार (31 मई 2024) को कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु की अदालत में पेश किया गया था, जिसने रेवन्ना को उन्हें 6 जून तक के लिए एसआईटी की हिरासत में भेज दिया। उसे जर्मनी से बेंगलुरु पहुँचने के फौरन बाद एसआईटी ने शुक्रवार को तड़के ही गिरफ्तार कर लिया था और पूछताछ शुरू कर दी थी। उसे तीन महिला अधिकारियों ने बेंगलुरु हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया था।
#WATCH | Bengaluru | Obscene videos case: Suspended JD(S) leader Prajwal Revanna remanded to six day police custody pic.twitter.com/gHRtQRUiG4
प्रज्वल रेवन्ना को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस की टीम उसे एसआईटी दफ्तर ले गई, उसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसका मेडिकल चेकअप किया गया। अस्पताल में प्रज्वल की रक्तचाप, रक्त शर्करा स्तर और हृदय समेत अलग-अलग मेडिकल जाँच की गई। सूत्रों ने बताया कि एसआईटी प्रज्वल की ‘पोटेंसी’ (पुंसत्व) जाँच कराने पर भी विचार कर रही है। यह जाँच इस बात का पता लगाने के लिए की जाती है कि बलात्कार का आरोपी पीड़िताओं का यौन उत्पीड़न करने में सक्षम है या नहीं।
गिरफ्तारी से बचने की आखिरी कोशिश हुई फेल
म्यूनिख से बेंगलुरु पहुँचने से पहले हासन के सांसद ने गिरफ्तारी से बचने का अंतिम प्रयास करते हुए जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। प्रज्वल के खिलाफ यौन शोषण के तीन मामले दर्ज हैं, जबकि उनकी माँ ने कथित अपहरण के मामले में अग्रिम जमानत का अनुरोध किया है। हालाँकि भवानी इस मामले में आरोपित नहीं हैं लेकिन एसआईटी उनकी कथित भूमिका की जाँच करना चाहती है।
गौरतलब है कि जनता दल (सेक्युलर) के संरक्षक एच. डी. देवेगौड़ा के पोते और हासन लोकसभा क्षेत्र से जेडीएस के उम्मीदवार प्रज्वल रेवन्ना पर महिलाओं का यौन शोषण करने का आरोप है। उनके खिलाफ अभी तक यौन उत्पीड़न के तीन मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इसके बाद वो जर्मनी भाग गया था, लेकिन वहाँ से लौटते ही उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
पाकिस्तान की सरकार ने अदालत में ये मान लिया है कि उसके कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK पर उसका कोई कानूनी हक नहीं है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि जिस व्यक्ति की तलाश की जा रही है, वो अभी ‘आजाद कश्मीर’ में एक मामले में न्यायिक हिरासत में है। चूँकि ‘आजाद कश्मीर’ हमारा नहीं है, इसलिए उसे हम पेश नहीं कर सकते। वो ‘विदेशी जमीन’ पर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस्लामाबाद हाई कोर्ट में पाकिस्तान सरकार के वकील ने कहा कि ‘आजाद’ कश्मीर हमारी ज़मीन नहीं है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट में इस्लामाबाद से अगवा कवि अहमद फराद के मामले में सुनवाई चल रही थी। इस दौरान सरकार के वकील ने कहा कि कवि अहमद फराद इस वक्त ‘आजाद’ कश्मीर में 2 जून तक की रिमांड पर हैं। सरकारी वकील के इस दावे पर हाई कोर्ट ने भी हैरान जताई है और पूछा कि अगर आजाद कश्मीर एक विदेशी क्षेत्र है, तो फिर पाकिस्तानी रेंजर्स वहाँ कैसे पहुँच गए। कोर्ट में इस मामले में अभी सुनवाई जारी रहेगी।
बता दें कि पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर को दुनिया को दिखाने के लिए 2 टुकड़ों में बाँटा है। एक को वो आजाद कश्मीर कहता है, जिसके राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री भी होते हैं। इसकी राजधानी मुजफ्फराबाद है। तो दूसरे पर वो गिलगित-बाल्टिस्तान एजेंसी के नाम से राज करता है। कुछ समय पहले पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान के क्षेत्र को लेकर कुछ कानूनी बदलाव भी किए थे।
दरअसल, पाकिस्तान की कोशिश रहती है कि वो कश्मीर को अलग देश के तौर पर दिखाए, लेकिन उसका दोगलापन उसे हर बार एक्सपोज कर देता है। एक तरफ वो भारत के कश्मीर में आजादी के नारे लगवाता है, तो दूसरी तरफ अपने कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके को दो हिस्सों में बाँटकर राज करता है। हालाँकि भारत सरकार ने हमेशा कहा है कि पूरा कश्मीर भारत का है और भारत उसे लेकर रहेगा। ऐसे में इस्लामाबाद हाई कोर्ट में पाकिस्तान के सरकारी वकील के कबूलनामे ने पाक अधिकृत कश्मीर पर भारत के कानूनी और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य दावे को भी मजबूत कर दिया है।
