जज संदीप जैन ने बताया कि वे अपने कार्यालय में बैठ कर कुछ जरूरी आदेश आशुलिपिक से लिखवा रहे थे। तभी 40- 50 वकील कार्यालय में घुस आए और अभद्रता करते हुए मारपीट पर उतारू हो गए।
असंतुष्ट पक्ष के पास दूसरा विकल्प क्यूरेटिव याचिका दाखिल करने का होगा। इसे उपचार याचिका भी कहा जाता है। पुनर्विचार याचिका ख़ारिज होने के 30 दिनों के भीतर क्यूरेटिव याचिका दायर की जा सकती है।
अलीगढ़ डीएम ने जिले में शुक्रवार रात 12 बजे से इंटरनेट सेवाएँ बंद करने का निर्देश दिया है। अयोध्या की ओर जाने वाली बसों व अन्य बड़े वाहनों को भी रोक दिया गया है। ऐहतियात के तौर पर शनिवार को जिले के सभी स्कूल, कॉलेज, इंस्टीट्यूट और कोचिंग सेंटर बंद कर दिए गए हैं।
राणा अयूब अक्सर अपने भारत-विरोधी रुख का प्रदर्शन करते रहती हैं। हाल ही में उन्होंने दावा किया था कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में सैकड़ों बच्चों को गिरफ़्तार कर रखा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया था कि सुरक्षा बलों ने एक 92 वर्षीय वृद्ध महिला पर हमला किया।
राम मंदिर के हक में फैसला आया तो यह पहला मौका नहीं होगा, जब हिंदुओं के दावे पर मुहर लगेगी। हाई कोर्ट ने भी विवादित स्थल को रामजन्भूमि माना था। अंग्रेजों के जमाने में भी अदालत ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाने की बात मानी थी।
उन्हें हिंदुत्व का विद्वान माना जाता है। धार्मिक पुस्तकों का उन्हें इतना ज्ञान है कि वह अदालत में बहस के दौरान भी उनका जिक्र करते रहते हैं। तभी तो मद्रास HC के पूर्व मुख्य न्यायाधीश उन्हें 'भारतीय वकालत के पितामह' कहते हैं।
सागरिका घोष की ख़ुशी ट्विटर पर बल्लियों उछल कर बाहर आ रही थी। वे शायद वह समय भूल गईं जब उनके लिबरल गैंग ने इन्हीं उद्धव ठाकरे के पिता को हत्यारा, फासिस्ट और न जाने क्या-क्या कहा था। अभिसार शर्मा की तो ख़ुशी इतनी ज़्यादा थी शायद कि विह्वल होकर उनके मुखण्डल से शब्द ही नहीं फूटे। सो......
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि के विवादित 2.77 एकड़ जमीन के स्वामित्व के लिए हिंदू और मुस्लिम पक्षकारों द्वारा दायर की गई अपील पर 40 दिन सुनवाई चली। CJI रंजन गोगोई की अध्यक्षता में 5 जजों वाली पीठ ने इस मामले पर 16 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
पत्थरों को तराशने का काम तब भी नहीं रूका था, जब 1992 में बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने के बाद विहिप और आरएसएस को 6 महीने के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया था। यह तब भी अनवरत रूप से चल रहा था।
त्रिपुरा के अंतिम राजा महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य ने 28 अप्रैल, 1947 को एक शाही फ़रमान जारी करके त्रिपुरा की तत्कालीन रियासत को भारतीय संघ में विलय करने का फ़ैसला किया था। उन्हीं की याद में भाजपा की सरकार ने...