Wednesday, November 25, 2020
Home विचार राजनैतिक मुद्दे कोरोना के बीच बेरोजगारी पर सरकारों को घेरना कितना उचित?

कोरोना के बीच बेरोजगारी पर सरकारों को घेरना कितना उचित?

सरकार वैसी विपदा का स्कोप ले कर नहीं चल सकती जो लोकल की जगह ग्लोबल है, क्योंकि वर्तमान जनसंख्या के किसी भी व्यक्ति ने ऐसी आपदा अपने जीवनकाल में ही नहीं देखी। न ही, हम एक विकसित राष्ट्र हैं कि बफर से पैसे निकाल कर बाँट दें या जो बेरोजगार हैं उनको भत्ता देने लगें।

जुलाई के CMIE आँकड़ों के अनुसार देश में बेरोजगारी की दर 7.43% है, जो कि जून में 10.99% थी। इसी प्राइवेट थिंक टैंक के अनुसार जुलाई में 50 लाख सैलरी वाले लोगों की नौकरी जाने का अंदाजा लगाया गया है, जो कि पूरे कोविड (कोरोना) आपदा के दौरान दो करोड़ तक कही जा रही है। ये आँकड़े अच्छे नहीं हैं। न ही इसे किसी भी तर्क से सही कहा जा सकता है।

इसके साथ ही दूसरा आँकड़ा यह भी है कि अव्यवस्थित सेक्टर में नौकरियाँ बढ़ने से नौकरी वाले लोगों की संख्या में सुधार तो है, लेकिन यह सुधार सही नहीं है। वह इसलिए कि सैलरी वाले लोगों की नौकरी के जाने का मतलब है कि जो ज्यादा पैसा कमाने और खर्च करने वाले लोग हैं, उनकी संख्या लगातार घट रही है।

अब समस्या यह है कि कई लोग सरकारों को कोस रहे हैं कि सरकार तैयार नहीं है, इस विकट स्थिति का समाधान नहीं है उसके पास। सोशल मीडिया पर यह भी लिखा जा रहा है कि अगर सरकार उपलब्धियों का श्रेय लेती है तो उन्हें बेरोजगारी पर भी गाली सुनने को तैयार होना चाहिए। ठीक है, आप गाली दीजिए लेकिन, आप सुशिक्षित हैं, ये तो बताइए कि समाधान क्या है? क्या आपके पास एक सुझाव है इसको लेकर? या फिर आप बस लिखे जा रहे हैं कि सरकारों को तैयार रहना चाहिए?

आप आर्थिक मंदी का उदाहरण देने लगते हैं, कहने लगते हैं कि फिर तो सरकार को गंदे शहरों के लिए भी नहीं कोसना चाहिए, बाढ़ आने पर भी हमें ये कहना चाहिए कि पानी तेज था, बाँध बह गया…

लेकिन क्या कोरोना की समस्या किसी शहर के गंदा होने, अर्थव्यवस्था की मंदी (जबकि सारे व्यापार-संस्थान आदि चालू रहते हैं) या फिर बाढ़ जैसी आपदा की तरह है क्या? क्या हम इन उदाहरणों के आधार पर सरकार को इस आपदा के लिए या इस आपदाजनित बेरोजगारी के लिए जिम्मेदार ठहरा सकते हैं?

संक्षेप में देखा जाए कि ‘क्या सरकार की तैयारी नहीं थी’, तो हम पाते हैं कि सरकार ने हर वो कार्य किया जो वो कर सकती थी। फरवरी से एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग से ले कर, मार्च के लॉकडाउन तक, और फिर बिगड़ती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए पैकेज की घोषणा तक, सरकार ने लगातार कदम उठाए। लॉकडाउन हुआ तो सब-कुछ थम गया, व्यापारों और प्रतिष्ठानों के पैसे खत्म होने लगे, लोग कहने लगे कि ढील दी जाए। अनलॉक शुरू हुआ तो फिर संक्रमण के मामले बढ़ने लगे। ये आपदा दोधारी तलवार की तरह राष्ट्रों पर टूट पड़ी। भारत जैसे विकासशील राष्ट्र के लिए, जिसकी अर्थव्यवस्था सुधार की ओर जा रही थी, ये रीढ़ टूटने जैसी साबित हुई है। यहाँ समस्या कई हैं, समाधान बिलकुल नगण्य।

