यूपी-बिहार के युवाओं से लेकर महिलाओं तक का चित्रण ऐसा किया गया है, जैसे वो दोयम दर्जे के नागरिक हों। वेश्याएँ 'विधवाओं के गेटअप' में आती हैं और कपड़े उतार कर नाचती हैं।
11 नवंबर, 1947 को देश में दिवाली मनाई जा रही थी, उस समय राजौरी कबाइलियों के आतंक में जुल्म में जल रहा था। तीस हजार से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।
वामपंथीऔर उदारवादियों को यदि किसी मजहब में ज्ञान देना ही है तो उन्हें उन मजहब से शुरुआत करनी चाहिए, जहाँ समाज को शिक्षित करने की सजा गला रेतने के रूप में मिलती है।