"सैल्यूट है मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह को, पाकिस्तान ज़िंदाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे लगा रहे उपद्रवियों को करारा जवाब देने के लिए। अब कुछ तथाकथित प्रबुद्धों को अफ़सोस है कि भारत मुर्दाबाद और पाकिस्तान ज़िंदाबाद बोलने वाले गद्दारों को पाकिस्तान जाने को क्यों कहा।"
आयशा ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वो देश में अल्पसंख्यक राजनीति को उभरते हुए देखना चाहती हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक राजनीति का अर्थ समझाते हुए बताया कि इसका आशय 'मुस्लिम-बहुजन पॉलिटिक्स' से है।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में 2 दशक तक राजनीतिक विज्ञान पढ़ाने वाले गौतम सेन का कहना है कि धर्मांतरण के अलावा 'चर्च प्लांटिंग' भी एक अहम मुद्दा है। इसके तहत राज्य के कई गाँवों में मंदिरों से ज्यादा चर्च बना दिए गए हैं ताकि उसका प्रभाव दिखे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को आधुनिक बनाने में युवा पीढ़ी की बहुत बड़ी भूमिका होने वाली है। उन्हें विश्वास है कि भारत में यह दशक न सिर्फ़ युवाओं के विकास का होगा, बल्कि युवाओं के सामर्थ्य से देश का विकास करने वाला भी साबित होगा।
मायावती ने कहा है कि उन्होंने सबसे पहले सीएए को विभाजनकारी और असंवैधानिक बताकर इसका विरोध किया था। बावजूद इसके विधायक परिहार ने CAA का समर्थन किया। पहले भी उन्हें कई बार पार्टी लाइन पर चलने की चेतावनी दी गई थी।
"यह अपनी तरह का देश का पहला विश्वविद्यालय होगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अगले साल 15 जनवरी से इस यूनिवर्सिटी में दाखिला मिलेगा। फरवरी-मार्च से कक्षाएँ शुरू हो जाएँगी।"
राशिद और उसके साथियों ने एक व्यक्ति से पुराने नोट बदलने को लेकर सौदा किया था। इनका कहना था कि उनके पास बड़ी मात्रा में पुराने नोट हैं। केंद्र में सरकार बदलने पर पुराने नोट फिर से वैध कर दिए जाएँगे।
किसानों की पूर्ण कर्ज माफी के नाम पर भले दो लाख रुपए तक का कर्ज ही माफ करने का ऐलान किया गया हो, लेकिन उसका श्रेय लूटने के लिए महाविकास अघाड़ी के साझेदारों में होड़ लग गई है। साथी दलों का कहना है कि शिवसेना अकेले श्रेय लूटने की कोशिश कर रही है जो ठीक नहीं है।
कॉन्ग्रेस ने जो वीडियो जारी किया है उसमें कहीं भी महिला अधिकारी प्रियंका गॉंधी का गला पकड़ते या प्रियंका जमीन पर गिरती नजर नहीं आतीं, जैसा उन्होंने दावा किया था। उलटे महिला अधिकारी के साथ प्रियंका गॉंधी के साथ खड़े लोग ही धक्का-मुक्की कर रहे हैं।
2 दिन में 10, 1 महीने में 77 बच्चों की मौत। ये आपके लिए भले बच्चे हों। लेकिन, राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए बस नंबर हैं। जिन्हें गिनकर उसने बता दिया है कि इस बार सबसे कम मरे हैं। यह भी बताया है कि अस्पतालों में रोज दो-चार मरते ही हैं, कोई नई बात नहीं है।