Saturday, April 4, 2026
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पहले भारत सरकार की एडवाइजरी को किया नजरअंदाज, अब ईरान से बाहर निकलने को 9000 लोग बेताब: जानिए कैसे अपनी मनमर्जी के चलते भारतीय छात्रों ने खुद को संकट में डाला

ईरान- इजरायल युद्ध के बीच ईरान में फँसे 9000 से ज्यादा भारतीय अब निकालने की माँग कर रहे हैं। इनमें ज्यादातर मेडिकल की पढ़ाई करने गए छात्र हैं। सरकार ने युद्ध शुरू होने से पहले कई बार एडवाइजरी जारी कर ईरान छोड़ने की अपील की थी, लेकिन उस वक्त इनलोगों ने ध्यान नहीं दिया।

ईरान में चल रहे भीषण युद्ध के बीच फँसे कई भारतीय छात्र मोदी सरकार से उन्हें सुरक्षित वापस लाने की अपील कर रहे हैं। फिलहाल, 9,000 से अधिक भारतीय नागरिक ईरान की राजधानी तेहरान और क़ोम शहर में फँसे हुए हैं। इनमें अधिकतर जम्मू- कश्मीर के मेडिकल छात्र हैं। छात्रों को चिंता है कि उन्हें आर्मेनिया जाने और फिर वहाँ से दिल्ली के लिए उड़ान की व्यवस्था खुद करने को कहा जा रहा है। अगर इन छात्रों ने ईरान छोड़ने के लिए भारत के सरकार की बार-बार जारी की गई एजवाइजरी को माना होता, तो शायद यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।

कई एडवाइजरी जारी की गईं, लेकिन भारतीय छात्रों ने सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज किया।

ईरान में फंसे भारतीय छात्रों के वीडियो और भावुक अपीलें भारत में भी वैसा ही डर और दहशत पैदा कर रही हैं, जैसा कि मिडिल ईस्ट में फँसे हुए दूसरे देशों के लोगों को होता होगा। 9 मार्च को जम्मू -कश्मीर के श्रीनगर में ईरान में फँसे कई भारतीय छात्रों के अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग की।

ईरान में फँसे एक कश्मीरी भारतीय छात्र ने वीडियो संदेश में कहा, “हालात भयावह हैं। अभी तो हम ठीक हैं, लेकिन अपनी सुरक्षा को लेकर हम आश्वस्त नहीं हो सकते। जिन जगहों पर छात्रों को स्थानांतरित किया गया है, वहाँ भी हमले हो रहे हैं।”

श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले अभिभावकों में से एक ने कहा कि ईरान में भारतीय दूतावास ने छात्रों को सलाह दी है कि वे जहां हैं वहीं रहें, या वे आर्मेनिया-दिल्ली की फ्लाइट टिकट पहले से बुक करने के बाद अपने रिस्क पर आर्मेनिया के लिए ईरान से निकल सकते हैं।

ऐसा दिखाया जा रहा है मानो मोदी सरकार ने संघर्षग्रस्त देशों में फँसे अपने नागरिकों को अमेरिका की तरह अकेला छोड़ दिया हो। यहाँ तक ​​कि जिन छात्रों को भारतीय दूतावास ने ईरान में युद्धग्रस्त इलाके से भारतीय करदाताओं के पैसे से निकाला था, वे भी भारत सरकार से उन्हें तत्काल भारत वापस भेजने की अपील कर रहे हैं, जबकि उन्हें पता है कि हवाई क्षेत्र बंद है।

यह नहीं भूलना चाहिए कि ईरान में कितने भारतीय छात्र भारत में सुरक्षा को लेकर उठ रही चिंताओं को खारिज करते हुए वीडियो बना रहे थे और एडवाइजरी को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। इनकी आँख तब तक नहीं खुली, जब तक कि अमेरिकी और इजरायली मिसाइलो की आवाज उनके कानों तक नहीं पहुंची।

छात्रों की वापसी के लिए हो रहे विरोध प्रदर्शन , और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की जरूरत तब नहीं पड़ती, जब छात्रों ने 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले से कुछ सप्ताह पहले जारी किए गए भारतीय सरकार के परामर्श और मौजूदा तनाव की गंभीरता को समझा होता।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने 14 जनवरी 2026 को पहली एडवाइजरी जारी की थी। उस वक्त ईरानी इस्लामी शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और इसने हिंसक रूप ले लिया था। इसको देखते हुए भारतीय नागरिकों से ईरान की सभी गैर-जरूरी यात्राओं को स्थगित करने का आग्रह किया गया था।

इसके बाद 14 फरवरी को एक और कड़ी चेतावनी जारी की गई। इसमें छात्रों, तीर्थयात्रियों और व्यापारियों सहित भारतीय नागरिकों को स्पष्ट रूप से सलाह दी गई कि वे जैसे भी हो, ईरान छोड़ दें। भारतीय दूतावास ने ईरान में फँसे भारतीयों की सहायता के लिए 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन भी शुरू की।

