एनसीपीसीआर ने यह भी पाया कि बड़े लड़कों को भी विरोध स्थलों पर भेजा गया था। बच्चों को विरोध के लिए भेजना किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 83(2) का उल्लंघन है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की रिपोर्ट के जवाब में अपना पूरा हलफनामा दाखिल करने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया।