"दिल्ली सरकार द्वारा नियुक्त पब्लिक प्रोसिक्यूटर 23 सितम्बर के बाद से पेश नहीं हुए हैं। अजीब स्थिति है। सरकार इस केस में गंभीरता दिखा ही नहीं रही। ऐसा लगता है कि राज्य सरकार ने सारी जिम्मेदारियों से हाथ धो लिया है।"
यूॅं ही नहीं कहते बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना। 44 सीटें जीत चौथे पायदान पर रही कॉन्ग्रेस भी शिव सेना के साथ मिल सरकार बनाने के ख्वाब बुन रही है। जबकि 54 सीटें जीतने वाली उसकी साझेदार एनसीपी बार-बार कह रही कि हम विपक्ष में बैठेंगे।
“हरियाणा के लोगों का जनादेश राज्य सरकार के खिलाफ है। मैंने पहले ही पूरे विपक्ष से अपील की है कि लोगों के जनादेश का सम्मान किया जाए और हम सभी को हाथ मिलाना चाहिए - चाहे वह जेजेपी, आईएनएलडी, निर्दलीय हों या कांडा का हरियाणा लोकहित पार्टी।”
"कमलेश सर, मेरा नाम संजय है। मेरी बहन को एक मुस्लिम लड़के ने अपने प्यार में फँसा लिया है।" - संजय बने मोइनुद्दीन ने कमलेश तिवारी को यही फर्जी कहानी सुना कर बातचीत को आगे बढ़ाया। उसकी कहानी सुलकर कमलेश आवेश में आ गए और...
नृशंस हत्या का विरोध करने और हत्यारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात करने के बजाय जमीयत-उलेमा-ए-हिंद हत्यारों के बचाव में सामने आया है। जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने कहा है कि हत्यारों को बचाने में जो भी कानूनी खर्च आएगा, उसे वो वहन करेंगे।
"राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार मुझे परेशान कर रही है। राज्य की पुलिस एक महिला के आत्महत्या के मामले में मेरी बेटी और परिवार के सदस्यों के फोन टैप कर रही है, साथ ही पीछा भी करती है। इस मामले में मुझे 2 बार क्लीन चिट मिल चुकी है, इसके बावजूद कॉन्ग्रेस सरकार ने इस केस को दोबारा से चालू किया है।"
हरियाणा के लोगों के बहुमत को मानते हुए बीजेपी और जेजेपी ने तय किया है कि दोनों पार्टियाँ मिलकर राज्य में सरकार बनाएँगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, राज्य में बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा जबकि डिप्टी सीएम जेजेपी का होगा।
सबके अंत में एक ही मकसद: कमलेश तिवारी की गर्दन काटनी है। ये किसी व्यक्ति की सोच नहीं है, ये सामूहिक सोच है जो किसी व्यक्ति के माध्यम से फलित होती है। कमलेश तिवारी की हत्या अशफाक और मोइनुद्दीन ने ही नहीं, एक मजहब ने की है जो ऐसे लोगों को रोकना तो छोड़िए, उनकी निंदा तक नहीं कर पाता।
उन्होंने बताया कि अशफ़ाक़ के पास पिस्टल थी, जबकि दोनों चाकू पैंट में रख रखा था। आधा किलो वाले मिठाई के डिब्बे में सिर्फ़ रसीद थी। इसकी वजह थी कि वो ख़ुद चाहते थे कि जाँच में उनका नाम सामने आए।
1996 और 2005 का हरियाणा विधानसभा चुनाव - दोनों बार ओम प्रकाश चौटाला हार गए। दिलचस्प कि दोनों बार चौटाला बतौर मुख्यमंत्री चुनाव लड़ रहे थे। आखिर दोनों उन्हें हराया किसने - रणदीप सुरजेवाला ने। लोग उन्हें जाइंट किलर कहने लगे। लेकिन फिर वो राहुल गाँधी के करीबी हुए और इतिहास गवाह है कि...