मंदी के लिए सरकारें तैयार रहती हैं, क्योंकि वो एक अपेक्षित स्थिति है। ऐसा कई बार होता है। आपदा भी जब आती है तो वो देश के किसी छोटे हिस्से को प्रभावित करती हैं। बाढ़ के लिए सरकार जिम्मेदार होती है, क्योंकि सरकार को पता होता है कि बाढ़ कब आएगी, कितना डैमेज करेगी, सरकार उसकी योजना पहले साल नहीं तो पाँचवें साल तक तो बना ले।

देश की गंदगी दूर करने के लिए नगरनिगम होते हैं, वही उनका काम है। उसी के लिए पैसे दिए जाते हैं हमारे टैक्स के।

उपलब्धियों का श्रेय लेंगे और पॉलिसी लेवल की असफलता का भी। लेकिन एक ऐसी आपदा जिसने दो तरफ से नुकसान किया है, उसके लिए आप चाह बहुत कुछ सकते हैं, कर नहीं सकते।

कोरोना को ले कर तीन मुख्य समस्याएँ हैं;

  • अर्थव्यवस्था मंद नहीं, लगभग ठप्प है और वैश्विक परिदृश्य में भी कोई सुधार नहीं। न ही आपका बफर उस तरह का है कि आप दो ट्रिलियन का पैकेज दे कर बेरोजगारी भत्ता दे दें।
  • आर्थिक तौर पर देश में सब कुछ बंद होने के कारण सरकार के पास पैसा आने की जगह, पैकेज देने में ही जा रहा है। ऐसे में करेंसी छाप कर लोगों को पैसा देने का मतलब है कि चार साल बाद आप मंदी और महँगाई के दैत्य को निमंत्रण दे रहे हैं।
  • बेरोजगारी बढ़ेगी, क्योंकि ऐसे समय में दुर्भाग्य से वही सत्य है। आपकी नौकरी गई, वो एक सत्य है। लेकिन आपको सरकार वो सैलरी अब दे, या आपको रोजगार दे दे, ये मूर्खतापूर्ण दुराग्रह है। सरकारी लोगों की नौकरी सुरक्षित है। वहाँ भी कई सेक्टर में काम पहले जैसा नहीं हो रहा, लेकिन उन्हें निकाला नहीं गया।

आलोचना कीजिए लेकिन उसका सटीक कारण होना चाहिए। आपके पास कोई समाधान नहीं है, तो आप आलोचना इस तरह से मत कीजिए कि सरकार तो सबकुछ होती है, उसे ही कुछ करना चाहिए। ये ‘कुछ’ क्या है? पैसे बाँटे सरकार? पैसे हैं कहाँ?

सरकार ने रोजगार शुरू करने के लिए लोन की व्यवस्था की है। जो गरीब थे, जिनकी कोई सेविंग नहीं थी, उनको नवंबर तक भोजन की व्यवस्था की है। सरकार की प्राथमिकता आप नहीं हैं, क्योंकि आप इस धक्के को सरकार को गाली दे कर भी सह लेंगे।

सरकार की प्राथमिकता हमेशा वो होंगे जिनकी जान चली जाने के कगार पर है। वहाँ पाँच किलो चावल और गेहूँ से लोग जिंदा हैं वरना महामारी से कम, भुखमरी से ज्यादा लोग मर जाते।

आप पूछ रहे हैं कि चीजें कब सामान्य होंगी। ये क्या भूकम्प आ कर चला गया है कि हमने नाप लिया कितनी तबाही फैली और फिर योजना बना ली? ये आपदा अभी चल रही है, आप सुनामी के बीच में हैं और जब ज्वार बढ़ ही रहा है, तब आपको जानना है कि चीजें कब सामान्य होंगी।

