ये कहानी है उस योद्धा की, जिसकी गाथा मारवाड़ में आज भी सुनाई जाती है। वो राठौड़, जिसके प्रताप से भयभीत होकर शाहजहाँ नंगे-पाँव अपने ही दरबार से भाग खड़ा हुआ। जिसकी वीरता देख मुगलों ने छल का सहारा लिया और प्रपंच की आड़ ली।
इमरान ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश में इलाज कराने को लेकर कथित तौर पर कोर्ट के खिलाफ और चीफ जस्टिस आसिफ सईद पर टिप्पणी की थी। जिसके बाद एक शख्स ताहिर मसूद ने लाहौर हाईकोर्ट में इमरान के खिलाफ याचिका दायर की।
नमृता चंदानी की मौत के बाद परिवारजनों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उसके गले में बंधे दुपट्टे को मौत के एक हफ्ते बाद फॉरेंसिक लैब भेजा गया था, जिसकी वजह से डीएनए नहीं लिया जा सका।
58 वर्षीय बाजवा को नवम्बर 2016 में पाकिस्तान के तत्कालीन पीएम नवाज़ शरीफ ने इस पद पर नियुक्त किया था। इसके बाद इमरान खान की सरकार ने भी बाजवा को इस पद पर रहने के लिए तीन साल का एक्सटेंशन दे दिया था।
राजपूतों और मराठों की तरह कोई और भी था, जिसने मुगलों को न सिर्फ़ नाकों चने चबवाए बल्कि उन्हें खदेड़ कर भगाया। असम के उन योद्धाओं को राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिन्होंने जलयुद्ध का ऐसा नमूना पेश किया कि औरंगज़ेब तक हिल उठा। आइए, चलते हैं पूर्व में।
78,000 ईसापूर्व से लेकर 18,000 ईसापूर्व और 7000 ईसापूर्व से लेकर 2500 ईसापूर्व की समयावधि में सरस्वती नदी निरंतर बिना किसी रुकावट के बहा करती थी। इसके साथ ही ऋग्वेद की उन कई ऋचाओं पर भी मुहर लग गई है, जिनमें सरस्वती नदी का जिक्र है।
67 वर्षीय पाक पीएम के इस बयान पर लोगों ने उनका मज़ाक बनाया। पत्रकार नायला इनायत ने पूछा कि इतनी उम्र और अनुभव होने के बावजूद इमरान ख़ान ने ब्लड प्लेटलेट्स के बारे में नहीं सुना है। यह अजीब है।
पुलिस ने कुरान जलाने वाले और उनपर हमला करने वाले लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की चेतावनी के बावजूद कुरान को जला डाला। कुरान की एक प्रति को जलाया गया और 2 अन्य किताबों को कूड़ेदान में डाल दिया गया।
सोशल मीडिया पर जहाँ इस वीडियो को देखने के बाद लोग रेखा देवी का तरह-तरह से मजाक उड़ा रहे हैं तो वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में इसे रेखा देवी पर हुए हमला बताया जा रहा है।
करतारपुर गलियारे के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को 'लाइफटाइम अचीवमेंट' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लेकिन पेंच यह है कि इमरान को यह अवॉर्ड भारत विरोधी सिख चरमपंथ और खालिस्तानी आंदोलन से जुड़ी संस्था से मिला है, जिसके लिए लंदन के मेयर सादिक खान...