मस्जिद के केयरटेकर शौकत अली की शरीफ मोहम्मद से दुश्मनी थी और बदले की भावना से उसे फँसाने के लिए उसने ऐसा किया। वह इस बात से नाराज था कि मोहम्मद उससे ज्यादा रुपए कमा रहा है।
सुनवाई के दौरान जजों ने निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि क्या आपके पास इस बात को कोई सबूत हैं जिससे आप साबित कर सके कि राम जन्मभूमि की जमीन पर आपका कब्जा है? इसके जवाब में निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें उनके कागजात खो गए। इसके बाद जजों ने निर्मोही अखाड़ा से अन्य सबूत पेश करने को कहा।
इन लोगों से ये वादा किया गया कि इन्हें स्थायी नागरिक का दर्जा दिया जायेगा। मगर इस स्थायी नागरिकता के साथ शर्त ये थी कि आने वाले परिवार और उनकी आगे की पीढियाँ सिर्फ सर पर मल ढोने का काम ही करेंगी। और वो शर्त आज भी लागू है।
"मेरे पास भी एक माँ है, पत्नी है और बेटी है। ऐसे में मुझे पता है कि महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं। रविवार को जो दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ वह बारिश के पानी की वजह से नहीं बल्कि बिजली तार के लोहे के दरवाजे से सट जाने के कारण हुआ, जिसकी चपेट में माँ-बेटे आ गए।"
हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें हिन्दू प्रतीक चिह्नों और देवी-देवताओं का अपमान किया गया। कुछ दिनों पहले इरशाद नामक व्यक्ति द्वारा शिवलिंग पर पेशाब करने की बात सामने आई थी।
निर्मोही अखाड़ा ने खुद को पंजीकृत संस्था बताते हुए कहा कि विवादित भूमि पर उसका दावा 1934 से है, जबकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस पर अपना दावा उसके कई वर्षों बाद 1961 में किया था। कई दशक पहले मुस्लिमों ने वहाँ नमाज पढ़ना बंद कर दिया था।
ताहिर को कश्मीर में सायरा नाम की युवती से प्यार करने के कारण झांसा देकर मार दिया गया था। लड़की के परिजनों ने ताहिर के आतंकी हमले में मारे जाने की जानकारी उसके परिवारवालों को दी थी। लोगों का मानना है कि अगर 370 नहीं होता तो ताहिर की जान नहीं जाती।
इस वर्ष की शुरुआत में चार ननों का सिर्फ़ इसीलिए ट्रांसफर कर दिया गया था क्योंकि उन्होंने बलात्कार आरोपित पादरी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया था। मुलक्कल को पिछले वर्ष सितम्बर में गिरफ़्तार किया गया था। जमानत पर बाहर आने के बाद अनुयायियों ने बड़ी संख्या में इकठ्ठा होकर उसका स्वागत किया था।
याचिका में कहा गया है कि आर्टिकल 370 को हटाने के लिए सरकार ने आर्टिकल 367 में जो संशोधन किया है, वह असंवैधानिक है। सरकार ने मनमाने और असंवैधानिक ढंग से ये बदलाव किया। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से अपील है कि इस अधिसूचना को असंवैधानिक घोषित कर रद्द किया जाए।
Article 370 और कश्मीर पर केंद्र के फैसले के विरोध में मीटिंग कर रहे वामपंथी कार्यकर्ताओं से इसके समर्थन में जश्न मना रहे युवकों की भिड़ंत हो गई। इस दौरान समर्थकों ने लाठी-डंडे से हमला कर सीपीआई के सुमंत कुमार का सिर फोड़ दिया। 3 अन्य लोगों को...