मैं किसी एक सरकार का पक्ष नहीं ले रहा। और पढ़ने वाले ये भी जान लें कि सरकार कॉन्ग्रेस की भी होती तो भी मैं यही कहता कि सरकार असामान्य परिस्थिति में जो कर रही है, वो सराहनीय है। मैंने देश के किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री की आलोचना नहीं की है इस पूरे समय में। मेरे पास भी खबरें आती हैं कि फलाँ राज्य में टेस्टिंग कम हो रही है, कोई मृत्यु के आँकड़े आधा दे रहा है, कहीं हॉस्पिटल में व्यवस्था नहीं है… स्वास्थ्य और रोजगार, दोनों ही, केन्द्र और राज्य के विषय हैं। फिर भी, चूँकि मेरे पास ऐसी आपदा का समाधान नहीं, न ही मैं तार्किक विश्लेषण कर बता सकता हूँ कि ये कब जाएगा, न ही मुझे ये दिख रहा है कि सरकार कोताही कर रही है, इसलिए मैं समाधानहीन आलोचना से बचता हूँ।

सरकार वैसी विपदा का स्कोप ले कर नहीं चल सकती जो लोकल की जगह ग्लोबल है, क्योंकि वर्तमान जनसंख्या के किसी भी व्यक्ति ने ऐसी आपदा अपने जीवनकाल में ही नहीं देखी। न ही, हम एक विकसित राष्ट्र हैं कि बफर से पैसे निकाल कर बाँट दें या जो बेरोजगार हैं उनको भत्ता देने लगें। हमें ऐसे समय का इंतजार करना चाहिए जब हमारी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत हो जाए कि देश से गरीबी चली जाए, और 135 करोड़ लोगों को घर बिठा कर उनकी आशाओं के हिसाब से पैसे दिए जा सकें।

जब आपके पास समाधान तो छोड़िए, कोई आकलन भी नहीं है, किसी ऐसी अर्थव्यवस्था का उदाहरण भी नहीं जिसकी जनसंख्या और आर्थिक क्षमता आपके स्तर की है, जिसने कोरोना से पार पा लिया हो, तब तक आपके पास देखने और समझने का मौका है।

आलोचना का क्या है, वो तो हम कभी भी कर सकते हैं। आपको बीस हजार प्रति महीने सरकार देने लगे तो आप कहेंगे कि मेरी सैलरी तो एक लाख थी, मैं तो दिल्ली में रहता हूँ, इतना तो मेरे कैब का खर्चा है। इसलिए, अभी बात जिंदा रहने की है। जिंदा रहने के लिए दस किलो अनाज आवश्यक हैं, सर पर एक छत जरूरी है और कोरोना से बचने के प्रावधानों का पालन आवश्यक है।

मेरी नौकरी चली जाएगी तो मैं गाँव जाऊँगा। वहाँ सरकारी गेहूँ और चावल खा कर जीवित रहने का उपाय करूँगा। फिर चुनाव आएँगे तब ये देखूँगा कि ये सरकार तो जो कर रही थी किया, लेकिन क्या किसी और चेहरे में बेहतर करने की मंशा होती? फिर जो समझ में आएगा उसको वोट दूँगा। मैं नौकरी जाने को भी अभी प्राकृतिक आपदा ही मान रहा हूँ, ये कृत्रिम नहीं है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारतीhttp://www.ajeetbharti.com
सम्पादक (ऑपइंडिया) | लेखक (बकर पुराण, घर वापसी, There Will Be No Love)

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दीप्रिंट वालो! ‘लव जिहाद’ हिन्दू राष्ट्र का आधार नहीं, हिन्दू बच्चियों को धोखेबाज मुस्लिमों से बचाने का प्रयास है

लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं।

UP कैबिनेट में पास हुआ ‘लव जिहाद अध्यादेश’: अब नाम छिपाकर शादी करने पर मिलेगी 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 'लव जिहाद' को लेकर एक बड़े फैसले में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 'लव जिहाद' के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए यूपी कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

नड्डा 100 दिन के दौरे पर, गाँधी परिवार छुट्टी पर: बाद में मत रोना कि EVM हैक हो गया…

कोरोना काल में भाजपा के अधिकतर कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य में लगाया गया था। अब संगठन मजबूत किया जा रहा। गाँधी परिवार आराम फरमा रहा, रिसॉर्ट्स में।

43 चायनीज Apps को किया गया बैन: चीन पर चोट, कुल 267 पर चला डिप्लोमैटिक डंडा

भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर...

अर्णब की गिरफ्तारी से पहले अन्वय नाइक मामला: क्यों उठते हैं माँ-बेटी की मंशा पर सवाल? कब-कब क्या हुआ, जानिए सब कुछ

ऑपइंडिया ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच साझा किए गए पत्रों को एक्सेस किया और यह जाना कि यह मामला उतना सुलझा नहीं है जितना लग रहा है। पढ़िए क्या है पूरा मामला?

वैक्सीन को लेकर जल्द शुरू होगा बड़ा टीकाकरण अभियान, प्रखंड स्तर तक पर भी टास्क फोर्स का हो गठन: PM मोदी

पीएम मोदी ने बताया कि देश में इतना बड़ा टीकाकरण अभियान ठीक से हो, सिस्टेमेटिक और सही प्रकार से चलने वाला हो, ये केंद्र और राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है।

प्रचलित ख़बरें

‘मुस्लिमों ने छठ में व्रती महिलाओं का कपड़े बदलते वीडियो बनाया, घाट पर मल-मूत्र त्यागा, सब तोड़ डाला’ – कटिहार की घटना

बिहार का कटिहार मुस्लिम बहुत सीमांचल का हिस्सा है, जिसकी सीमाएँ पश्चिम बंगाल से लगती हैं। वहाँ के छठ घाट को तहस-नहस कर दिया गया।

बहन से छेड़खानी करता था ड्राइवर मुश्ताक, भाई गोलू और गुड्डू ने कुल्हाड़ी से काट डाला: खुद को किया पुलिस के हवाले

गोलू और गुड्डू शाम के वक्त मुश्ताक के घर पहुँच गए। दोनों ने मुश्ताक को उसके घर से घसीट कर बाहर निकाला और जम कर पीटा, फिर उन्होंने...

‘मेरे पास वकील रखने के लिए रुपए नहीं हैं’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व सैन्य अधिकारी की पत्नी से हरीश साल्वे ने कहा- ‘मैं हूँ...

साल्वे ने अर्णब गोस्वामी का केस लड़ने के लिए रिपब्लिक न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उन्होंने कुलभूषण जाधव का केस भी मात्र 1 रुपए में लड़ा था।

‘हिन्दुस्तान की शपथ नहीं लूँगा’: बिहार की विधानसभा में पहुँचते ही ओवैसी के MLA दिखाने लगे रंग

जैसे ही सदस्यता की शपथ के लिए AIMIM विधायक का नाम पुकारा गया, उन्होंने शपथ पत्र में लिखा ‘हिन्दुस्तान’ शब्द बोलने से मना कर दिया और...

रहीम ने अर्जुन बनकर हिंदू विधवा से बनाए 5 दिन शारीरिक संबंध, बाद में कहा- ‘इस्लाम कबूलो तब करूँगा शादी’

जब शादी की कोई बात किए बिना अर्जुन (रहीम) महिला के घर से जाने लगा तो पीड़िता ने दबाव बनाया। इसके बाद रहीम ने अपनी सच्चाई बता...

