FREE KASHMIR बैनर को लेकर उठे बवाल पर मुख्यमंत्री भले अब तक शांत हैं लेकिन उनके 'संजय' ने मुँह खोल दिया है। संजय राउत की सफाई यह है - "जिन्होंने यह बैनर थामा था, उनका मकसद कश्मीर में फ्री इंटरनेट, फ्री मोबाइल सर्विसेज और अन्य प्रतिबंधों से है।"
न्यूजलॉन्ड्री के एक पूर्व कर्मचारी ने CEO अभिनंदन सेखरी के बारे में कहा कि हिन्दुओं पर हुए अपराधों को दबाना, मुसलमानों पर हुए अपराधों में 'हिन्दू कनेक्शन' निकालना, सहकर्मियों को गाली देना, चिल्लाना और आम आदमी पार्टी के लिए अजेंडा चलाना, सेखरी का SoP है।
अकादमी क्रियाकलाप में हज़ारों छात्रों ने भाग लिया, इससे वामपंथी बौखला गए। सीएए पर BJP 3 करोड़ घरों में पहुँच रही है, इससे उन्हें तगड़ा झटका लगा। जेएनयू में हुई हिंसा के पीछे जितने भी फैक्टर्स हैं, उन सबके बारे में समझिए। देखिए लेफ्ट इकोसिस्टम ने कैसे अफवाहें फैलाई।
NDTV अब भले ही वामपंथियों को ख़ुश करने के लिए भाजपा व एबीवीपी को इस हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए 1000 लेख लिखे, डैमेज हो चुका है। वो कहते हैं न, सच छिपाए नहीं छिपता। शायद एनडीटीवी पर यही कहावत फिट बैठती है। वामपंथी 'अपने' ही चैनल से निराश हैं।
यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा मुखिया अखिलेश यादव ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए प्रदर्शनों में मारे गए लोगों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की है। अखिलेश मारे गए मो. वकील अहमद के परिजनों से मिलने पहुँचे और संवेदना व्यक्त की।
मुंबई का गेटवे ऑफ इंडिया। रात के 2:15 बजे। विरोध-प्रदर्शन करती भीड़। और 18 सेकंड का विडियो। इसमें 'हिंदुओं से आजादी' का नारा लगा या नहीं - इस पर बवाल। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा। पुलिस अब जाँच करेगी। लेकिन आप खुद भी सुन कर फैसला कर सकते हैं कि...
"इन हमलों की वजह से देश की छवि पूरी दुनिया में खराब हो रही है। इन गुंडों को आंतकवादी कहना चाहिए, क्योंकि वे भी मुँह छिपाकर ही आते हैं। इस पर तय समय के अंदर कार्रवाई होनी चाहिए, वरना विदेश के छात्र यहाँ पढ़ने नहीं आएँगे।"
रात में जितना भी बवाल होता है, जितनों को चोट लगती है - सबका आरोप ABVP के ऊपर मढ़ दिया जाता है। और खुद JNUSU प्रेसिडेंट की सर फटी तस्वीर से नैरेटिव फिट भी बैठ रहा था वामपंथियों का... लेकिन ट्विस्ट आता है 2 वीडियो के जरिए। एक में भीड़ द्वारा छात्र-छात्राओं को पीटा जाना, दूसरे में मास्क पहने या मुँह ढँकी भीड़ के साथ खुद JNUSU प्रेसिडेंट का होना।
जब जामिया में पुलिस घुसी थी, तो इन्होने ही पुलिस की निंदा की थी। आज ये पूछ रहे हैं कि जेएनयू में पुलिस क्यों नहीं घुसी? कल जब वामपंथी दंगाइयों को गिरफ़्तार किया जाएगा, मीडिया उनके परिवार का इंटरव्यू लेगा और उन्हें निर्दोष बताएगा। दिल्ली पुलिस ही बलि का बकरा क्यों बने?
इंटरनेशनल नंबरों से व्हाट्सप्प ग्रुप में घुस कर ABVP के नाम पर बातचीत की गई। छात्र-छात्राओं को कॉल कर के धमकियाँ और गालियाँ दी जा रही हैं। वेलेंटिना ने बताया कि शॉल के अंदर पत्थर छिपा कर आए उपद्रवियों ने डंडों से भी हमला किया। रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए ऐसा किया गया।