विचार

जो मुल्ले की सुनने के आदी, क्या वे मी लॉर्ड की सुनेंगे… सुप्रीम कोर्ट ने बाल विवाह पर जो खींची नई लकीरें, क्या उससे...

बाल विवाह या छोटी उम्र में निकाह को को पर्सनल लॉ का हवाला देकर जायज ठहराना गलत है। इस रवायत से बच्चा शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों से कमजोर होता है।

भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक उत्थान के लिए संघर्ष के 100 वर्ष: RSS की इस गौरवमयी यात्रा में संघ ने देश के हर...

RSS की यात्रा केवल संगठनात्मक नहीं है, बल्कि यह एक विचारधारा की यात्रा है, जो समाज के हर वर्ग को एकजुट करे का प्रयास कर रहा है।

सुशांत-दिशा सालियान पर जो रहे चुप, वे बाबा सिद्दीकी पर बेचैन क्यों… जिस हत्या पर मची राजनीतिक रार, उसकी विद्रूप सच्चाइयों को एक नेता...

बाबा सिद्दीकी की मौत से जुड़े रहस्यों का पर्दाफाश जरूरी है, पर उस राजनीति का क्या जिसने सामाजिक न्याय की धारा को कुंद किया। जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आवाज दी।

दिखने लगा जनसांख्यिकी बदलाव और बांग्लादेशी घुसपैठ का असर… झारखंड में AIMIM लड़ेगी 35 सीटों पर विधानसभा चुनाव, समझें क्या होंगे इसके परिणाम

झारखंड में मुस्लिम बहुल बूथों की संख्या में 100 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है, जिससे राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ने की संभावना है।

बिहार में ईसाई धर्मांतरण की ग्राउंड रिपोर्ट, YouTube ने डिलीट किया वीडियो: क्या फेसबुक भी उड़ा देगा, बिग टेक कंपनियों की वामपंथी पॉलिसी कब...

पहली बार नहीं है कि किसी मामले को लेकर बड़ी टेक कंपनियों के वामपंथी रवैये पर सवाल खड़ा किया जा रहा हो। इनका प्रभाव फेसबुक पोस्ट से लेकर इंस्टा की रीच तक पर आप देख सकते हैं।

मैरिटल रेप: ये कौन तय करेगा कि कब बलात्कार हुआ? ‘वैवाहिक संस्था’ की हत्या का कहीं कारण ना बन जाए यह कानून

मैरिटल रेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। अगर इसे आपराधिक घोषित कर दिया जाता है तो इससे वैवाहिक संस्था को नुकसान पहुँचेगा।

इतना तो गिरगिट भी नहीं बदलता रंग, जितने विनेश फोगाट ने बदल लिए

विनेश फोगाट का बयान सुनने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि राजनीति में आने के बाद विनेश कितनी सच्ची और कितनी झूठी हो गई हैं।

मुबारक हो बिहार! ‘कमाई’ का सीजन आ गया है…

दुर्भाग्य देखिए कि जो बिहार अपनी राजनीतिक चेतना पर इठलाता है, उसके लिए बाढ़ कभी भी राजनीतिक विमर्श का मुद्दा नहीं रहा। न है। न होने की उम्मीद है।

जम्मू-कश्मीर से लखनऊ तक मातम मना रहे भारत के धर्मांतरित मुस्लिम, हिजबुल्लाह के आतंकी सरगना नसरल्लाह से इनका रिश्ता क्या?

यदि 'उम्माह' से इसका वास्ता होता तो इस्लामिक वर्ल्ड में नसरल्लाह की मौत पर जश्न नहीं मनता। अरब देश हों या सीरिया… सुन्नी खुलकर जश्न मना रहे।

जातिगत आरक्षण: जरूरतमंदों को लाभ पहुँचाना उद्देश्य या फिर राजनीतिक हथियार? विभाजनकारी एजेंडे का शिकार बनने से बचना जरूरी

हमें सोचना होगा कि जातिगत आरक्षण के जरिए क्या हम वास्तव में जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं या फिर हम एक नई जातिगत विभाजन की नींव रख रहे हैं?

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