विचार

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NDTV पत्रकार की दलील: स्कूली छात्रों को CAA के बारे में बताना राजनीति है, क्योंकि इसे बड़े लोग नहीं समझ सके

नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन को लेकर प्रोग्राम किया गया और उसमें स्कूल के छात्रों को ले जाया गया तो NDTV के पत्रकार सोहित राकेश मिश्रा ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूल में छात्रों को नागरिकता कानून के बारे में बताना राजनीति है, क्योंकि इसे अभी तक बड़े लोग नहीं समझ सके हैं।
राजदीप सरदेसाई, स्टिंग ऑपरेशन

…जब 14 साल पहले राजदीप सरदेसाई ने फर्जी स्टिंग ऑपरेशन से एक डॉक्टर की जिंदगी कर दी थी बर्बाद

बात 2006 की है। नए-नए खुले IBN7 और CNN-IBN को किसी सनसनीखेज स्टोरी की तलाश थी। राजदीप उसके चीफ एडिटर थे। TRP के लिए इन्होंने रिपोर्टर जमशेद खान से एक फर्जी स्टिंग करवाया डॉ अग्रवाल का। खबर यह बनाई कि डॉक्टर भीख माँगने वाले गिरोह के लिए बच्चों का हाथ-पैर काटते हैं। जाँच में ऐसा कुछ नहीं निकला लेकिन...
इंडिया टुडे, राहुल कँवल

फ़र्ज़ी स्टिंग वाली ‘इंडिया टुडे’ के झूठ का वजन भारी हो गया है, सवालों से कब तक भागते फिरेंगे कँवल?

साबित हो चुका है कि अक्षत ABVP का कार्यकर्ता नहीं। 'इंडिया टुडे' की पत्रकार वामपंथियों के साथ कानाफूसी और सेटिंग करते देखी गईं। कँवल की थेथरई का आलम ये है कि वो सीधा कह रहे कि वो सवालों के जवाब नहीं देंगे। फ़र्ज़ी स्टिंग को 'पाथ ब्रेकिंग' बताने के पीछे का सच।

‘The Wire’ की पत्रकार आरफा खानम को लोगों ने समझाया जर्मनी-भारत का फर्क, कहा- हिटलर के विरोध के बाद…

“1930 के नाजी जर्मनी और वर्तमान समय के भारत के बीच क्या अंतर है?” 'The Wire' की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने ट्विटर पर पूछा ये सवाल तो सोशल मीडिया यूजर ने उन्हें ठीक से समझाया, यहाँ पढ़ें कुछ जवाब....
इंडिया टुडे पत्रकार तनुश्री पांडेय

रिपब्लिक के पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की कर चुकी है वामपंथियों को कोचिंग देने वाली ‘इंडिया टुडे’ की तनुश्री

'इंडिया टुडे' की पत्रकार तनुश्री पांडेय वामपंथी छात्रों के साथ खुसुर-पुसुर करते हुए दिखी थीं। उन्होंने छात्रों को सिखाया था कि उन्हें कैमरे के सामने क्या बोलना है? इसी तनुश्री ने नवंबर 2019 में वामपंथियों के साथ मिल कर रिपब्लिक, ज़ी न्यूज़ और सुदर्शन चैनल के पत्रकारों के साथ बदतमीजी की थी।
फड़-फड़ फड़ाता प्रोपेगेंडा

प्रोपेगेंडा का Outlook: जब मोदी घृणा से कीबोर्ड तड़-तड़ाए तो पन्ने फड़-फड़ फड़फड़ाए

इस प्रोपेगेंडा के असर क्या होंगे यह गर्भ में नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोग इनके प्रोपेगेंडा का गुर्दा छील रहे हैं। छीलते रहेंगे। छीलने की रफ्तार जब चरम पर पहुँचेगी तो धुक-धुक धुका रहे इन संस्थानों की फड़-फड़ फड़ाहट खुद-ब-खुद दफन हो जाएगी।
इंडिया टुडे

JNU छात्रसंघ उपाध्यक्ष के साथ कानाफूसी कर के क्या सेटिंग कर रही है इंडिया टुडे की पत्रकार, वीडियो वायरल

इस वीडियो में कुछ बातें जो इंडिया टुडे की रिपोर्टर को कहते सुनी जा सकती हैं, उनमें सर्वर और चेहरे पहचाने जाने के बारे में बातें हैं। युवक इंडिया टुडे की रिपोर्टर से कह रहा है कि CCTV चल नहीं रहा था तो चेहरा पहचान नहीं पाए लेकिन वीसी ने तो कहा सर्वर सेम है, और मेल जा रहे थे।
JNU

इंडिया टुडे का एक और झूठ: ‘जेम्स बॉन्ड पत्रकार’ ने लेफ्टिस्ट गुंडों को बचाने के लिए दिया JNU-सर्वर पर ‘ज्ञान’

तनुश्री पांडेय, जो कि इंडिया टुडे समूह की ही पत्रकार हैं, एक ट्वीट के साथ दावा करती हैं कि उन्होंने सूचना एवं संचार के सर्वर से भेजे गए ई-मेल्स को निकाल लिया है। ज्ञात हो कि JNU प्रशासन पहले ही बता चुका है कि यह सर्वर 4 जनवरी को लेफ्टिस्ट गुंडों द्वारा तोड़ दिया गया था।
राहुल कँवल, जेएनयू, इंडिया टुडे

वामपंथियों की फालतू नारेबाजी, और बर्बाद होता JNU: राहुल कँवल पढ़ें ‘इंडिया टुडे’ की 40 साल पुरानी रिपोर्ट

1981 का एक ऐसा समय था, जब जेएनयू को 46 दिनों के लिए बंद किया गया था। आज फ़र्ज़ी 'स्टिंग ऑपरेशन' कर के वामपंथियों को बचाने वाले 'इंडिया टुडे' ने तब JNU को वामपंथी अराजकता का गढ़ बताया था, जहाँ छात्र फालतू वाद-विवाद में लगे रहते हैं। पत्रिका ने कहा था कि जेएनयू केवल रुपए डकारता है।
राजदीप सरदेसाई

मैंने झूठी खबर चलाई, मुझे माफ़ कर दो: पढ़िए, राजदीप सरदेसाई का माफीनामा

मामला शोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर से जुड़ा है। राजदीप ने एक IPS पर सनसनीखेज आरोप लगाए थे। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई। प्रेस की स्वतंत्रता की दुहाई दी। राहत नहीं मिली तो माफी माँग जान बचाई।
इंडिया टुडे

हमारे कैमरे की सेटिंग ख़राब थी: इंडिया टुडे की JNU हिंसा के फर्जी स्टिंग पर सफाई

"#JNU कवरेज से जुड़ी एक क्लिप में दिख रही पुरानी तारीख के संबंध में स्पष्ट करना चाहते हैं कि कैमरे की सेटिंग्स अपडेटेड नहीं थीं। इससे जो ग़लतफहमी पैदा हुई है, उसके लिए हमें खेद है।"
मोहम्मद अली जिन्ना

‘जिन्ना वाली आज़ादी’ बेटी ने भी नहीं की कबूल, अपने ही Pak में बुरी मौत मरा ‘कायदे आजम’

जिस महिला के अब्बा 'बाबा-ए-क़ौम' हो वह अपने परिवार के साथ पाकिस्तान नहीं जाती। क्यों? जानने के लिए 'जिन्ना की आज़ादी' का नारा लगाने वालों को जानना चाहिए कि अपने ही बनाए पाकिस्तान में 'कायदे आजम' कौन सी मौत मरे थे।

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