कम्बोडिया के गणेश की प्रतिमा को लेकर हिन्दू धर्म को गाली देने पर हो सकता है कि शबाना आज़मी 'कूल' कही जाएँ लेकिन यह सवाल तो बनता है कि क्या उन्होंने बकरीद पर ख़ुद के मजहब को कोई सीख दी है? अन्य मजहबों को बधाई और हिन्दू धर्म को सीख- वाह बॉलीवुड वाह।
“सब जानते हैं कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने हमारे कई विधायक और नेताओं को अपने खेमे में शामिल कर लिया था। अगर वे सरकार बनाने में सक्षम होते हैं, तो वे फिर से और अधिक सख्ती के साथ ऐसा करेंगे। ऐसे में अगर हम शिवसेना के साथ सरकार बनाने में सक्षम....."
ओवैसी ने कभी यह सोचा है कि मदरसों में जो सीमित शिक्षा मिलती है, उसके आधार पर क्या मुस्लिमों को नौकरी मिलेगी? क्या वो मुख्यधारा का हिस्सा बनने को तैयार हैं? क्या मजहबी शिक्षा के साथ-साथ दुनिया के हर कोने में प्रचलित शिक्षा को मुस्लिम स्वीकारेगा? या फिर वो आज भी गणित और विज्ञान को 'शैतान' की बातें मान कर आगे बढ़ने की आस लगाए रहेगा?
अयोध्या को अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित किया जाएगा। भगवान राम की विशाल प्रतिमा के इर्द-गिर्द डिजिटल लाइब्रेरी, सांस्कृतिक केन्द्र और फूड प्लाजा वगैरह भी पर्यटकों के लिए बनाए जाएँगे।
सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अर्घ्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।
बीते साल जब दिल्ली की हवा बिगड़ रही थी तो केजरीवाल फैमिली के साथ दुबई प्राइवेट ट्रिप पर निकल गए थे। इस बार चुनाव चौखट पर है, इसलिए बने रहने की मजबूरी है। प्रदूषण के बहाने वे अपने 'बच्चा पॉलिटिक्स' को मॉंजने में जुट गए हैं।
दिल्ली में 1 मई 2014 को ग़ैर-सब्सिडी वाले LPG की क़ीमत ₹928.50 थी और उसी साल जनवरी में इसकी क़ीमत ₹1241.00 थी। मौजूदा कीमत (₹681.50) से तुलना करें तो पता चलता है कि 2014 से यह ₹247.00 सस्ती है न कि ₹302.50 महॅंगी, जैसा सुरजेवाला ने दावा किया है।
शिवसेना के नहीं मानने की सूरत में निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के साथ भाजपा अल्पमत सरकार का गठन कर सकती है। वहीं, एनसीपी ने फिर से साफ कर दिया है कि वह विपक्ष में ही बैठेगी।
"मैडम स्पीकर, जम्मू-कश्मीर के लोग बेहतर के हकदार हैं और स्थिति को देखते हुए साहसी कदम उठाकर प्रधानमंत्री मोदी ने सही किया। जम्मू-कश्मीर के दर्जे में बदलाव को संसद द्वारा दो-तिहाई बहुमत से पारित किया गया जो सुधारों की आवश्यकता की जरूरत पर आम सहमति को दर्शाता है।"
कयास लगाए जा रहे हैं कि राज्य में अल्पमत की सरकार बन सकती है, जिसे बाहर से एनसीपी समर्थन दे सकती है। जिस तरह से 2014 के चुनाव के बाद 288 सदस्यीय विधानसभा में जब 122 विधायकों वाली फड़नवीस की अल्पमत सरकार ने शपथ ली थी तो एनसीपी ने उसे बाहर से समर्थन दिया था।