CAB पास होने के बाद बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय के शरणार्थियों को 'अवैध इमिग्रेंट' नहीं माना जाएगा। उन्हें भारत का नागरिक बनाने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
अगर सिर्फ आरोप के आधार पर किसी को बलात्कारी कहकर गोली मारने का जोश थोड़ा कम हो गया हो तो सोचिएगा। न्यायिक प्रक्रिया के त्वरित होने, और ‘बनाना रिपब्लिक’ होने में फर्क तो होता है ना?
शिवसेना ने 'सामना' के जरिए पूछा कि क्या भारत में पहले से समस्याओं की कमी थी जो CAB के रूप में एक नई समस्या खड़ी कर दी गई है? शिवसेना ने दावा किया कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के अलावा बिहार में भी इस विधेयक का विरोध हो रहा है, जहाँ भाजपा सत्ता में है।
“अब्बा बहुत डर लग रहा है। फैक्ट्री में आग लग गई है। बचना मुश्किल लग रहा है। हमें बचा लो।” जवाब में पिता ने कहा, “चिंता मत करो, अल्लाह पर भरोसा रखो।” इसके बाद लाचार पिता हेलो... हेलो... बोलते रहे, लेकिन उन्हें बेटे की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
24 घंटे बाद भी आग का धुआँ ख़त्म नहीं हुआ है। वहाँ स्थित इमारतों से अब भी धुआँ निकल रहा है। पुलिस ने जाँच के लिए फैक्ट्री सील कर रखी है। सोमवार को लोगों ने तीसरी मंजिल से आग की लपटें उठते देखी, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।
महाभारत की द्रौपदी वैसी नहीं थी जैसा उसे पूर्वग्रहों से ग्रस्त कुछ लोग दर्शाना चाहते हैं। क्या वो फैसले लेती नजर आती हैं? जवाब है- हाँ। जैसे आज के भारत में राष्ट्रपति के पास मृत्युदंड को क्षमा करने के अधिकार होते हैं, लगभग वैसे ही द्रौपदी भी मृत्युदंड माफ़ करती नजर आती है।
बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय प्रत्येक रविवार को गीता का विशेष रूप से प्रवचन किया करते थे। आज गीता जयंती है और रविवार भी है। इसकी परम्परा धर्म विज्ञान संकाय आज भी निभा रहा है। ख़ुद को हिन्दू धर्म के कार्यक्रमों से दूर रखने वाले कुलपति गीता जयंती में हिस्सा लेने भी नहीं आए।
इससे पहले पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने बलात्कार की ख़बरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत को दुनिया का रेप कैपिटल बता दिया था। उन्होंने कहा था कि रोज़ के अख़बारों में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की कई ख़बरें आती हैं। राहुल गाँधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए....
तवलीन सिंह का दावा है कि नागरिकता संशोधन विधेयक के माध्यम से मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। लेखों में वह जिस भाषा का उपयोग करती है, उससे यह जानना मुश्किल हो जाता है कि वह CAB की बात कर रही हैं या फिर NRC की। शायद उसके हिसाब से दोनों एक ही मुद्दा है......
"मैं इसीलिए बयान नहीं देती ताकि लोग तालियाँ बजाएँ। तुम्हारे विचार प्रकट कर देने भर से बलात्कारियों के मन में ख़ौफ़ नहीं बैठ जाएगा। हैदराबाद पुलिस ने जो किया, एकदम सही किया। मैं डॉक्टर रेड्डी के दर्द के बारे में सोच भी नहीं सकती लेकिन इस एनकाउंटर से मैं ख़ुश हूँ।"