किताब के एक चैप्टर विशेष रूप से इस बात से संबंधित है कि कैसे इस्लामवादियों ने आर्य समाज को पूरी तरह से बदनाम करने के लिए सड़क हिंसा और हत्याओं का इस्तेमाल किया।
रामनामी गमछा, रुद्राक्ष, शिखा, तिलक, धोती, अगरबत्ती और मालाएँ पहन कर तैयार होता है बॉलीवुड का 'छोटे पंडित'। तभी तो नेता खुल कर शिखा रखने वालों को 'चोटीवाला राक्षस' कहते हैं।
TDP ने लिखा कि 'अप्रैल फूल डे' का फायदा उठा कर श्रीराम कर्री ने फेक न्यूज़ फैलाने का काम किया है, जिससे न सिर्फ उन्होंने पत्रकारिता को नीचे धकेला है, बल्कि पाठकों को भी निराश किया है।