Friday, January 22, 2021
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न त्वहं कामये राज्यं: ‘गीता जयंती’ में नहीं पहुँचे BHU के कुलपति, परीक्षा का बहिष्कार करेंगे ‘धर्म संकाय’ के छात्र

"जल्द ही आंदोलन को बड़ा रूप दिया जाएगा। हम शांत हैं तो तो प्रशासन ये न समझे कि चुप हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन हमें हल्के में न ले। हमारी माँगें जल्द मानी जाए अन्यथा हम सभी छात्र बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।"

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी तक थमने का नाम नहीं ले रहा है। विश्यविद्यालय प्रशासन ने भले ही मामले को ढकने के लिए तमाम प्रयास किए हों, छात्रों का विरोध-प्रदर्शन अनवरत जारी है। रविवार (दिसंबर 8, 2019) को संकाय के छात्रों ने इस उपलक्ष्य में गीता पाठ का आयोजन किया। छात्रों ने बताया कि बीएचयू के संस्थापक महामना पंडित मदन मोहन मालवीय प्रत्येक रविवार को गीता का विशेष रूप से प्रवचन किया करते थे। इसकी परम्परा धर्म विज्ञान संकाय आज भी निभा रहा है। प्रत्येक रविवार को मालवीय भवन में गीता प्रवचन अभी भी अनवरत होता चला आ रहा है। संयोग से आज गीता जयंती के साथ रविवार भी है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर राकेश भटनागर रविवार को भी गीता जयंती के अवसर पर पूर्व निर्धारित गीता जयंती महोत्सव’ में नहीं पहुँचे। छात्रों का आरोप है कि हिन्दू धर्म से जुड़े कार्यक्रमों से दूरी बना कर रखने वाले कुलपति ने यह पहली बार नहीं किया है बल्कि अपनी नियुक्ति के समय से ही वह मालवीय भवन से दूरी बनाए हुए हैं। और ऐसे में उनसे मालवीय मूल्यों की रक्षा की उम्मीद रखना बेमानी है।

हालाँकि, अंतिम समय में गीता जयंती के कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के रेक्टर शामिल हुए और कुलपति पास के ही होलकर भवन में व्यस्त रहे। प्रशासन ने जिसकी सूचना आज ही ट्वीट के माध्यम से दी। छात्रों ने कहा गीता जयंती की अध्यक्षता कुलपति की जगह रेक्टर वी. के. शुक्ला ने की। जबकि मालवीय भवन जहाँ गीता जयंती समारोह मनाया जा रहा था वहाँ से चंद कदम की ही दूरी पर कुलपति जी नियुक्तियों के लिए साक्षात्कार लेने में व्यस्त रहे। दिल्ली में कार्यपरिषद की बैठक से आने के बाद रविवार होने पर भी साक्षात्कार कराना तो याद रहा पर 1 महीने से आंदोलन कर रहे छात्रों की माँगों पर कुछ बोलना भी उचित नहीं समझा, कार्यवाही तो दूर की बात रही।

वहीं अगर आज की बात करें तो संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पिछले एक महीने से चल रहे आंदोलन में धर्म व मालवीय मूल्यों के रक्षार्थ गीता जयंती के अवसर पर भगवद्गीता का पाठ किया गया व साथ ही भजन कीर्तन भी किया गया। गीता पाठ कार्यक्रम में उपस्थित संकाय के पूर्व छात्र डॉ. मुनीश कुमार मिश्र ने बताया कि महामना जी को गीता का ग्रंथ सबसे प्रिय था। वह प्रतिदिन गीता का पाठ किया करते थे व रविवार को गीता पर स्वयं ही प्रवचन करते थे, जिसको सुनने के लिए विश्वविद्यालय ही नहीं दूर-दूर से विद्वतजनों का आगमन होता था। आज भी धर्म विज्ञान संकाय के द्वारा वह परंपरा मालवीय भवन में संचालित की जा रही है।

आंदोलनरत छात्रों ने बताया कि महामना को जैसे गीता प्रिय थी, उसी तरह धर्म विज्ञान संकाय भी प्रिय था। छात्रों ने आगे कहा कि उनके द्वारा धर्म की रक्षा के लिए जो आंदोलन किया जा रहा है, उसमें कहीं न कहीं महामना की ही प्रेरणा है। महामना गीता के इस श्लोक को बार-बार दोहराया करते थे:

न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।
कामये दुःखतप्तानां प्राणिनामार्तिनाशनम् ॥

भावार्थ: हे प्रभु! मुझे राज्य की कामना नही, स्वर्ग-सुख की चाह नही तथा मुक्ति की भी इच्छा नही। एकमात्र इच्छा यही है कि दुख से संतप्त प्राणियों का कष्ट समाप्त हो जाये।

धर्म संकाय के छात्रों ने विश्वास जताया कि महामना ने अगर आंदोलन के लिए प्रेरित किया है तो उनकी ही प्रेरणा से इसका उचित समाधान अवश्य ही मिलेगा। प्रदर्शनकारी छात्र शुभम तिवारी ने कहा कि अगर सोमवार तक छात्रों की बात नहीं मानी जाती है तो 10 दिसम्बर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार किया जाएगा। आंदोलन के नेतृत्व कर रहे छात्र चक्रपाणि ओझा ने कहा:

“जल्द ही आंदोलन को बड़ा रूप दिया जाएगा। हम शांत हैं तो तो प्रशासन ये न समझे कि चुप हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन हमें हल्के में न ले। हमारी माँगें जल्द मानी जाए अन्यथा हम सभी छात्र बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।”

शुभम तिवारी ने कहा कि अगर सोमवार तक हमारी बात नहीं मानी जाती है तो छात्र 10 दिसम्बर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा का बहिष्कार करेंगे। धरनारत छात्रों में अभिषेक, धीरज मिश्र, शशिकांत मिश्र, प्रिंस, प्रशांत चतुर्वेदी, आनंद मोहन झा, कृष्ण कुमार सहित कई अन्य छात्र भी उपस्थित रहे।

इससे पहले छात्रों ने आरोप लगाया कि फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति के लिए उन्हें विशेषाधिकार के तहत हर जगह जबरदस्ती टॉप कराया गया। ऐसा यह सिद्ध करने के लिए किया गया कि वो 100% योग्य हैं। छात्रों का आरोप है कि इसी कारण उन्हें 10 में 10 नम्बर दिया गया था। बीएचयू प्रशासन की हठधर्मिता को उजागर करते हुए छात्रों ने कहा कि ग़लती सुधारने की बजाय यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि जो चयन समिति ने किया वहीं ठीक था।

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