मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।
लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और पाकिस्तान की पूर्व मंत्री सानिया निश्तर एक वक्त पर गावी से जुड़े हुए थे। इतना ही नहीं गावी को सोरोस की कंपनी से भी रिश्ते थे। उस खास वक्त पर केजरीवाल के संपर्क में थे रांका।