Sunday, January 24, 2021
Home विविध विषय धर्म और संस्कृति बग्वाल: जहाँ बिना आतिशबाजी और पटाखों के मनाया जाता है प्रकाशपर्व दीपावली

बग्वाल: जहाँ बिना आतिशबाजी और पटाखों के मनाया जाता है प्रकाशपर्व दीपावली

उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में दीवाली मनाने के तौर-तरीके देश के अन्य इलाकों से काफी अलग हैं। गढ़वाल में एक नहीं बल्कि चार-चार दीपावली मनाने की परम्परा है। स्थानीय भाषा में इन्हें अलग-अलग नाम दिया गया है।

त्योहार और उत्सव का मौसम हो और इसमें उत्तराखंड का ज़िक्र न आए यह संभव ही नहीं है। दीपावली के त्यौहार को लेकर देशभर में तैयारियाँ जोरों पर हैं। लेकिन उत्तराखंड में यह प्रकाशपर्व यानी दीपावली बिना पटाखे, आतिशबाजियों और वैचारिक प्रदूषण के ही ख़ास तरीके से मनाया जाता है। देवभूमि कहे जाने वाले इस राज्य में दीपावली को इगास और बग्वाल कहा जाता है। यह बग्वाल राज्य के अलग-अलग स्थानों में दिवाली से 11 दिन बाद और ठीक एक महीने बाद मनाई जाती है। इसके पीछे कारण उत्तराखंड का इतिहास और जनजातीय परम्पराएँ हैं।

दरअसल, उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में दीवाली मनाने के तौर-तरीके देश के अन्य इलाकों से काफी अलग हैं। गढ़वाल में एक नहीं बल्कि चार-चार दीपावली मनाने की परम्परा है। स्थानीय भाषा में इन्हें अलग-अलग नाम दिया गया है। गढ़वाल में कार्तिक दीपावली के अतिरिक्त विभिन्न क्षेत्रों में इगास, राज और मार्गशीर्ष दीपावली भी धूमधाम से मनाई जाती हैं। इन्हें भी लोग कार्तिक दीपावली की तरह मनाते हैं।

राज दिवाली

टिहरी जनपद में इस दीपावली से एक दिन पूर्व ‘राज’ दीपावली को मनाने की अनोखी परम्परा है। इस दीपावली को सिर्फ एक ख़ास जाति के लोग, यानी केवल डोभाल जाति के लोग मनाते हैं। इन्हें इस दीपावली को मनाने का अधिकार रियासत के समय से मिला था, इसलिए यह प्रथा डोभाल जाति में आज भी प्रचलित है।

इगास

इसी तरह से कार्तिक दीपावली के ठीक ग्यारह दिन बाद आकाश दीवाली मनाई जाती है जिसे स्थानीय भाषा में ‘इगास’ कहते हैं। इसे मनाने के पीछे यह मान्यता है कि वनवास के बाद पांडवों में से चार भाई घर वापस लौट गए, लेकिन भीम कहीं युद्ध में फँस गए थे। माना जाता है कि ग्यारह दिन बाद ही भीम घर लौटे और इस तरह तब से आज तक यह आकाश दीपावली या इगास दिवाली मनाई जाती है।

यह भी पढ़ें: बेटे की बलि देने वाले अकेले नहीं थे हज़रत इब्राहीम; जानिए वीर माधो सिंह की अमर गाथा

दूसरी मान्यता उत्तराखंड के इतिहास से जुड़ी है। महाराजा के सेनापति माधो सिंह भंडारी एक बार तिब्बत के युद्ध में तिब्बतियों को खदेड़ते हुए दूर निकल गए। वह दीपावली के समय अपने घर नहीं लौट पाए थे। उस वक्त अनहोनी की आशंका के कारण पूरी रियासत में दीपावली नहीं मनाई गई थी। बाद में रियासत का यह सेनापति युद्ध में विजयी बनकर लौटा। यह खबर रियासत में दीपावली के ग्यारह दिन बाद पहुँच पाई थी। जिसके पश्चात् टिहरी के समीपवर्ती इलाकों में इगास का त्योहार मनाया जाता है।

