जम्मू नगर निगम (जेएमसी) ने शहर के ऐतिहासिक सिटी चौक का नाम बदलकर ‘भारत माता चौक’ कर दिया है और सर्कुलर रोड चौक का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में 'अटल जी चौक' कर दिया है।
अभी इस मामले पर कुछ अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जा सकती है। इसमें 2012 से 2016 तक बारामुला, राजौरी, उधमपुर, डोडा, और रामबन जिले में डीसी रह चुके अधिकारी प्रमुख रूप से शामिल हैं।
प्रेम सिंह की तीन बेटियाँ हैं। बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया है। बच्चों के लिए दूध लाने के लिए निकले प्रेम दंगाइयों का शिकार हो गए और उनकी पत्नी इंतजार करती रह गई। पत्नी के आँसू नहीं रुक रहे। उनकी समझ में नहीं आ रहा कि वो तीनों बेटियों की परवरिश कैसे करेगी।
माँ-बहन की गाली से लेकर वेश्या, सेक्स में भी हिंदू-मुस्लिम के एंगल को घुसेड़ कर फेसबुक पर एक महिला को तंग किया जाता है। जिसने ऐसा किया है, उनके नाम हैं - तनवीर और अरशद। ये दोनों इतने 'डरे हुए' हैं कि गालियों की बौछार के बाद किडनैप कर रेप की भी धमकी देते हैं।
"हम वादा करते हैं। 24 फरवरी को जब डोनाल्ड ट्रम्प भारत आएँगे तो हम उनको बताएँगे कि हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री और यहाँ की सरकार देश को बाँटने का काम कर रही है । हम उन्हें बताएँगे कि हिंदुस्तान की जनता यहाँ की सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रही है।"
हौजरानी में इस्लामिक जुलूस, जाफराबाद, चाँद बाग, खुरेजी, इंद्रलोक, निज़ामुद्दीन, शाहीन बाग में सड़के बंद। तीस हजारी, फिल्मिस्तान के आसपास लगभग 50,000 मुस्लिम घूम रहे थे। भीड़ थी, हथियार थे और घेराव था। सब तैयार था लेकिन एक गड़बड़ हो गई। एक दिन पहले कपिल मिश्रा ने मौजपुर आने की घोषणा कर दी। इसके बाद...
"अगर शहर में गोली चलती है और किसी को गोली लगती है, तो कोई केस क्यों दर्ज नहीं किया गया? FIR क्यों दर्ज नहीं की गई? क्या शहर के लोग बेवकूफ हैं? शहर के लोगों को पता नहीं चलता कि गोली चलती है और एफआईआर दर्ज नहीं होती? साहब हम भी समझते हैं कि क्या हालात हैं... अगर इस तरह होता रहा तो शहर की अवाम खामोश नहीं बैठेगी।"
"हज़ारों दंगाइयों की चपेट में आकर एक मजहबी दंगाई की भी मौत हो गई। लेकिन दंगाई उसे उठाकर अस्पताल नहीं ले गए बल्कि अपने घर ले गए। 24 घंटे तक घर में दंगाई युवक का शव रखा रहा। जैसे ही केजरीवाल सरकार ने दंगों में मारे गए लोगों को मुआवजा देने की घोषणा की, वैसे ही..."
पादरी ने खुद को रेप मामले में बचाने की इस कदर 'कोशिश' की थी कि पीड़ित नाबालिग छात्रा के पिता ने ही खुद रेपिस्ट होने की बात पुलिस के सामने कबूल कर ली थी। हालाँकि बाद में वो सुनवाई के दौरान टूट गए, जिसके बाद इस पादरी का डीएनए टेस्ट करवाया गया, जो पीड़िता के बच्चे से मैच कर गया।
आसपास के माहौल को शांत देख कर नितिन ने घर से बाहर पैर तो रखा, लेकिन दंगाइयों से अपनी जान बचा पाने में असफल रहा। उसे गोली लगी या पत्थर... किसी को कुछ नहीं पता। लेकिन जब उसे अस्पताल ले जाया गया तब वो जिंदा था, मगर सिर में चोट इतनी गहरी थी कि वो 3-4 घंटे में ही जिंदगी की जंग हार गया।