राजनैतिक मुद्दे

केजरीवाल के ‘रोवन’ में राहुल गॉंधी की आहुति: चीनी वायरस के खिलाफ भारत की लड़ाई को चूना लगाती राजनीति

AAP सरकार विज्ञापन के अलावा जिस बात पर सबसे अधिक भरोसा करती है, वह है 'रोवन'। लम्बे समय तक प्रैक्टिस कर इसे अपना दर्शन बना लिया है।

चीनी वायरस पर मोदी घृणा से सना लेफ्ट-लिबरल प्रोपेगेंडा: कोरोना से भी घातक है ये राजनीति

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर जैसे-जैसे तेज होती गई इसके समानांतर एक और लहर भी उफान मारने लगी। यह लहर संक्रमण से भी घातक है।

लॉकडाउन पर Confuse राहुल गाँधी: पहले जिनके लिए दी PM मोदी को ‘गाली’ अब उन्हीं पर बजा रहे ‘ताली’

ऐसा क्या है जिसने कॉन्ग्रेस को राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वकालत करने के लिए मजबूर कर दिया है? किस कारण कॉन्ग्रेस और उसके युवराज राहुल गाँधी लगातार मोदी सरकार पर राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन लगाने का दबाव बना रहे हैं?

तब मरीचझापी नरसंहार, अब जान बचाते हजारों बंगालियों का पलायन: सिर्फ वोटर बदले हैं, बंगाल की राजनीतिक वही है

आज जो बंगाल में हो रहा, वो बंगाल में पहले वामपंथियों और फिर टीएमसी की शासन में फैलाई गई वैमनस्यता और घृणा की पुरानी राजनीति की परिणति है।

…क्यूँकि ये बंगाल है: पहले लेफ्ट-अब TMC, वही किया जिसका सावरकर को दशकों पहले हो गया था एहसास

आज जो बंगाल में हो रहा है, वह बंगाल के लिए नया नहीं है। पर बीजेपी के लिए नया है। हिंसा के रास्ते वर्चस्व कायम की राजनीति का अंत कब?

मुस्लिम तुष्टिकरण यह भी: एक महिला मार दी गई और CM ‘आतंकियों’ को ‘उग्रवादी’ तक नहीं कह सकता

इसी पोलिटिकल करेक्टनेस में मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तानी चैनल पर मोदी सरकार के बारे में कहा कि उन्हें हटाइए, हमें ले आइए।

कोरोना काल में पत्र लेखन प्रधान राजनीतिक चालें और विरोध की संस्कृति

जबसे तीसरे चरण के टीकाकरण की घोषणा हुई है, कोविड के विरुद्ध देश की लड़ाई में राजनीतिक दखल ने एक अलग ही रूप ले लिया है।

चढ़ता प्रोपेगेंडा, ढलता राजनीतिक आचरण: दिल्ली के असल सवालों को मुँह चिढ़ाती केजरीवाल की पैंतरेबाजी

ऐसे दर्जनों पैंतरे हैं जिन पर केजरीवाल से प्रश्न नहीं किए गए हैं और यही बात उनसे बार-बार ऐसे पैंतरे करवाती है।

मोदी से घृणा के लिए वे क्या कम हैं जो आप भी उसी जाल में उलझ रहे: नैरेटिव निर्माण की वामपंथी चाल को समझिए

सच यही है कि कपटी कम्युनिस्टों ने हमेशा इस देश को बाँटने का काम किया है। तोड़ने का काम किया है। झूठ को, कोरे-सफेद झूठ को स्थापित किया है।

टिकरी बॉर्डर पर गैंगरेप: ‘क्रांति’ की जगह किसान आंदोलन से ‘अपराध’ की डिलिवरी, आगे क्या…

कथित आंदोलन अब किस अपराध की खोज में निकलेगा, इसका उत्तर शायद टिकरी बॉर्डर पर रुके समय के पास है।

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