बग्वाल: मार्गशीर्ष दीपावली

उत्तराखंड में कार्तिक दीपावली के ठीक एक माह पश्चात् मार्गशीर्ष की दीपावली मनाई जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘रिख बग्वाल’ कहते हैं। इस दिन उत्तराखंड के जनजातीय इलाकों जैसे- रवांई जौनपुर, जौनसार व बावर क्षेत्र में सीड़े, अरसे, पूरी-पकोड़े आदि पकवानों सहित चूड़ा कूटने की भी परम्परा है। ग्रामीण रात भर तांदी, गीत, राधे व पांडव नृत्य करते हुए उत्सव मनाते हैं। मार्गशीर्ष की इस दीपावली या बग्वाल पर आतिशबाजी का शोर नहीं होता और ना ही बारूद के प्रदूषण का खतरा।

इसे मनाने के लिए देवदार के पुराने पेड़ों की लकड़ियाँ और छाल इस्तेमाल किए जाते हैं। जिन्हें जलाकर पारंपरिक उत्सव मनाए जाते हैं।

उत्तराखंड में दीपावली के 11 दिन या एक माह बाद माने जाने के पीछे एक और मान्यता बताई जाती है। कहा जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में भगवान राम के अयोध्या पहुँचने की खबर दीपावली के ग्यारह और कुछ स्थानों में एक माह बाद मिली और इसीलिए ग्रामीणों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बाद दीपावली का त्योहार मनाया था और इसी परंपरा को निभाते गए।

देवदार की लकड़ियों से बने ‘भैलू” से बग्वाल मनाते हुए ग्रामीण

लेकिन इन सबसे अलग इन त्योहारों को मनाने का तर्क यह माना जाता है कि जनजातीय इलाकों में लोग अपनी खेती में इस समय इतने व्यस्त होते हैं कि वो किसी त्यौहार की तैयारियाँ कार्तिक माह में नहीं कर पाते हैं। इसी वजह से मार्गशीर्स के माह अपने समस्त कार्यों को निपटाने के बाद ही ग्रामीण लोग इस दीपावली को मनाते आए हैं।

उत्तराखंड भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का एक अनोखा संगम है और अब इन्ही परम्पराओं को सुरक्षित रखना भी यहाँ के स्थानीय लोगों के लिए एक गंभीर विषय बनता जा रहा है। अक्सर सरकार द्वारा भी इन परम्पराओं को बचाए रखने के लिए प्रयास किए जाते हैं। हालाँकि, पलायन जैसे संक्रामक रोग का असर फिर भी पूरे उत्तराखंड को लील रहा है और गाँव खाली होते जा रहे हैं। सवाल अब भी यही है कि जब गाँव में लोग ही नहीं रहेंगे तो फिर संस्कृति को सुरक्षित किसके लिए और आखिर कैसे रखा जा सकेगा?

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जय श्री राम के उद्घोष से भड़कीं ममता बनर्जी, PM मोदी से कहा- बुलाकर बेइज्जती करना ठीक नहीं

जैसे ही ममता बनर्जी मंच पर भाषण देने पहुँचीं बीजेपी कार्यकर्ता तुरंत जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाने लगे, जिससे वो खफा हो गईं।

ये पल भावुक करने वाला, नेताजी के नाम से मिलती है नई ऊर्जा: जानिए PM मोदी ने ‘पराक्रम दिवस’ पर क्या कहा

“मैं नेता जी की 125वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन करता हूँ। मैं आज बालक सुभाष को नेताजी बनाने वाली, उनके जीवन को तप, त्याग और तितिक्षा से गढ़ने वाली बंगाल की इस पुण्यभूमि को भी नमन करता हूँ।”

पुलिस को बदनाम करने के लिए रची गई थी साजिश, किसान नेताओं ने दी थी हत्या की धमकी: योगेश सिंह का खुलासा

साथ ही उन्होंने उसे बुरी तरह धमकाया कि अगर उसने उनका कहा नहीं माना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उसकी पिटाई की गई। ट्रॉली से उलटा लटका कर उसे मारा गया।

मुनव्वर फारूकी ने कोई ‘जोक क्रैक’ नहीं किया तो जैनब सच-सच बतलाना कमलेश तिवारी क्यों रेता गया

