राजनैतिक मुद्दे

चढ़ता प्रोपेगेंडा, ढलता राजनीतिक आचरण: दिल्ली के असल सवालों को मुँह चिढ़ाती केजरीवाल की पैंतरेबाजी

ऐसे दर्जनों पैंतरे हैं जिन पर केजरीवाल से प्रश्न नहीं किए गए हैं और यही बात उनसे बार-बार ऐसे पैंतरे करवाती है।

मोदी से घृणा के लिए वे क्या कम हैं जो आप भी उसी जाल में उलझ रहे: नैरेटिव निर्माण की वामपंथी चाल को समझिए

सच यही है कि कपटी कम्युनिस्टों ने हमेशा इस देश को बाँटने का काम किया है। तोड़ने का काम किया है। झूठ को, कोरे-सफेद झूठ को स्थापित किया है।

टिकरी बॉर्डर पर गैंगरेप: ‘क्रांति’ की जगह किसान आंदोलन से ‘अपराध’ की डिलिवरी, आगे क्या…

कथित आंदोलन अब किस अपराध की खोज में निकलेगा, इसका उत्तर शायद टिकरी बॉर्डर पर रुके समय के पास है।

गैर बीजेपी मुख्यमंत्रियों की ‘हरकतों’ में मोदी विरोध का ‘हीरो’ तलाशता इकोसिस्टम: संघीय ढाँचे में राजनीतिक परंपराओं की ये कैसी नींव?

ममता बनर्जी हों या हेमंत सोरेन या फिर अरविंद केजरीवाल... प्रश्न उठता है कि भारत के संघीय ढाँचे में कैसी राजनीतिक परंपराओं की नींव रखी जा रही है?

हिंसा वही जो पिया मन भाए?

"जो है उसमें से अपने मतलब का सीन ही देखना है" से चलकर "कुछ नहीं दिख रहा है" - यही है वाम-तंत्री रिपोर्टिंग का क्रमिक विकास।

बांग्ला-बंगाली देश से ऊपर, बाकी सब बेकार: ममता की लगाई ‘उप-राष्ट्रवादी खेला’ से जलेंगे और राज्य भी

सफलता के इस शोर में एक महत्वपूर्ण कारण पर चर्चा शायद न हो और वह कारण है बांग्ला उप राष्ट्रवाद। अब इसे प्रशांत किशोर द्वारा बनाई गई रणनीति का हिस्सा माने या फिर पहले से चली आ रही एक सोच!

इन नतीजों के आगे जहाँ और भी हैं… आखिर भाजपा के पास बंगाल में खोने को था ही क्या?

यह टीवी मीडिया और छद्म बुद्धिजीवियों की बनाई दुनिया थी, जिसने भाजपा का सब कुछ बंगाल में दाँव पर बता दिया। भाजपा के पास खोने को था ही क्या?

जिस EVM को जी भर कोसा, आज उससे निकली जीत का जश्न मना रही TMC: बंगाल का वो चुनाव जिसमें CRPF को भी नहीं...

ममता बनर्जी ने कोरोना को बहाना बताया था। बार-बार EVM पर सवाल उठाए थे। आज TMC जीत का जश्न मना रही।

‘बैलेंस’ वाली पॉलिटिक्स से बंगाल में पिछड़ी बीजेपी? असम से सीख सकती है- क्या करें, क्या न करें

असम में अल्पसंख्यक वोट पश्चिम बंगाल से ज्यादा है। फिर भी भाजपा विजय की ओर अग्रसर है, लेकिन बंगाल में वह संघर्ष कर रही है। क्यों?

5 राज्यों के नतीजे अलग-अलग, पर एक सवाल वही- कॉन्ग्रेस का क्या होगा, राहुल गाँधी देंगे और कितने घाव

राज्य बदले। नतीजे बदले। एक चीज जो नहीं बदली, वह है राहुल गाँधी का 'प्रदर्शन'। इसने कॉन्ग्रेस का संकट और गहरा कर दिया है।

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