लोकसभा चुनाव 2024 का सिर्फ अंतिम चरण ही बचा हुआ है और 4 जून को इसकी पूरी संभावना है कि भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से पहले ही GDP (सकल घरेलू उत्पाद) विकास दर ने भारत को खुशखबरी दी है। विश्लेषकों की उम्मीदों को पार करते हुए भारत की GDP ने वित्तीय वर्ष 2023-24 की अंतिम तिमाही में 7.8% की रफ़्तार से भाग कर सबको चौंका दिया है।
केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने बताया है कि वित्तीय वर्ष 2024 में भारत की अर्थव्यवस्था ने 8.2% की रफ़्तार से छलांग भरी, इसके बने रहने पूरी संभावना है। वहीं इससे पिछली तिमाही में भी विश्लेषकों ने भारत की GDP के विकास दर को 8.4% आँका था, लेकिन जब आँकड़े सामने आए तो ये 8.6% था। वहीं अगर इससे पहले की बात करें तो Q1 में देश की जीडीपी की रफ़्तार 8.2% और Q2 में ये आँकड़ा 8.1% था। साफ़ है, वैश्विक कोरोना महामारी के बाद भारत की अर्थव्यवस्था ने रफ़्तार पकड़ ली है।
फरवरी 2024 में जो आँकड़े जारी किए गए थे, उसमें वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत की अर्थव्यवस्था के 7.8% के विकास दर से बढ़ने की संभावना जताई गई थी, लेकिन अब इसकी समीक्षा कर के इसे 8.2% कर दिया गया है, जो दिखाता है कि देश सही रास्ते पर है और सरकारी की नीतियाँ उम्मीदों पर न सिर्फ खरी उतर रही हैं बल्कि उनका क्रियान्वयन भी सही तरीके से हो रहा है। भारत की ‘ग्रॉस डोमेस्टिक वैल्यू (GDV)’ भी 7.2% की गति से बढ़ी है। पिछले साल ये आँकड़ा 6.7% था।
The Q4 GDP growth data for 2023-24 shows robust momentum in our economy which is poised to further accelerate. Thanks to the hardworking people of our country, 8.2% growth for the year 2023-24 exemplifies that India continues to be the fastest growing major economy globally. As…
GVA के विकास में सबसे अधिक योगदान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का है, जो 9.9% की रफ़्तार से बढ़ी है। बताया जा रहा है कि निवेश बढ़ने और सर्विस सेक्टर के तेज़ गति से बढ़ने के कारण ये संभव हो पाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन आँकड़ों के जारी होने के बाद बधाई देते हुए कहा है कि देश के मेहनती लोगों के कारण ये संभव हुआ है, भारत विश्व का सबसे तेज़ी से विकास करता देश बना हुआ है। उन्होंने दोहराया कि ये तो सिर्फ ट्रेलर है।
लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने बड़ा फैसला लिया है। सातवें चरण में मतदान समाप्त होने के बाद अलग-अलग टीवी चैनलों, सोशल और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर होने वाले एग्जिट पोल डिबेट में कॉन्ग्रेस पार्टी अपने प्रवक्ताओं को नहीं भेजेगी। कॉन्ग्रेस पार्टी के इस फैसले से आम जनता के बीच क्या संदेश जाएगा, शायद इस फैसले से पहले पार्टी ने इस पर विचार नहीं किया।
कॉन्ग्रेस के मीडिया और पब्लिसिटी डिपार्टमेंट के चेयरमैन पवन खेड़ा ने एक्स पर इस बात को रखा। उन्होंने एक्स पर लिखा, “आगामी एग्जिट पोल डिबेट्स में पार्टी द्वारा भाग ना लिये जाने के निर्णय पर हमारा वक्तव्य : मतदाताओं ने अपने मत दे दिया है एवं मतदान के परिणाम मशीनों में बंद हो चुके हैं। 4 जून को परिणाम सबके सामने होंगे। भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस की नज़रों में परिणाम घोषित होने से पहले किसी भी तरह के सार्वजनिक अनुमान लगा कर घमासान में भाग ले कर टीआरपी के खेल का कोई औचित्य नहीं है। किसी भी बहस का मक़सद दर्शकों का ज्ञानवर्धन करना होता है। कॉन्ग्रेस पार्टी 4 जून से डिबेट्स में फिर से सहर्ष भाग लेगी।”
Our statement on the reason for not participating in #ExitPolls
Voters have cast their votes and their verdict has been secured.
The results will be out on 4th June. Prior to that, we do not see any reason to indulge in speculation and slugfest for TRP.
