"पीएम मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के सामने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण का मुद्दा उठाया और दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई है कि ये मुद्दा दोनों देश के लिए काफी अहम है। ऐसे में दोनों देश के अधिकारी इस मसले पर एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे।"
UAPA क़ानून के तहत मौलाना मसूद अजहर, हाफ़िज़ सईद, दाऊद इब्राहिम, ज़कीउर्रहमान लखवी को आतंकवादी घोषित करने के बाद बाद अमेरिका ने भी भारत के इस रुख़ का समर्थन किया है। अमेरिका का कहना है कि...
इन पोस्टर्स पर बृष्टि का नाम, उनका फोन नंबर लिखा है और साथ ही ये भी लिखा है कि अकेले लोग रात को इस नंबर पर बात करें। फोन करने वाला 2000 तक कमा सकता है।
ये रैंकिंग वर्ल्ड इकनोमिक फोरम द्वारा जारी किया गया है। अगर टॉप के 25% देशों की बात करें तो भारत ने 2017 के मुक़ाबले सबसे बड़ी छलांग लगाई है। अगर हम 2013 के आँकड़े को देखेंगे तो पता चलता है कि मोदी सरकार के आने के बाद से पर्यटन के क्षेत्र में भारत लगातार नई सीढ़ियाँ चढ़ रहा है।
पाकिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान जैसे कई ऐसे आतंकी समूह सक्रिय हैं, जो पाकिस्तानी सरकार को उखाड़ फेंक कर खलीफा का राज स्थापित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में समाज अतिवादी होता जा रहा है और ऊपर से वह अपने परमाणु हथियारों के जखीरे में लगातार वृद्धि कर रहा है।
"हमारी फ़ौज बलूचिस्तान में अपने ही लोगों पर बम बरसा रही है। हम अपने ही लोगों को कैसे मार सकते हैं? जरा सोचिए अपने ही लोगों पर बम बरसाना और उन्हें मारना कितना अनुचित है। ट्राइबल क्षेत्रों में 60 लाख लोगों पर बम बरसाए जा रहे हैं।"
लीजेंडरी पोर्न अभिनेता जॉनी सिन्स ने पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित को ट्रोल किया है। जॉनी सिन्स ने अब्दुल बासित को टैग करते हुए ट्विटर पर लिखा कि उनकी आँखें बिलकुल ठीक हैं। साथ ही यह भी लिखा कि अब्दुल बासित को नए फॉलोवर्स मुबारक हों।
शेखी बखारने के चक्कर में पाकिस्तानी रेल मंत्री को अपनी बेइज्जती करवाने की आदत रही है। वे भारत-पाकिस्तान के बीच एक-दो महीने में परमाणु युद्ध होने की भविष्यवाणी कर चुके हैं। उनका दावा है कि पाक के पास पाव, आधा पाव के एटम बम हैं।
यह सर्वे, विनिर्माण, सेवाओं, संबद्ध कृषि, व्यापार और अन्य क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोज़गार सृजन की जानकारी एकत्र करने के लिए किया गया था। सर्वे शुरू होने से पहले लगभग 5 करोड़ व्यक्ति ऐसे प्रतिष्ठानों में कार्यरत थे, जिन्हें मुद्रा लोन का लाभ मिला था।
पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने अपने इस विरोध-प्रदर्शन को 'कश्मीर फ्रीडम मार्च' का नाम दिया था। मार्च पार्लियामेंट स्क्वेयर से शुरू होकर भारतीय उच्चायोग की बिल्डिंग तक पहुँचा। मार्च का नेतृत्व यूके की लेबर पार्टी के कुछ सांसदों ने किया।