बीएचयू प्रशासन को उस ऑर्डिनेंस को देश के सामने प्रस्तुत करना चाहिए जिसके जरिए बीएचयू में धार्मिक शिक्षा बीएचयू एक्ट-1951 में संशोधन के पूर्व से दी जा रही थी, इसीलिए संसद को संशोधन के समय लिखना पड़ा कि "religious instruction being given." अर्थात दी जा रही धार्मिक शिक्षा रोकी नहीं जाएगी।
बड़े पैमाने पर हो रहे ह्यूमन ट्रैफिकिंग की जानकारी पाकिस्तान की सेना और सरकार दोनों को है। लेकिन, चीन को खुश रखने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। पुलिस पर ऐसे मामलों की जॉंच नहीं करने का दबाव है। मीडिया को भी इसकी रिपोर्टिंग से मनाही है।
राजपक्षे ने इस्लामी कट्टरता को आतंकवाद की जड़ बताते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोग नौकरी के लिए मध्य-पूर्व जाते हैं। वहॉं उन्हें भड़काया जाता है। इंटरनेट पर उपलब्ध इस्लामी टिप्पणियों से किसी को भी घर बैठे कट्टरपंथी बनाया जा सकता है।
"अगर ग़ैर-हिन्दू BHU का कुलपति नहीं हो सकता और यह वर्तमान एक्ट में है, तो धर्म विज्ञान संकाय के लिए बनाए विशेष अधिनियम एक्ट से बाहर कैसे हो गए? 1904, 1906, 1915, 1951 और 1969 के BHU के एक्ट में अगर धर्म विज्ञान संकाय के लिए विशेष अधिनियम बनाये गए थे तो उसको महामना के उद्देश्यों के विपरीत क्यों बदला गया?"
“पाकिस्तान में हिंदू और सिख लड़कियों को बहकाकर लव जिहाद के जाल में फँसाने और फिर उन्हें इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए मजबूर करने का चलन जोरों पर है। मैं पाक में श्री करतारपुर साहिब के दर्शकों को सावधान करना चाहता हूँ कि कृपया इस ट्रैप के बारे में जागरूक और सतर्क रहें।”
"अगर दूल्हा भाग न जाए तो शादी नक्की"- सरदार पटेल की इस एक लाइन ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की राह में रोड़े अटकाने वाले नेहरू के अरमानों पर पानी फेर दिया। नेहरू ने डॉक्टर प्रसाद को रोकने के लिए झूठ तक बोला लेकिन उनकी पोल खुल गई।
तस्वीर में नीले व हरे डॉट्स के माध्यम से चाँद की सतह पर दुर्घटनाग्रस्त विक्रम लैंडर के मलबे को दिखाया गया है। हरे डॉट्स स्पेसक्राफ्ट के मलबे को प्रदर्शित करते हैं। ब्लू डॉट्स दिखाते हैं कि उस मलबे से वहाँ की ज़मीन पर क्या असर पड़ा।
"उपेक्षा का एकमात्र कारण ऐसे कुलपतियों का यहाँ आना भी रहा जो वामपंथी विचारधारा से प्रेरित थे। जिनकी हिन्दू धर्म और सनातन परम्पराओं में कोई रूचि नहीं रही। कॉन्ग्रेस के शासन के दौरान जब वामपंथ का बोलबाला रहा तभी BHU के संविधान से काफी छेड़छाड़ हुआ।"
लर्नर को यूके ने टेररिस्ट वॉचलिस्ट 'प्रिवेंट' प्रोग्राम के अंतर्गत 'डी रैडिकलाइजेशन' क्लास का हिस्सा बनाया ताकि वो इस्लाम-विरोधी न बनें। लर्नर ने बताया कि इस दौरान उनके साथ एक आतंकी की तरह व्यवहार किया गया। आतंकियों के साथ मुठभेड़ के बाद उनके शरीर पर 80 टाँके लगे थे।