कितनी विचित्र विडंबना है, धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं और उनका विरोध होता है तो साम्प्रदायिकता! लेकिन मज़हबी जज़्बात आहत होते हैं तो...।

‘किसान’ नेताओं के मर्डर की कहानी को दमदार बनाने के लिए ‘नकाबपोश’ योगेश के मोबाइल में डाली 4 तस्वीरें

जिस नकाबपोश को शूटर बता किसान नेताओं ने देर रात मीडिया के सामने पेश किया था उसने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

सेना राष्ट्रवादी क्यों, सरकार से लड़ती क्यों नहीं: AAP वाले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने ‘द प्रिंट’ में छोड़ा नया शिगूफा

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) HS पनाग पनाग चाहते हैं कि सेना को लेकर जम कर राजनीति हो, उसे बदनाम किया जाए, दुष्प्रचार हो, लेकिन सेना को इसका जवाब देने का हक़ नहीं हो क्योंकि ये राजनीतिक हो जाएगा।

प्रचलित ख़बरें

मटन-चिकेन-मछली वाली थाली 1 घंटे में खाइए, FREE में ₹1.65 लाख की बुलेट ले जाइए: पुणे के होटल का शानदार ऑफर

पुणे के शिवराज होटल ने 'विन अ बुलेट बाइक' नामक प्रतियोगिता के जरिए निकाला ऑफर। 4 Kg की थाली को ख़त्म कीजिए और बुलेट बाइक घर लेकर जाइए।

शाहजहाँ: जिसने अपनी हवस के लिए बेटी का नहीं होने दिया निकाह, वामपंथियों ने बना दिया ‘महान’

असलियत में मुगल इस देश में धर्मान्तरण, लूट-खसोट और अय्याशी ही करते रहे परन्तु नेहरू के आदेश पर हमारे इतिहासकारों नें इन्हें जबरदस्ती महान बनाया और ये सब हुआ झूठी धर्मनिरपेक्षता के नाम पर।

नकाब हटा तो ‘शूटर’ ने खोले राज, बताया- किसान नेताओं ने टॉर्चर किया, फिर हत्या वाली बात कहवाई: देखें Video

"मेरी पिटाई की गई। मेरी पैंट उतार कर मुझे पीटा गया। उलटा लटका कर मारा गया। उन्होंने दबाव बनाया कि मुझे उनका कहा बोलना पड़ेगा। मैंने हामी भर दी।"

‘अल्लाह का मजाक उड़ाने की है हिम्मत’ – तांडव के डायरेक्टर अली से कंगना रनौत ने पूछा, राजू श्रीवास्तव ने बनाया वीडियो

कंगना रनौत ने सीरीज के मेकर्स से पूछा कि क्या उनमें 'अल्लाह' का मजाक बनाने की हिम्मत है? उन्होंने और राजू श्रीवास्तव ने अली अब्बास जफर को...

‘कोहली के बिना इनका क्या होगा… ऑस्ट्रेलिया 4-0 से जीतेगा’: 5 बड़बोले, जिनकी आश्विन ने लगाई क्लास

अब जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया में जाकर ही ऑस्ट्रेलिया को धूल चटा दिया है, आइए हम 5 बड़बोलों की बात करते हैं। आश्विन ने इन सबकी क्लास ली है।

मंदिर की दानपेटी में कंडोम, आपत्तिजनक संदेश वाले पोस्टर; पुजारी का खून से लथपथ शव मिला

कर्नाटक के एक मंदिर की दानपेटी से कंडोम और आपत्तिजनक संदेश वाला पोस्टर मिला है। उत्तर प्रदेश में पुजारी का खून से लथपथ शव मिला है।
- विज्ञापन -

 

अमित शाह ने किया ‘आयुष्मान CAPF’ का शुभारंभ: 28 लाख से अधिक जवान देश में कहीं भी करा पाएँगे इलाज

आयुष्मान CAPF योजना के तहत CAPF के लगभग 10 लाख जवान और अधिकारी और 50 लाख के आसपास उनके परिवार और परिजन देश के अंदर 24 हज़ार अस्पतालों में सिर्फ कार्ड लेकर उसे स्वैप करके इलाज करा सकते हैं।