इतिहास में गुम हैं मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा: देश भूल गया ब्रह्मपुत्र के इन बेटों को

राजपूतों और मराठों की तरह कोई और भी था, जिसने मुगलों को न सिर्फ़ नाकों चने चबवाए बल्कि उन्हें खदेड़ कर भगाया। असम के उन योद्धाओं को राष्ट्रीय पहचान नहीं मिल पाई, जिन्होंने जलयुद्ध का ऐसा नमूना पेश किया कि औरंगज़ेब तक हिल उठा। आइए, चलते हैं पूर्व में।
- विज्ञापन -

‘दिल्ली दंगे में उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान के खिलाफ पर्याप्त सबूत’: कोर्ट में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल

दिल्ली की अदालत ने दिल्ली पुलिस के उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में नए सप्लीमेंट्री चार्जशीट को स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपित उमर खालिद, शरजील इमाम और फैजान खान के खिलाफ यूएपीए के प्रावधानों के तहत अपराध करने के पर्याप्त सबूत हैं।

दीप्रिंट वालो! ‘लव जिहाद’ हिन्दू राष्ट्र का आधार नहीं, हिन्दू बच्चियों को धोखेबाज मुस्लिमों से बचाने का प्रयास है

लव जिहाद कोई काल्पनिक राक्षस नहीं है। ये वीभत्स हकीकत है। मेरठ में हुआ प्रिया का केस शायद जैनब ने पढ़ा ही नहीं या निकिता के साथ जो तौसीफ ने किया उससे वो आजतक अंजान हैं।

UP कैबिनेट में पास हुआ ‘लव जिहाद अध्यादेश’: अब नाम छिपाकर शादी करने पर मिलेगी 10 साल की सजा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 'लव जिहाद' को लेकर एक बड़े फैसले में अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। 'लव जिहाद' के लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए यूपी कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंगना और रंगोली की गिरफ्तारी पर लगाई रोक, जस्टिस शिंदे ने मुंबई पुलिस को फटकारा

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने अभिनेत्री कंगना रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दे दी है, लेकिन राजद्रोह के मामले में दोनों को 8 जनवरी को मुंबई पुलिस के सामने पेश होना होगा।

नड्डा 100 दिन के दौरे पर, गाँधी परिवार छुट्टी पर: बाद में मत रोना कि EVM हैक हो गया…

कोरोना काल में भाजपा के अधिकतर कार्यकर्ताओं को सेवा कार्य में लगाया गया था। अब संगठन मजबूत किया जा रहा। गाँधी परिवार आराम फरमा रहा, रिसॉर्ट्स में।

43 चायनीज Apps को किया गया बैन: चीन पर चोट, कुल 267 पर चला डिप्लोमैटिक डंडा

भारत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर...

अर्णब की गिरफ्तारी से पहले अन्वय नाइक मामला: क्यों उठते हैं माँ-बेटी की मंशा पर सवाल? कब-कब क्या हुआ, जानिए सब कुछ

ऑपइंडिया ने इस मामले में दोनों पक्षों के बीच साझा किए गए पत्रों को एक्सेस किया और यह जाना कि यह मामला उतना सुलझा नहीं है जितना लग रहा है। पढ़िए क्या है पूरा मामला?

शाहिद जेल से बाहर आते ही ’15 साल’ की लड़की को फिर से ले भागा, अलग-अलग धर्म के कारण मामला संवेदनशील

उम्र पर तकनीकी झोल के कारण न तो फिर से पाक्सो एक्ट की धाराएँ लगाई गईं और न ही अभी तक शाहिद या भगाई गई लड़की का ही कुछ पता चला...

वैक्सीन को लेकर जल्द शुरू होगा बड़ा टीकाकरण अभियान, प्रखंड स्तर तक पर भी टास्क फोर्स का हो गठन: PM मोदी

पीएम मोदी ने बताया कि देश में इतना बड़ा टीकाकरण अभियान ठीक से हो, सिस्टेमेटिक और सही प्रकार से चलने वाला हो, ये केंद्र और राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है।

कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी देने वाले शिवसेना MLA के 10 ठिकानों पर ED की छापेमारी: वित्तीय अनियमितता का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,358FollowersFollow
357,000SubscribersSubscribe