इसके नौ दिन बाद 23 फरवरी को, विदेश मंत्रालय ने एक और एडवाइजरी जारी की। इसमें ईरान में फँसे भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द देश छोड़ने के लिए कहा गया था। ईरान में फँसे लोगों के लिए विदेश मंत्रालय के पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया।

विदेश मंत्रालय ने 23 फरवरी को कहा, “भारत सरकार द्वारा 5 जनवरी 2026 को जारी की गई सलाह के क्रम में और ईरान में उत्पन्न हो रही स्थिति को देखते हुए, ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों (छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों) को वाणिज्यिक उड़ानों सहित उपलब्ध परिवहन साधनों का उपयोग करके ईरान छोड़ने की सलाह दी जाती है। 14 जनवरी 2026 की सलाह को दोहराते हुए, सभी भारतीय नागरिकों और व्यक्तिगत पहचानकर्ताओं को उचित सावधानी बरतनी चाहिए, विरोध प्रदर्शनों या रैलियों वाले क्षेत्रों से बचना चाहिए, ईरान में भारतीय दूतावास के संपर्क में रहना चाहिए और किसी भी घटनाक्रम के लिए स्थानीय मीडिया पर नजर रखनी चाहिए।”

ये सुझाव भय फैलाने के लिए नहीं बल्कि सावधान करने के लिए थी। विदेश मंत्रालय ने बढ़ते तनावों के आकलन के आधार पर कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट और बार-बार आह्वान किया। विदेश मंत्रालय को आशंका थी कि ईरान- इजरायल यूएस युद्ध कभी भी हो सकता है।

चेतावनियों के बावजूद, भारतीय छात्रों ने वहीं रहने का फैसला किया। दरअसल, विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि युद्ध छिड़ने के बाद भी कई छात्रों ने मदद की पेशकश को ठुकरा दिया। उस वक्त विदेश मंत्रालय उनकी मदद कर उन्हें निकालना चाहता था।

विदेश मंत्रालय ने 3 मार्च को एक नई एडवाइजरी जारी की। इसमें कहा गया, “मौजूदा स्थिति को देखते हुए, ईरान में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को अत्यधिक सावधानी बरतने, अनावश्यक आवाजाही से बचने और यथासंभव घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। भारतीय नागरिक समाचारों पर नजर रखें, स्थिति की जानकारी रखें और भारतीय दूतावास से आगे के निर्देशों की प्रतीक्षा करें।”

तेहरान में बढ़ते खतरे को देखते हुए, भारतीय दूतावास ने तेहरान में मौजूद अधिकांश भारतीय छात्रों को तेहरान से बाहर सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया है। दूतावास ने उनके परिवहन, भोजन और आवास की व्यवस्था की है। भारतीय दूतावास ने ईरान को बताया कि दूतावास के प्रस्ताव को अस्वीकार करने वाले कुछ ही छात्र तेहरान में रह गए हैं। दूतावास ने यह भी बताया कि कुछ छात्र आर्मेनिया के रास्ते ईरान से चले गए, जबकि कई ने ईरान में ही रहने का विकल्प चुना है।

हवाई क्षेत्र बंद है, सीमाएं असुरक्षित हैं। वास्तव में ईरान में कोई भी स्थान अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों से सुरक्षित नहीं है। अब अगर परीक्षा के दबाव, डिग्री रद्द होने के डर, लापरवाही या किसी दूसरे कारण से ईरान में फँसे छात्रों के साथ कुछ गड़बड़ होती है, तो इसका दोष भारतीय सरकार पर आएगा। जब तक ईरान का आसमान इजरायली मिसाइलों से घिरा है, तब तक सरकार चार्टर्ड विमान भेजकर भारतीयों को वापस नहीं ला सकती।

स्थिति की गंभीरता को जानबूझकर नजरअंदाज करना और उड़ानें रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने पर अधिकार के साथ बाहर निकालने की अपीलें यह दर्शाती हैं कि अधिकांश छात्रों ने आधिकारिक चेतावनियों के बजाय अपनी व्यक्तिगत समय-सीमा और आराम को प्राथमिकता दी। उन्होंने पहले रुकने का जोखिम उठाया, लेकिन अब वे हर हाल में निकलना चाहते हैं। यह पूरा मामला स्व-निर्मित संकट के लिए अधिकारियों को दोषी ठहराने का एक उदाहरण है।

संकटग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को निकालने में मोदी सरकार के सराहनीय रिकॉर्ड रहे हैं। ईरान में फँसे हर भारतीय को वापस लाने का अभियान जारी रहेगा, हालाँकि ईरान पर लगातार हमलों और हवाई और समुद्री मार्गों के बंद होने के कारण स्थिति जटिल बनी हुई है।

(मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी में लिखा गया है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)

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Shraddha Pandey
Shraddha Pandey
Shraddha Pandey is a Senior Sub-Editor at OpIndia, where she has been sharpening her edge on truth and narrative. With three years in experience in journalism, she is passionate about Hindu rights, Indian politics, geopolitics and India’s rise. When not dissecting and debunking propaganda, books, movies, music and cricket interest her. Email: [email protected]

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