बहन को फुफेरे भाई कासिम से था इश्क, निक़ाह के एक दिन पहले बड़े भाई फिरोज ने की हत्या: अश्लील फोटो बनी वजह

इस्लामुद्दीन की 19 वर्षीय बेटी फिरदौस के निक़ाह की तैयारियों में पूरा परिवार जुटा हुआ था। तभी शनिवार की सुबह घर में टूथपेस्ट कर रही फिरदौस को अचानक उसके बड़े भाई फिरोज ने तमंचे से गोली मार दी।

योगेंद्र यादव का दावा- गणतंत्र दिवस के दिन ट्रैक्टर रैली की मिली अनुमति, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार

“बैरिकेड्स हटाए जाएँगे और हम दिल्ली में प्रवेश करेंगे। किसानों के ट्रैक्टर परेड से गणतंत्र दिवस के परेड या सुरक्षा इंतजाम पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ेगा। किसानों का ट्रैक्टर परेड ऐतिहासिक होगा।”

कॉन्ग्रेस ने योगी सरकार को घेरने के लिए शेयर किया महिला का वीडियो, यूपी पुलिस पर लगाए झूठे आरोप: जानें क्या है सच

जिस भ्रामक दावे के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी ने उत्तरप्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए चित्रित करने का प्रयास किया वह असल में उनकी सोच के बिल्कुल विपरीत निकला।

मदरसा सील करने पहुँची महिला तहसीलदार, काजी ने कहा- शहर का माहौल बिगड़ने में देर नहीं लगेगी, देखें वीडियो

महिला तहसीलदार बार-बार वहाँ मौजूद मुस्लिम लोगों को मामले में कलेक्टर से बात करने के लिए कह रही है। इसके बावजूद लोग उसकी बात को दरकिनार करते हुए उसे धमकाते हुए नजर आ रहे हैं।

गणतंत्र दिवस के पहले नोएडा, गाजियाबाद सहित इन 6 जगहों पर बम रखे जाने की अफवाह: यूपी पुलिस अलर्ट

गणतंत्र दिवस से पहले उत्तर प्रदेश में भय और आतंक का माहौल है। उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, कानपुर और इलाहाबाद में इस सप्ताह 6 फर्जी बम रखे जाने की अफवाह के बाद पुलिस सतर्क हो गई है।

किसानों के समर्थन में कॉन्ग्रेस का राजभवन मार्च: दिग्विजय समेत 20 नेता गिरफ्तार, उत्तराखंड में भी हाथापाई पर उतरे कॉन्ग्रेसी

देहरादून में भी कृषि विरोधी प्रदर्शनकारियों ने राजभवन पहुँचने के लिए पुलिस बैरिकेट्स तोड़ने की कोशिश की। जब पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापाई पर उतर गए।

जय श्री राम के उद्घोष से भड़कीं ममता बनर्जी, PM मोदी से कहा- बुलाकर बेइज्जती करना ठीक नहीं

जैसे ही ममता बनर्जी मंच पर भाषण देने पहुँचीं बीजेपी कार्यकर्ता तुरंत जय श्री राम और भारत माता की जय के नारे लगाने लगे, जिससे वो खफा हो गईं।

ये पल भावुक करने वाला, नेताजी के नाम से मिलती है नई ऊर्जा: जानिए PM मोदी ने ‘पराक्रम दिवस’ पर क्या कहा

“मैं नेता जी की 125वीं जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उन्हें नमन करता हूँ। मैं आज बालक सुभाष को नेताजी बनाने वाली, उनके जीवन को तप, त्याग और तितिक्षा से गढ़ने वाली बंगाल की इस पुण्यभूमि को भी नमन करता हूँ।”

पुलिस को बदनाम करने के लिए रची गई थी साजिश, किसान नेताओं ने दी थी हत्या की धमकी: योगेश सिंह का खुलासा

साथ ही उन्होंने उसे बुरी तरह धमकाया कि अगर उसने उनका कहा नहीं माना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। उसकी पिटाई की गई। ट्रॉली से उलटा लटका कर उसे मारा गया।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
385,000SubscribersSubscribe