डिजिटल क्रांति ने भारत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। प्रगति के बीच एक गंभीर चिंता भी जन्म ले रही है: क्या हम तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, या उसके मानसिक गुलाम बनते जा रहे हैं?
बिजनेस लीडर्स के मंच से बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बेलडांगा हिंसा की पृष्ठभूमि में 'मुस्लिम वोटबैंक' को खुश करने के लिए कट्टरपंथी भीड़ द्वारा सड़कों पर अवरोध करने का बचाव किया।
RJ सायमा ने अपराधी का मुस्लिम नाम छिपाकर 'CRPF' पर फोकस किया। यह वही सायमा है, जिसको दिल्ली ब्लास्ट के फिदायीन उमर नबी का वीडियो प्रसारित होना नामंजूर था।
मुंब्रा वार्ड में 'हिजाब वाली' सहर यूनुस शेख AIMIM के टिकट से नई पार्षद बनीं। 22 साल की सहर शेख ने जीत के बाद थैंक्यू स्पीच में कहा कि उनका मकसद पूरे मुंब्रा को 'ग्रीन' (हरा) रंग से रंगना है।
आरफा खानुम शेरवानी ने नमाज को दुनिया की सबसे 'खामोश इबादत' बताया है। अगर ऐसा है तो जुमे की नमाज के बाद दंगा कौन भड़का रहा? क्या ये सब उसी 'खामोश इबादत' का हिस्सा है?
काम नहीं मिलता तो स्वरा भास्कर की तरह ही एआर रहमान ने भी विक्टिम कार्ड खेलना सीख लिया है। वे भी 'पावर शिफ्ट' और इंडस्ट्री को 'कम्युनल' बताकर चर्चा में आना चाहते हैं।