जुलाई में 50 लाख सैलरी वाले लोगों की नौकरी जाने का अंदाजा लगाया गया है, जो कि पूरे कोविड आपदा के दौरान दो करोड़ तक कही जा रही है। ये आँकड़े अच्छे नहीं हैं। न ही इसे किसी भी तर्क से सही कहा जा सकता है।
डीके शिवकुमार ने अपने बयान में कहा था कि इस बात पर चर्चा नहीं करना चाहता हूँ कि क्यों हाल ही में हिंसा की घटना हुई। लेकिन आप सभी भाजपा के मंत्रियों से प्रभावित होकर जाँच कर रहे हैं।
इस वर्ष भी 18 अगस्त की तारीख आई लेकिन इस बात पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो कि PM मोदी ने नेताजी की इस तथाकथित पुण्यतिथि पर किसी भी प्रकार का कोई संदेश जारी नहीं किया।
पिछले 6 वर्षों से भारत के प्रधानमंत्री ने अपने प्रयासों को केवल सार्वजनिक भाषण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि भारत के नागरिकों से किए गए हर वादा, हर आशा को पूरा करने के लिए अपनी 6 साल की यात्रा के प्रत्येक दिन को बहुत लगन के साथ उपयोग किया है।