भारत की बात

त्रिपुरा का उनाकोटी: वो जगह जहाँ 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियाँ, मिल सकता है विश्व हेरिटेज का टैग, कभी था शिवभक्तों की आस्था...

99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियों वाले त्रिपुरा के उनाकोटी नाम के स्थान को विश्व हेरिटेज में जोड़ने के लिए भारत सरकार कर रही प्रयास।

काशी तमिल संगमम: जीवंत परंपराओं को आत्मसात करने की विशेषता ही भारतीय सांस्कृतिक संपूर्णता का आधार

प्रथम तमिल संगम मदुरै में हुआ था जो पाण्ड्य राजाओं की राजधानी थी और उस समय अगस्त्य, शिव, मुरुगवेल आदि विद्वानों ने इसमें हिस्सा लिया था।

रोता हुआ आम का पेड़, आरती के समय मंदिर में देवता को प्रणाम करने वाला ताड़ का वृक्ष… वेदों से प्रेरित था जगदीश चंद्र...

छुईमुई का पौधा हमारे छूते ही प्रतिक्रिया देता है। जगदीश चंद्र बोस ने दिखाया कि अन्य पेड़-पौधों में भी ऐसा होता है, लेकिन नंगी आँखों से नहीं दिखता।

‘मेरे मामा मेरी मातृभूमि से बढ़कर नहीं हो सकते’: जिसने उत्तर-पूर्व की रक्षा के लिए मामा का भी किया वध, जिसके ‘त्रिभुज’ में औरंगजेब...

मुगल आक्रांताओं से उत्तर-पूर्व भारत की पवित्र भूमि की रक्षा करने वाले वीरयोद्धा लाचित बरपुखान का जीवन और व्यक्तित्व शौर्य, साहस, स्वाभिमान, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का पर्याय है।

50000 की मुगलिया फौज, पूर्वोत्तर के पानी से गई हार: यूँ ही नहीं NDA का सर्वश्रेष्ठ कैडेट पाता है ‘लाचित बरपुखान’ सम्मान

लाचित बरपुखान ने पूर्वोत्तर की जमीन पर मुगलों की बर्बर विस्तारवादी मंसूबों को दफन कर दिया। उनके पराक्रम में इतना बल था कि उससे टकराने के बाद मुगलों ने कभी पूर्वोत्तर पर काबिज होने का स्वप्न न देखा।

औरंगजेब मर गया पर उस राठौड़ से जीत न पाया, इस्लामी सरदार देते थे टैक्स: मारवाड़ की वह अभेद्य दीवार जिससे टकरा मुगल हुए...

जसवंत सिंह की मौत हो गई। मारवाड़ के नवजात उत्तराधिकारी अजीत सिंह की रक्षा का जिम्मा दुर्गादास राठौड़ ने उठाया। औरंगजेब मर गया, जीत नहीं पाया।

जनजातीय गौरव दिवस: जो ईसाई मिशनरी, अंग्रेज, इस्लामी आक्रांता… सबसे लड़े, 12 नायकों की गाथा एक साथ पढ़िए

भगवान बिरसा मुंडा की जयंती ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। यह दिन राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नायकों को याद करने का है।

कहीं दुःखी न हो जाएँ लॉर्ड माउंटबेटन, इसीलिए नेहरू ने नहीं उतारा था अंग्रेजों का झंडा: गाँधी ने ‘अशोक चक्र’ को सलामी देने से...

देश की आजादी के बाद 'यूनियन जैक' को नेहरू उतारना नहीं चाहते थे। गाँधी का मानना था कि देश के झंडे में यूनियन जैक भी होना चाहिए, माउंटबेटन के दुःखी होने के कारण नहीं उतारा अंग्रेजों का झंडा।

‘लाठीचार्ज कीजिए, मार डालिए, हम नहीं जाएँगे, आप गोली चलाइए’: जब मुलायम ने रामभक्तों पर चलवाई थी अंधाधुंध गोलियाँ, वीडियो में देखें मंजर

एक रामभक्त को ये कहते हुए सुना जा सकता है, "आइए, लाठीचार्ज कीजिए, मार डालिए। हम नहीं जाएँगे, आप गोली चलाइए।" उस दिन 40-45 की कर दी गई थी हत्या।

रक्त से लाल हो गई अरावली की पहाड़ियाँ, मृत माँ के स्तन में दूध खोज रहा था बच्चा… 1500 बलिदानी भीलों को बिसरा दिया...

पहाड़ी को घेर कर अंग्रेजों ने 1500 हिन्दू भीलों को मार डाला, लेकिन इतिहास में इस घटना को जगह नहीं मिली। गोविंद गिरी को भी भुला दिया गया। जानिए मानगढ़ नरसंहार के बारे में।

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