ये तथाकथित वैज्ञानिक ध्रुव राठी की तरह हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी 'फिलीपींस को आज़ादी कैसे मिली' से लेकर 'कोरोना वायरस कैसे काम करता है' तक, हर मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। तभी उसकी तुलना 'राजा बाबू' फिल्म के गोविंदा से होती है।
बडगाम जिले के वाथुरा गाँव पहुॅंची मेडिकल टीम ने जब एक संदिग्ध से ट्रेवल हिस्ट्री को लेकर पूछताछ की तो उसके परिजनों ने उन्हें बंधक बना लिया। पुलिस जब इन्हें छुड़ाने के लिए पहुॅंची तो भीड़ ने उस पर भी पथराव कर दिया।
कानपुर के चमनगंज में घर-घर जाकर नर्सें कोरोना संदिग्धों की जॉंच में जुटी थीं। इसी दौरान कलीम, अमजद अंसारी, बजी अहमद और सलीम ने उनके साथ छेड़खानी की। गाली-गलौज करते हुए उन पर फब्तियाँ कसी, साथ ही अश्लील हरकतें भी की।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि लॉकडाउन की बजाए यदि कुछ सीमित कदम ही उठाए गए होते तो भी भारत में संक्रमितों की संख्या 2 लाख के पार हो जाती। केंद्र सरकार ने ये भी कहा है कि वो विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा लॉकडाउन बढ़ाने के सुझाव पर विचार कर रही है।
फरवरी में यह बात सामने आई थी कि सीमा रिज़वी पर हमले के आरोपों में सफूरा ज़रगर समेत 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। रिज़वी ने अपनी शिकायत में कहा था कि जामिया मस्जिद के नजदीक कुछ प्रदर्शनकारियों ने उसे रोक लिया था। आरएसएस का एजेंट बताते हुए हमला किया था।
नेहा कुमारी नामक महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने बच्चे को लेकर अपील की थी, जिसके बाद उन तक सहायता पहुँचाई गई। नेहा का एक 3.5 वर्षीय बच्चा है, जो ऑटिज्म से पीड़ित है। उसे कई प्रकार की फ़ूड एलर्जी भी है।
ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने समुदाय विशेष से कहा कि वे ₹2 लाख दे दें तो मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा। ग्रामीणों को सूचना मिली कि अंत में ₹60,000 पर सब तय हुआ। पत्रकारों को पहले ही कह दिया गया था कि वो वीडियो कहीं नहीं भेजें।
देश के साथ-साथ दिल्ली में तेजी से कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ाने के लिए जिम्मेवार तबलीगी जमात को लेकर केजरीवाल ने पहली बार सच को स्वीकार कर लिया है। पीएम मोदी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिग जरिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि तबलीगी जमातियों के चलते कोरोना से जूझने के लिए सरकार को और वक्त चाहिए।
“पुलिस जब मौके पहुँची तो मस्जिद के भीतर 20-25 लोग थे जो नमाज की तैयारी कर रहे थे। उनमें से सात को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी लोग भाग गए, जिनमें एक मौलाना भी था।”
मृत बच्चे के पिता का कहना है कि जहानाबाद सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने रिशू को पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन एंबुलेंस का कोई इंतजाम नहीं किया, जबकि अस्पताल में दो-तीन एंबुलेंस खड़ी थीं। लॉकडाउन के कारण वे खुद भी किसी निजी गाड़ी का इंतजाम नहीं कर पाए।