"जो घबरा रहा है, जो समझौता करना चाहता है, जिसका दिल इस संघर्ष में नहीं है, उसके लिए रायबरेली कॉन्ग्रेस और यूपी की कॉन्ग्रेस में कोई जगह नहीं है। कॉन्ग्रेस में काम करना है, तो दिल से करना है और इसके लिए संघर्ष करना पड़ेगा।"
कोडिरुन्निल द्वारा लोकसभा में हिंदी में शपथ लेने से यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी खासा नाराज हो गईं। सोनिया ने इसके लिए सांसद को डांट भी लगाई कि उन्होंने मलयालम की जगह हिंदी में शपथ क्यों ली। इसके बाद सोनिया ने केरल के अन्य सांसदों को मलयालम में शपथ लेने के लिए कहा।
विनय 16 जून को भारत-पाक मैच में हुई भारत की जीत पर खुशी मना रहा था, तभी 'समुदाय विशेष' के कुछ लोगों के साथ उसकी झड़प हुई थी। देर रात हुई इस झड़प के बाद विनय अपनी झोपड़ी में सोने चला गया। सोमवार की सुबह गाँव वालों ने देखा कि विनय की झोपड़ी से धुआँ उठ रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष के लिए नाम पर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। कोटा से बीजेपी सांसद ओम बिड़ला लोकसभा के नए स्पीकर होंगे। ओम बिड़ला अमित शाह के काफी करीबी माने जाते हैं। राजस्थान में विधानसभा चुनावों के दौरान उन्हें संगठन की जिम्मेदारी भी दी गई थी।
आतंकी गुट भारतीय एजेंसियों द्वारा लगातार नजर रखे जाने के कारण नेपाल जाकर ISI के एजेंटों से मुलाकात कर रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट के अनुसार बिहार-यूपी से सटे तराई के कई इलाकों में कई आतंकी संगठन लोगों को भर्ती करने की साज़िश में लगा हुआ है।
कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष के इस्तीफे के बाद सदन में नेता चुनने को लेकर भी अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में, शायद पार्टी को अब फिर से सोनिया पर ही भरोसा है और इसीलिए कार्यकर्ता उनमें जबरदस्ती 'झाँसी की रानी' को देखने की कोशिश कर रहे हैं।
पहले दिन सांसदों ने जम कर 'भारत माता की जय' के नारे लगाए और जब आसनसोल से चुने गए बाबुल सुप्रियों ने शपथ लिया, तब सदन में 'जय श्री राम' के नारे गूँजे। अभी तक विपक्षी पार्टी कॉन्ग्रेस ने सदन में अपने नेता के नाम की घोषणा नहीं की है।
अल्लाह मेहर ने अपने ससुर हनीफ को धमकी दी कि अगर वो फिर कभी अपनी छोटी बेटी को देखने आया तो उसके पूरे परिवार को मार डाला जाएगा। हनीफ ने अपने दामाद पर आरोप लगाया कि वह 10 दिनों से नाबालिग को बंधक बनाए हुए है।
हॉस्पिटल का नाम, बीमारी का नाम, जगह का नाम, किसकी गलती है आदि बेकार की बातें हैं, क्योंकि सौ से ज़्यादा बच्चे मर चुके हैं। इतने बच्चे मर कैसे जाते हैं? क्योंकि भारत में जान की क़ीमत नहीं है। हमने कभी किसी सरकारी कर्मचारी या नेता को इन कारणों से हत्या का मुकदमा झेलते नहीं देखा।
जिन्हें अपने देश भारत के कानून इतने दमनकारी लगते हैं कि लैला जैसी डिस्टोपिया बनाकर वह मुस्लिमों की प्रताड़ना दिखाना चाहते हैं, उन्हें केवल एक हफ़्ते पाकिस्तान में बिता कर आना चाहिए। आपके हिन्दूफ़ोबिक यूटोपिया जितना तो अच्छा नहीं है, लेकिन वैसे हिंदुस्तान का लोकतंत्र काफी अच्छा है...