मंच पर केजरीवाल, भगवंत मान, हरमोहन और शत्रुघ्न सिन्हा की मौजूदगी के बावजूद लोगों का रैली में न आना चर्चा का विषय है। खाली कुर्सियाँ देख बौखलाए केजरीवाल ने 7-8 मिनटों में ही अपना भाषण समाप्त कर दिया।
इतने लोग सुबह-सुबह किसी खेत में जाते होंगे, और वहाँ खाद बनाते होंगे, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।किसानों की बात करने वाले मोदी जी का यही है असली चेहरा। खेतों से लोगों को वापस लौटा कर नीम कोटेड यूरिया बेच रहे हैं, जबकि पूरी दुनिया को पता है कि पेशाब में यूरिया होता है।
वाड्रा ख़ुद ऐसा काम कर रहे हैं जिससे वो एक दयावान के रूप में ख़ुद को सामने रख सकें और इसके लिए वो नेत्रहीन और ग़रीब लोगों की तस्वीरों का इस्तेमाल करके जनता का ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं।
सतना में 2 मासूमों की अपहरण के बाद हत्या की घटना ठीक ऐसे समय पर घटी है, जब मध्य प्रदेश सरकार अधिकारियों के तबादलों में व्यस्त थी। 12 फरवरी को चलती स्कूल बस से अगवा किए गए जुड़वाँ भाई श्रेयांश और प्रियांश रावत के शव 13 दिन बाद बरामद हुए हैं।
देश भर के चुनावों के लिए हमारे पास नरेंद्र मोदी जी का नाम और काम है तो बिहार में नीतीश कुमार जी का विकास और भ्रष्टाचार मुक्त बिहार का नारा और उनका नेतृत्व है। राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ हम बिहार में नीतीश कुमार जी के नेतृत्व में भी हैं।
अल्पसंख्यक समुदायों और उनसे संबंधित धर्मों (इस्लाम या ईसाई धर्म) की आलोचना पर सरकार हमेशा से कड़े रुख अपनाती रही है। जबकि हिंदू धर्म की आलोचना 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' के तहत स्वीकार्य मानी जाती रही है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद शायद यह मान्यता टूटेगी!
वामपंथी मानसिकता से ग्रसित मीडिया-महानुभावों को मुद्दे नहीं मिलते आज-कल। लेकिन ख़बरों में बने रहने की लालसा भी नहीं जाती। ऐसे में बेचारे झूठ की माला फेरते हैं और धरे जाते हैं। यहाँ तो खैर रगड़ दिए जाते हैं।
उम्मीद है कि 'राष्ट्रवाद से नफरत' की मानसिकता वालों के भी कभी अच्छे दिन जरूर आएँगे, जब ये यकीन करना शुरू कर देंगे कि जुरासिक पार्क की फिल्मों के लिए असली डायनासौर और सुपरमैन फिल्म बनाने के लिए असली सुपरमैन की सहायता नहीं ली गई थी।
यह राहुल गाँधी, सोशल मीडिया के वामपंथी ट्रोल और फुल टाइम प्रचारक पत्रकारों द्वारा प्रचारित एक और झूठ, उनकी कभी न खत्म होने वाली महाझूठ और प्रोपेगंडा का हिस्सा है।