राहुल गाँधी ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट 'द वायर' की एक वीडियो शेयर की। वीडियो में यह दिखाया गया है कि कुम्भ मेले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन स्वच्छता कार्यकर्ताओं के पैर धोए थे, वो मोदी से असंतुष्ट हैं। उन्हीं लोगों के एक्सक्लुसिव वीडियो सामने आने पर अब हो रही है इनकी 'सोशल धुनाई'!
भारत के गौरवशाली इतिहास का एक हिस्सा कई सालों से वर्तनी की त्रुटि के कारण दबा हुआ है। जिन पांडवों ने भारतवर्ष को इंद्रप्रस्थ दिया, उसी इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) में उनका नाम कहीं भी नहीं है। और यह हुआ अंग्रेजी के v और r लेटर्स के कारण।
"वीडियो में ये साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि कैसे प्रद्योत किशोर ने अपने राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने की कोशिश की है। अगर ये इंसान पुलिस स्टेशन के अंदर किसी शख्स के ऊपर हाथ उठा सकता है, तो फिर तो ये कहीं भी किसी की भी हत्या कर सकता है।"
आज पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी प्रोपगैंडा चलाता है। भगवान राम ने इस युद्धनीति का उपयोग रावण के आतंक को समाप्त करने के लिए किया था लेकिन आज पाकिस्तान उसी तकनीक का प्रयोग भारत के विरुद्ध जिहादी छद्म युद्ध में करता है।
भाजपा कार्यालय से लेकर पेड़ तक पर भाजपा कार्यकर्ताओं की लाशें लटकी होने की ख़बर इतनी आम हो गई हैं कि सुन कर पहले ही सोच लेता हूँ कि बंगाल की ही ख़बर होगी।
आखिर आतंकियों के सम्मान का कोई सोच भी कैसे सकता है? फिर याद आता है कि ये तो नेत्री भी हैं, इनको तो वोट भी वही लोग देते हैं जो आतंकियों के जनाज़े में टोपियाँ पहन कर पाकिस्तान परस्ती और भारत को बाँटने की ख्वाहिश का नारा लगाते शामिल होते हैं।
आज भले ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के ऊपर से मामला पूरी तरह खतम न हुआ हो लेकिन यह भी सच है कि कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में ऐसा कोई भी व्यक्ति दंडित नहीं किया जा सका जिसे हिन्दू आतंकी कहा गया।
उत्तराखंड के घने जंगल में एक गाय भटक गई थी और पानी न मिलने के कारण चलने में असमर्थ हो चुकी थी। गाय को जंगल में ऐसे हालात में देखकर उत्तराखंड के इस नौजवान ने उसको अपने कंधे पर उठाया और काफी दूर पैदल चल कर इसे पानी के स्रोत तक पहुँचा कर गाय की जान बचाई।
यहाँ तुफैल अहमद ने दो बड़ी गलतियाँ की। पहली ग़लती, हिन्दू देवी-देवताओं द्वारा धारण किए गए अस्त्र-शस्त्रों को हिंसा से जोड़कर देखा। दूसरी ग़लती, माँ सरस्वती के बारे में बिना तथ्य जाने झूठ बोला। दोनों ही गलतियों को तथ्यों व सबूतों के साथ काटा गया है। 'शांतिप्रिय' तुफैल शायद...
भारतीय जनता पार्टी ने इन विज्ञापनों के प्रसारण को रोकने की अपील की थी। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी वीएल कांताराव की अध्यक्षता वाली कमिटी ने इन विज्ञापनों के प्रसारण की अनुमति को निरस्त करने का फैसला लिया है।