भीड़ द्वारा पिटाई शुरू होते ही चोर ने माफ़ी माँगनी शुरू कर दी। वह अपना नाम राजू बताता रहा। पुलिस ने बताया कि गिरफ़्तार चोर शातिर है और वह अपने साथी का नाम नहीं बता रहा है। भीड़ ने उसे खदेड़ना शुरू किया, तब वह दुर्गा मंदिर की ओर भागा।
राजपूत करणी सेना ने कहा है कि इस घटना से क्षत्रिय समाज आहत है। ऐसा लगता है कि युवक को मोहरा बनाकर साजिशन महाराणा प्रताप की प्रतिमा के साथ तोडफोड़ की गई है। एसपी तेजस्विनी गौतम से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की गई है।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस मामले में एकतरफा कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पीड़ित पक्ष के ही तीन युवकों को हिरासत में ले लिया। ग्रामीणों ने जब थाना पहुँच कर विरोध प्रदर्शन किया और हिंदूवादी संगठनों ने आवाज़ उठाई, तब जाकर उक्त युवकों को छोड़ा गया।
ईसाई संस्था के प्रोपेगैंडा अख़बार 'क्रेउपासनम' की प्रतियाँ छात्रों के बीच बांटकर उन्हें इसे संभाल कर रखने का निर्देश दिया गया। इम्तिहान में अच्छा करने और अच्छे अंक हासिल करने के लिए अख़बार की कॉपी छात्रों से अपनी किताब में डालकर तकिए के नीचे रख कर सोने को कहा गया।
पार्किंग को लेकर हुई एक मामूली सी तक़रार झगड़े में तब्दील हो गई। उसके बाद दोनों समुदायों में जमकर पत्थरबाज़ी हुई। यह मामला यहीं नहीं थमा, उस रात, मुस्लिम भीड़ ने मंदिर में घुसकर प्रतिमाओं को तोड़ा और अल्लाहु अकबर के नारे लगाए।
भाजपा के राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से गृह मंत्री के पद से तत्काल इस्तीफा देने की माँग करते हुए कहा कि वह राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम हो गई हैं।
जयपुर के पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पहले भी सिकंदर ने 2004 में 11 साल के एक लड़के साथ कुकर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी थी। जिसके लिए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। पुलिस ने बताया कि आरोपित सिकंदर ने 2015 में जेल से रिहा होने के बाद 2017 में भट्टा बस्ती इलाके में दो नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ सहित कई अपराध किए।
बिना एसडीओ की इजाज़त के जनाक्रोश सभा का आयोजन भी किया गया और कई मुस्लिम संगठनों के लोग इसमें शामिल हुए। धीरे-धीरे लोगों की भीड़ जुलूस में बदल गई। फिर जो हुआ उसने सभी सीमाएँ पार कर दी। इस मामले में एजाज़ गद्दी, मौलाना ओबेदुल्लाह कासमी, शमशेर आलम समेत कई अन्य पर FIR दर्ज किया गया है।