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सात चरणों में मतदान हुआ है। आखिरी चरण का मतदान 1 जून को है। इसके बाद तमाम न्यूज चैनल अनुमानों और गणनाओं पर आधारित एग्जिट पोल्स जारी करते हैं। इन चैनलों पर पिछले कई सालों से कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रवक्ताओं को निराशा ही हाथ लगती है। ऐसे में इस बार कॉन्ग्रेस पार्टी ने तय किया है कि वो लोकसभा चुनाव के नतीजे 4 जून को आने के बाद ही अपने प्रवक्ताओं को चैनलों पर डिबेट के लिए भेजेगी।
चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई ने दावा किया है कि भारत के लोकसभा चुनाव को प्रभावित करने के लिए उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। हालाँकि कंपनी ने कहा कि उसने उन कोशिशों को नाकाम कर दिया है। रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि कंपनी ने रूस, चीन, इजराइल और ईरान से शुरू होने वाले दुष्प्रचार फैलाने वाले अभियानों को बाधित किया है। भारत की मौजूदा सरकार, बीजेपी के खिलाफ माहौल तैयार करने और कॉन्ग्रेस के पक्ष में लोगों का मन बदलने की कोशिश करने में एक इजरायली कंपनी का हाथ पाया गया, लेकिन उसकी कोशिशों को नाकाम कर दिया गया।
अमेरिकी कंपनी ओपनएआई का दावा है कि उसने ऐसे गुप्त अभियानों को रोका है, जो भारत में चुनावों पर असर डालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल का उपयोग करने की कोशिश कर रहे थे। ओपनएआई की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल स्थित एक नेटवर्क ने ‘भारत पर केंद्रित टिप्पणियाँ बनाना शुरू कर दिया, जिसमें सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी की आलोचना की गई और विपक्षी कॉन्ग्रेस पार्टी की प्रशंसा की गई।’ भारतीय चुनावों पर केंद्रित इस गतिविधि को मई में देखा गया था।
#BREAKING BIG EXPOSE by Open AI on Foreign interference in Indian elections
"There are three clear pieces of evidence – Firstly, Deepfake videos created within the country and propagated by Congress handles. Facebook revealed there are overseas accounts running campaigns against… pic.twitter.com/w9twGWwukx
ओपनएआई की रिपोर्ट में उन अभियानों का हवाला दिया गया है, जिनमें एआई का उपयोग गुप्त अभियानों के लिए किया गया था। उन अभियानों का उपयोग जनता की राय में हेरफेर करने या राजनीतिक नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया गया था। ओपनएआई की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि हमने इन खतरनाक फर्मों को कई तरह से हमारे मॉडल का उपयोग करते हुए देखा।
रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि इजरायल से संचालित अकाउंट्स के एक समूह का उपयोग गुप्त अभियानों के लिए कंटेंट बनाने और एडिटिंग करने के लिए किया गया था। यह कंटेंट एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम, वेबसाइट और यूट्यूब पर शेयर किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘मई की शुरुआत में इस नेटवर्क ने अंग्रेजी भाषा के कंटेंट के साथ भारत में दर्शकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।’
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि ‘यह बिल्कुल साफ है कि भाजपा कुछ भारतीय राजनीतिक दलों द्वारा और/या उनकी ओर से फैलाई जा रही गलत सूचना और विदेशी हस्तक्षेप का निशाना थी और है।’ उन्होंने इसे देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक खतरा बताया।
It is absolutely clear and obvious that @BJP4India was and is the target of influence operations, misinformation and foreign interference, being done by and/or on behalf of some Indian political parties.
— Rajeev Chandrasekhar ??(Modiyude Kutumbam) (@Rajeev_GoI) May 31, 2024
ओपनएआई के टूल का उपयोग अलग-अलग भाषाओं में लेख लिखने, सोशल मीडिया अकाउंट के लिए मनगढ़ंत नाम और कुछ छोटे आर्टिकल्स लिखने के लिए किया गया। आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस टूल का दुरुपयोग करके अलग-अलग देशों के समूहों ने जनता की राय में हेरफेर करने और राजनीतिक परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की है। इस अभियान में रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा में संघर्ष, भारत में चुनाव और अमेरिका में राजनीतिक गतिशीलता जैसी भू-राजनीतिक मुद्दों को लक्षित किया जाना था।
ओपनएआई ने कहा है कि वह समय-समय पर ऐसे रिपोर्ट जारी करती रहेगी की कैसे और कहाँ उसके एआई टूल का उपयोग दुष्प्रचार फैलाने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने यह भी कहा है कि जो यूजर्स एआई टूल्स का दुरुपयोग करेंगे और कंपनी के नियमों का उल्लंघन करेंगे उनके अकाउंट्स पर बैन लगा दिया जाएगा। रूसी और इजरायली समूह द्वारा AI टूल के दुरुपयोग से किसी भी प्रकार का नुकसान अब तक नहीं देखा गया है।