बड़ी ख़बर

आजादी कॉन्ग्रेसियों की बपौती नहीं, कालिख पोत कर सावरकर को काला नहीं कर सकते

इनकी सावरकर से दुश्मनी केवल इसलिए है क्योंकि वह हिंदूवादी थे, और कॉन्ग्रेस की राजनीति मुस्लिम तुष्टिकरण की है। हिन्दूफ़ोबिया इनकी वैचारिक नसों में है, तो इसलिए हिन्दू हितों की बात करने वाले को खलनायक या कमज़ोर दिखाना तो हिन्दूफ़ोबिया की तार्किक परिणति होगा ही।

मुस्लिमों ने ख़ुद कहा था कि राम मंदिर की ज़मीन हिन्दुओं को दे दी जाए, SC में पेश किया गया 20 एफिडेविट

सभी 20 एफिडेविट से यह स्पष्ट है कि मुस्लिमों ने यह स्वीकार किया है कि 1935 के बाद से ही उस स्थल पर नमाज़ नहीं पढ़ी जा रही है और इसीलिए अगर हिन्दुओं को यह ज़मीन वापस कर दी जाती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

‘मुस्लिमो, दलितों के इस विरोध-प्रदर्शन से सीखो’ – रामभक्त रविदास के नाम पर हिंसा फैलाने वालो, उन्हें पढ़ो तो सही

संत रविदास मंदिर पर राजनीति कर रहा चंद्रशेखर वही व्यक्ति है, जिसने अयोध्या में राम मंदिर की जगह बुद्ध मंदिर की माँग की थी। "अब कैसे छूटै राम नाम रट लागी" लिखने वाले संत रविदास अगर आज ज़िंदा होते तो उनके नाम पर राजनीति करने वाले और दलितों को 'राम अमंदिर आंदोलन' से दूर रहने की सलाह देने वाले चंद्रशेखर को अपना भक्त तो नहीं ही मानते।

विवेकानंद का ‘सर्व-धर्म-समभाव’ इस्लाम के लिए एक मौका था, कट्टरपंथियों को सोचना होगा क्यों गँवा दिया

समुदाय विशेष को यह सोचने की ज़रूरत है कि विवेकानंद के 'सर्व-धर्म-समभाव' वाले पन्ने पर क्यों विभाजन की खूनी दास्ताँ लिखी, क्यों मुस्लिम-बहुल कश्मीर को हिन्दू-बहुल भारत का साथ मंज़ूर नहीं और क्यों कश्मीरी पंडितों के साथ वो किया, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था।

मिस्टर चिदंबरम को, पूर्व गृह मंत्री, वित्त मंत्री को ऐसे उठाया CBI ने… तो? चावल के लोटे में पैर लगवाते?

अगर एनडीटीवी को सीबीआई के दीवार फाँदने पर मर्यादा और 'तेलगी को भी सम्मान से लाया गया था' याद आ रहा है तो उसे यह बात भी तो याद रखनी चाहिए पूर्व गृह मंत्री को कानून का सम्मान करते हुए, संविधान पर, कोर्ट पर, सरकारी संस्थाओं पर विश्वास दिखाते हुए, एक उदाहरण पेश करना चाहिए था।

चिदंबरम को ले गई CBI-ED की टीम, मेडिकल के बाद, कभी भी हो सकता है गिरफ़्तारी का ऐलान

पी चिदंबरम की गिरफ्तारी के बाद उनके बेटे कार्ति चिदंबरम ने कहा कि इस केस के कई साल बीतने के बाद भी सीबीआई के पास चार्जशीट में उनके पिता का नाम नहीं है। कार्ति ने कहा कि देश के कई बड़े मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है।

बात रवीश कुमार के ‘सूत्रों’, ‘कई लोगों से मैंने बात की’, ‘मुझे कई मैसेज आते हैं’, वाली पत्रकारिता की

ये है वामपंथी पत्रकारिता जो खबरों को देखता नहीं, दिखाता नहीं, बल्कि खबरों को बनाता है, मेकअप करता है उनका और तब आपको गंभीर चेहरे के साथ बताता है कि भाई साहब आप देखते कहाँ हैं, रवीश का हलाल खबर शॉप यहाँ है!

प्रेस फ्रीडम का रोना रो रहे NDTV और रॉय दम्पति का काला चिट्ठा: शेयर्स की धोखाधड़ी से लेकर ICICI लोन तक

आख़िर एनडीटीवी का असली मालिक कौन सा व्यक्ति या संस्था है? शेयर्स की हेराफेरी के पीछे मकसद क्या था? इन सबमें आईसीआईसीआई बैंक का क्या हित था? 2004 से अब तक की कहानी पढ़ कर जानिए क्यों 'मीडिया की स्वतन्त्रता' का रोना रो रहे हैं रॉय दम्पति?

CBI-ED ने किया चिदंबरम की याचिका पर SC में कैविएट दायर, कहा- हमें सुने बिना न दें कोई फैसला

CBI तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पी चिदम्बरम की गिरफ्तारी से राहत माँगने वाली याचिका के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किए हैं। अब कोर्ट कैविएट दायर करने वालों का पक्ष सुने बिना मामले में कोई फैसला नहीं सुना सकता है।

रिश्वत के पैसे से चिदंबरम ने खरीदे स्पेनिश टेनिस क्लब और विदेश में सम्पत्ति: ED

पीटर मुखर्जी ने कार्ति चिदंबरम को ₹3.09 करोड़ डेबिट नोटों में हेरफ़ेर के ज़रिए दिए। इसके लिए ऐसे लेन-देन कागज़ों पर दिखाए गए, जो असल में हुए ही नहीं।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें