संजीव नेवार ने लिखा, “इसी तरह रोहिंग्या घुसपैठ पर मेरी चिंता को भी जो कि सरकारी बयानों पर आधारित है, उसे भी हेट स्पीच के रूप में वर्गीकृत किया गया है।"
"मैं चौंक गई। कोई इतना घिनौना सवाल कैसे पूछ सकता है। चाहे असली हो या नकली, आपकी समस्या क्या है? क्या आप एक दर्जी हैं? जो आप स्पर्श करके महसूस करना चाहते हैं। नॉनसेंस।"
“कई बार मेरे पति आफ़ताब के द्वारा मुझपर अपने दोस्तों के साथ हमबिस्तर होने का दबाव बनाया गया लेकिन मैं अडिग रहीं। हर रोज मेरे साथ मारपीट हुई। मैं अपना नाम तक भूल गई थी। मेरा नाम तो हरामी और कुतिया पड़ गया था।"
19 सितंबर 2020 को दोपहर 12 बजे के आसपास वीरेंद्र के कपड़े की दुकान में घुस कर उन पर हमला बोला गया। यह हमला उनकी दुकान के पास कपड़े की ही दुकान करने वाले अकरम, शेर खान और आशु समेत 10-12 लोगों ने किया।