राजनैतिक मुद्दे

नए IT कानून को मोटा पोथा मत बनाइए: आज ट्विटर उठा रहा फायदा, कल कोई और उठाएगा

न तो भारत के अधिकांश लोग 700 पन्ने का प्रिंट निकलवाने के आर्थिक खर्च में सक्षम होंगे, न ही उतना पढ़ कर विचार रखने के लिए कोई समय निकलेगा।

शुक्र है PM मोदी हैं! पब्लिक की होगी फ्री वैक्सीनेशन, प्रोपेगेंडा के नए टीके की तलाश में विपक्ष

केंद्र सरकार के इस निर्णय को लेकर जिस तरह से क्रेडिट लेने और देने की होड़ मची हुई है, वह दर्शाता है कि ऐसे निर्णयों को या ऐसी घोषणा का विपक्ष या मोदी विरोधियों के लिए क्या महत्व है।

आज मार रहे हो… कल जनता तुम्हें ‘मारेगी’ (चुनावी मैदान में): पश्चिम बंगाल पर हर चुप्पी का बदला इसी लोकतंत्र में

ऐसा क्यों है कि केरल या पश्चिम बंगाल में जब सरकार द्वारा सह दिए जाने वाली हिंसा की बात होती है तो लोकतंत्र के हिस्सेदारों को साँप सूँघ जाता है?

मैं चाहे जो लिखूँ-बोलूँ, मेरी मर्जी: बालसुलभ तर्कों से लैस इतिहास्य-कार, आरफा खानुम महज झाँकी है

औरंगज़ेब ने भले दर्जनों मंदिर तुड़वाए, लेकिन इतिहासकार चाहे तो अपने इतिहास की कार चढ़ा उसे कुचल दे और साबित कर दे कि वह तो बड़ा शालीन शासक था।

2500 ‘हिंदू’ गाँवों का नाम बदल इस्लामीकरण: ‘दुर्गा’ इंदिरा थीं तब PM, CM के लिए हिंदू थे ‘भारत सरकार के मुखबिर’

शेख और इंदिरा गाँधी के बीच 1975 में एक समझौता हुआ। शेख कॉन्ग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री बने... जबकि उनकी पार्टी का एक भी विधायक नहीं था।

हिंदू-मुस्लिम एंगल देकर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट रोकने की साजिश: विधायक, कलाकर, मीडिया… सब इस खेल में शामिल

"मौजूदा संसद भवन और राजपथ दुनिया की इस्लाम प्रभावित सबसे महत्वपूर्ण निशानी... मोदी भारत की सभी इस्लामिक इमारतों और 20 करोड़ मुसलमानों को नेस्तनाबूद करने से कम कुछ भी नहीं चाहते।"

भारत के सदानंद मास्टर हों या चीन का थियानमेन चौक: वामपंथी छल-बल ने मानवता को दिए हैं बेहिसाब घाव

4 जून 1989 वामपंथी पाखंड का एक नमूना है। उसका इतिहास से लेकर वर्तमान तक, हिंसा और रक्त से ही सना है।

‘हिंदुत्व ठगों’ को धमकी, भगवा व स्वस्तिक का अपमान: जो राकेश पंडिता के हत्यारों की भाषा, लेफ्ट और विपक्ष की वही है बोली

हिंदुत्व को गाली, भगवा ध्वज व स्वस्तिक का अपमान और 'फासिस्ट' शब्द का प्रयोग - आतंकियों की भाषा वही है, जिसका इस्तेमाल भारत का लेफ्ट और कुछ विपक्षी नेता पीएम मोदी को निशाना बनाने के लिए करते हैं।

मुस्लिमों के बीच काला लिबास, हिन्दुओं के बीच चंदन लगाना: प्रियंका के बहरूपिया पर विश्वास कर कौन देगा वोट?

उलेमाओं के साथ मीटिंग करके कॉन्ग्रेस अधिक से अधिक किसी संभावित गठबंधन के लिए बार्गेनिंग पावर इकट्ठा करने की कोशिश भले कर सकती है पर...

रक्षा के आत्मनिर्भर मोर्चे पर ‘108 कदम’ और चली मोदी सरकार, UPA जमाने में गोला-बारूद का भी था टोटा

देश दो वर्षों से महामारी की चपेट में है और यह सोचकर ही सिहरन हो जाती है कि अगर गलती से कॉन्ग्रेस और उसके लगुए-भगुए शासन में रहते तो क्या होता?

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें