नूपुर ने सोशल मीडिया में एक कमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि दुआ करनी चाहिए कि मोदी जिस नाव पर बैठें, वो नाव ही डूब जाए। इसके बाद उन्होंने दुआ करते हुए लिखा कि काश नदी में सुनामी आ जाए और मोदी की नाव डूब जाए।
जातिगत भेदभाव के आरोपों में घिरे प्रोफेसर दिलीप मंडल और मुकेश कुमार जॉंच पूरी होने तक माखनलाल यूनिवर्सिटी के कैंपस में प्रवेश नहीं कर पाएँगे। लेकिन, उससे पहले छात्रों के साथ जो कुछ हुआ वह हतप्रभ करने वाला था। पीड़ित छात्रों की जुबानी सुनिए उस रात की प्रताड़ना।
प्रदर्शन के दौरान जहाँ हिंसक घटना हुई, वहाँ AAP विधायक अमानतुल्लाह ख़ान भी मौजूद थे। एक तरफ केजरीवाल ऐसी घटना को अस्वीकार्य बता रहे हैं, दूसरी तरफ उनके MLA पर हिंसक भीड़ की अगुवाई करने के आरोप लग रहे हैं।
ऐसा लगता है कि ममता ने विधानसभा चुनाव से पहले अपना वोट बैंक दॉंव पर लगा दिया है। मुस्लिम साथ बने ही रहेंगे, इसकी गारंटी नहीं है। ओवैसी सेंधमारी को तैयार हैं। इधर, मुस्लिम दंगाइयों के कारण हिन्दुओं में से अधिकतर भाजपा की तरफ रुख करते दिख रहे हैं।
उनकी नज़र में हनुमान चालीसा का पाठ कर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने वाले छात्र 'धब्बा' हैं। लेकिन, स्टेशन पर लोगों को बंधक बना कर ट्रेन परिचालन ठप्प करने वालों से शांति की अपील करना भी उन्हें गॅंवारा नहीं। शायद इसलिए क्योंकि दंगाई अपने ही कौम के हैं।
कथित कॉमेडिन कुणाल कमरा के फैन का जब बंगाल में असली दंगाइयों से पाला पड़ा तो क्या हुआ, पढ़िए एक वकील की आपबीती। दंगाइयों के बीच फॅंसने से कुछ वक्त पहले ही वकील साहब ने पीएम मोदी का मजाक उड़ाते हुए कमरा का एक जोक शेयर किया था।
एक 9 साल की बच्ची से बलात्कार का दोषी। दूसरे ने महिला का सिर धड़ से अलग किया। तीसरा अपने ही 6 सप्ताह के बेटे की हत्या का गुनहगार। सबको मिल गई माफी। जानें कैसे हुआ...
"शिवसेना अपने एजेंडे पर कायम है। उसने CAB पर केंद्र का साथ दिया और अब सावरकर पर भी उसे कॉन्ग्रेस का रवैया बर्दाश्त नहीं है। फिर भी कांग्रेस महाराष्ट्र सरकार में बनी हुई है। यह नाटकबाजी है।"
हिंसक प्रदर्शन को लेकर जामिया प्रशासन ने कहा है कि इसमें शामिल ज्यादातर लोग बाहरी थे। उल्लेखनीय है कि यूनिवर्सिटी के आसपास के इलाकों में समुदाय विशेष के लोगों की घनी आबादी है। तो क्या इस प्रदर्शन के पीछे कोई साजिश रची गई थी?
"यदि राहुल गॉंधी का नाम राहुल सावरकर होता तो हम सबको अपना मुॅंह छिपाना पड़ता। अब हम उम्मीद करते हैं कि उद्धव ठाकरे अपना वादा निभाएँगे। वे कई बार कह चुके हैं कि यदि किसी ने सावरकर का अपमान किया तो वे उसे सार्वजनिक रूप से पीटेंगे। मैं उम्मीद करता हूॅं कि शिवसेना ने सावरकर पर अपना स्टैंड नहीं बदला होगा।"