भारत की बात

18 अप्रैल 1669… जब औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का दिया था आदेश, साढ़े 4 महीने में कर ली गई थी...

कौन नहीं जानता है कि गायों को हरावल दस्ते में आगे रखकर हिंदुओं को जीतने वाले कायर रेगिस्तानी बर्बरों ने हिंदुओं की चेतना को खत्म करने के लिए मंदिरों को अपवित्र किया, मूर्तियाँ तोड़ीं और बलात्कार किए।

शेरपुर की अनोखी होली: रंग लगाने के बाद हिंदू हुरियारे मुस्लिमों को देते हैं ‘जीभर’ गाली, नवाबों के दौर से जारी परंपरा

पीलीभीत के शेरपुर में होली के दिन रंग के साथ-साथ गलियाँ भी दी जाती हैं। यहाँ हिंदू पहले मुस्लिमों को रंग लगाते हैं और फिर उनको गाली देते हैं।

बुरा न मानो होली है, जोगीरा सा रा रा : फागुन के गीत, जोगीरा, चैतावर और धमार, आज भूल रहे हैं लोग

होली है और होली में अगर कुछ मस्ती ना हो तो रंग कुछ फीका लगने लगेगा। तो आइए, पढ़िए और सुनिए कुछ खास जोगिरा… लेकिन हाँ, बुरा न मानिएगा, होली है।

इतिहास का वह दौर जब होली ईद-ए-गुलाबी या आब-ए-पाशी हो गई थी

मध्यकालीन भारतीय मंदिरों के भित्तिचित्रों और आकृतियों में होली के सजीव चित्र देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इसमें 17वीं शताब्दी की मेवाड़ की एक कलाकृति में महाराणा को अपने दरबारियों के साथ चित्रित किया गया है।

भारत की विविधता, संस्कृति, लोक कला, साहित्य को समेटती होली: हर राज्य में उल्लास का अलग है रंग

जहाँ ब्रजधाम में राधा और कृष्ण के होली खेलने के वर्णन मिलते हैं वहीं अवध में राम और सीता के जैसे होली खेलें रघुवीरा अवध में। राजस्थान के अजमेर शहर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर गाई जाने वाली होली का विशेष रंग है।

15 साल के मुहम्मद बिन कासिम पर राजा दाहिर की बेटियों ने लगाए थे रेप के आरोप: जानिए क्या हुआ खलीफा के दरबार में

खलीफा वालिद बिन अब्दुल मलिक सूर्यदेवी के सौंदर्य को देख कर मोहित हो गया और उसके भीतर हवस की आग जाग उठी। फिर उसने राजा दाहिर की बड़ी बेटी के साथ जोर-जबरदस्ती शुरू कर दी।

कला में दक्ष, युद्ध में महान, वीर और वीरांगनाएँ भी: कौन थे सिनौली के वो लोग, वेदों पर आधारित था जिनका साम्राज्य

वो कौन से योद्धा थे तो आज से 5000 वर्ष पूर्व भी उन्नत किस्म के रथों से चलते थे। कला में दक्ष, युद्ध में महान। वीरांगनाएँ पुरुषों से कम नहीं। रीति-रिवाज वैदिक। आइए, रहस्य में गोते लगाएँ।

एमएस गोलवलकर… वो ‘गुरुजी’ जिनका संगठन मंत्र और तंत्र आज भी प्रासंगिक: पटेल और वाजपेयी दोनों जिनके कायल

एमएस गोलवलकर लाखों स्वयंसेवकों के मार्गदर्शक हैं। आज भी स्वयंसेवक उनको ''गुरुजी" के नाम से पुकारते हैं। वो गोलवलकर ही थे, जिनके कारण...

17 साल की लड़की, फौज की 2 बटालियन और लगान माफी का लालच: अंग्रेजों को पानी पिलाने वाली रानी गाइदिन्ल्यू

रानी गाइदिन्ल्यू जिस हेराका आन्दोलन को चलाती रही, वो मुख्यतः अपनी सभ्यता-संस्कृति बचाने के लिए ही था। उन्हें बैप्टिस्ट ईसाइयों का हिंसक विरोध झेलना पड़ा।

बसंत सिर्फ ऋतु नहीं, ज्ञान की उपासना से लेकर काम और मोक्ष का जीवंत उत्सव भी है

बसंत, बसंत पंचमी, मदनोत्सव, सरस्वती पूजा, होली की शुरुआत, शमशान में मौत के तांडव पर भारी जीवन उत्सव- बसंत यह सब कुछ है।

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