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पुलिस को जल्लाद बता विनोद दुआ ने कहा- लॉकडाउन काफी नहीं, लोग फूटकर सड़कों पर आ जाएँ

खुद को देश के नागरिकों का हितैषी स्थापित करते हुए दुआ ने देश की जनका को वीडियोज में न केवल जमकर भड़काया है। बल्कि अपने कुतर्कों से उन्हें गुमराह करने की कोशिश की है। वीडियोज की शुरुआत से लेकर अंत तक में विनोद दुआ एक भी बार देश के नागरिकों को कोरोना से बचे रहने की बात कहते नजर नहीं आते। बल्कि सरकार के ख़िलाफ़ बोलते, उनके फैसलों की निंदा करते और लोगों को उकसाते नजर आते हैं।

जिंदगी की जद्दोजहद में जोखिम को न्योता: बिहार-UP के बेबस प्रवासियों की कहानी

पलायन अवसर भी है और अभिशाप भी। लेकिन देश की हिंदी पट्टी के लिए यह मजबूरी ही दिखती है। आर्थिक सुरक्षा के लिए ही महानगरों में पहुॅंचने वाले लोगों को जब यह सुरक्षा खतरे में दिखी तो उन्होंने घर लौटने में भलाई समझी। लॉकडाउन बढ़ने और घर तक जाने के लिए बस की व्यवस्था की अफवाहों ने उन्हें सड़क पर उतार दिया।

नशे को हाथ न लगाने वाला मकरज से लौटा जमाती कोरोना पॉजिटिव: लोगों के साथ गुड़गुड़ाया हुक्का, पी चाय-पानी, कई गाँवों में मिलने गया

उसने गाँव वालों से मरकज के मजहबी सभा में शामिल होने वाली बात को सबसे छुपाया। जब ग्रामीणों ने उससे इस संबंध में पूछा तो भी उसने झूठी और मनगढ़ंत कहानी सुनाकर उनको बरगलाया। लोगों ने भी आसानी से उसकी बातों को मान लिया और उसके साथ हिलने-मिलने लगे।

मधुबनी: दलित महिला के हत्यारों को बचाने के लिए सरपंच फकरे आलम ने की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बदलवाने की कोशिश

“गाँव में लोगों ने अफवाह उड़ा दी है कि हमने दूसरे मजहब के परिवार से 2 लाख रुपए लेकर मामले को रफा-दफा कर दिया है। ये बिल्कुल गलत बात है। हमने ऐसा कुछ भी नहीं किया है और न ही करेंगे। हम तो कहते हैं कि 1 लाख रुपया मेरे से और ले लो और दोषियों को सजा दो। हमें पैसे नहीं, इंसाफ चाहिए। हमारी माँ चली गई, उनकी मौत नहीं हुई, उनकी हत्या की गई। हमारा एक जान चला गया। हम पैसा लेकर क्या करेंगे? हमें तो बस इंसाफ चाहिए।”

I-CAN से अंत्योदय के नाम एक अलख: 2000 से ज्यादा वॉरियर्स, 25000+ जरूरतमंद लोगों की मदद

पहले स्तर के प्रयास में 1700-2000 गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को प्रतिदिन मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा है। दूसरे स्तर का प्रयास इससे वृहत है। इसे "सीकर्स एंड गिवर्स" प्लेटफॉर्म के नाम से समझा जा सकता है। यहाँ एक वो हैं, जो सहायता पाना चाहते हैं और दूसरे वो जो सहायता करना चाहते हैं। दोनों को आपस में कनेक्ट कर...

सुबराती Vs जमाती: विघटनकारी दीन की PhD वालों से बेहतर है गाँव का वो अनपढ़-बेरोजगार

एक ओर विधिपूर्वक किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान यानी मजहबी इमाल और दूसरी तरफ रोग पीड़ित प्राणियों के प्राणों की रक्षा का कार्य, ये दोनों कर्म समान रूप से पुण्य देने वाले हैं। यानी इस समय डॉक्टर, सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी जो कार्य कर रहे हैं वो किसी धार्मिक अनुष्ठान से कम नहीं है। इसलिए धर्म के नाम पर धर्म के कार्य में बाधा डालने का अधार्मिक काम करना बंद करें।

213 देश, 15 करोड़ सदस्य: अल्लाह का संदेश पहुँचाने के नाम पर तबलीगी जमात का आतंकी कनेक्शन

6 प्रमुख उद्देश्यों के साथ तबलीगी जमात की एक सबसे बड़ी शर्त और विशेषता इसकी गोपनीयता है। इसी गोपनीयता ने इसकी हरकतों पर हमेशा आवरण का काम किया है। तबलीगी समय के साथ कट्टर जिहादी समूहों में बढ़ते गए और यह विश्वास करने लगे कि 'अच्छे मुस्लिमों' को इसी जीवन में यातनाएँ भोगनी चाहिए।

भास्कर ने जमातियों की सच्चाई दिखाई, ‘वायर’ और ‘न्यूजलॉन्ड्री’ छाती कूट कर रोने लगे कि चीटिंग है!

हास्यास्पद यह है कि दैनिक भास्कर ने जिन स्थानों को पाठकों के लिए रिक्त छोड़ा था उसमें 'द वायर' और 'न्यूज़लॉन्ड्री' ने अपनी समझ के अनुसार 'तबलीगी जमात' भर दिया। इसके बाद दैनिक भास्कर पर सांप्रदायिकता फैलाने का आरोप भी जड़ दिया।

झारखंड के जो आदिवासी कभी दिल्ली नहीं गए उनके नाम पर जमातियों ने ले लिए सिम

विशेष शाखा की रिपोर्ट में तीन ऐसे मोबाइल नंबर दर्ज हैं जो लोहरदग्गा के आदिवासियों के नाम हैं। जॉंच से पता चला है कि ये लोग कभी दिल्ली गए ही नहीं। इनमें से दो मोबाइल नंबर पर कॉल रिसीव नहीं हो रहा है। एक नंबर पर दिल्ली में कॉल रिसीव हो रहा है।

नर्सों के फोटो लेना, वीडियो बना वायरल करने की धमकी देना: जमातियों ने सहरसा में पार कर दी सारी हदें

नर्सों की शिकायत पर एक्शन लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने इस वाकये की जानकारी जिला प्रशासन व पुलिस को दी। जिस पर तुरंत कार्यवाही करते हुए जिला एसपी ने एसडीओ के साथ एक पुलिस टीम आइसोलेशन केंद्र भेजी, जहाँ पुलिस को देखते ही जमातियों ने नमाज पढ़ने का नाटक शुरू कर दिया।

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