Homeराजनीति'...जो पाकिस्‍तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे, उनके लिए था मेरठ SP...

‘…जो पाकिस्‍तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे, उनके लिए था मेरठ SP का बयान, यह ग़लत नहीं’

"उन्‍होंने (एसपी ने) सभी मुस्लिमों के बारे में यह नहीं कहा था। जो लोग पत्‍थरबाजी के दौरान पाकिस्‍तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे, उन्‍हें कहा था। जो लोग इस तरह की गतिविधि में शामिल हैं, उनके लिए एसपी सिटी का बयान ग़लत नहीं है।"

उत्तर प्रदेश में मेरठ ज़िले के एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह का वायरल वीडियो अभी भी विवाद का कारण बना हुआ है। इस मुद्दे पर सिंह ने स्पष्टीकरण भी दिया था कि CAA के ख़िलाफ़ हुए विरोध-प्रदर्शन में उन्होंने पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने वाले उपद्रवियों को वहाँ से भगाया था, वहीं एडीजी प्रशांत कुमार ने भी कहा था कि पुलिसकर्मियों की तरफ़ से किसी भी तरह की गोलीबारी नहीं की गई थी, बावजूद इसके एसपी का वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस मामले पर यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “उन्‍होंने (एसपी ने) सभी मुस्लिमों के बारे में यह नहीं कहा था। जो लोग पत्‍थरबाजी के दौरान पाकिस्‍तान के समर्थन में नारे लगा रहे थे, उन्‍हें कहा था। जो लोग इस तरह की गतिविधि में शामिल हैं, उनके लिए एसपी सिटी का बयान ग़लत नहीं है।”

इससे पहले, एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया था कि वायरल हुआ वीडियो बीते 20 दिसंबर को मेरठ शहर में हुए उपद्रव के बाद का है। उन्होंने बताया कि इसमें तथ्य यह है कि वहाँ भारत-विरोधी और दुश्मन देश (पाकिस्तान) ज़िंदाबाद के नारे लगाए जा रहे थे और कुछ लोग पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के आपत्त्तिजनक पर्चे बाँट रहे थे। उन्होंने उक्त युवाओं के ख़िलाफ़ देशद्रोह की धाराओं के तहत मामला दर्ज करने की बात भी कही थी।

इस बीच राज्य सरकार के प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने मेरठ के पुलिस अधीक्षक (नगर) अखिलेश नारायण सिंह के वायरल हुए व‍ीडियो की प्रशंसा की। उन्होंने ट्वीट किया, “सैल्यूट है मेरठ के सिटी एसपी अखिलेश नारायण सिंह को, पाकिस्तान ज़िंदाबाद और भारत मुर्दाबाद के नारे लगा रहे उपद्रवियों को करारा जवाब देने के लिए। अब कुछ तथाकथित प्रबुद्धों को अफ़सोस है कि भारत मुर्दाबाद और पाकिस्तान ज़िंदाबाद बोलने वाले गद्दारों को पाकिस्तान जाने को क्यों कहा।”

दरअसल, सोशल मीडिया पर 20 दिसंबर का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें एडीएम सिटी अजय तिवारी और एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह हिंसा के दौरान गली के अंदर भाग रहे कुछ उपद्रवियों से कहा था कि जहाँ जाओगे, चले जाओ। हम ठीक कर देंगे। काली पट्टी बांधकर विरोध जता रहे हो, खाओगे यहाँ और गाओगे वहाँ का। एसपी का ये बयान वायरल होने के बाद मेरठ पुलिस ने दावा किया कि कुछ उपद्रवियों ने काली पट्टी बाँधकर पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाए थे।

वे देश विरोधी नारे लगा रहे थे, आपत्तिजनक पर्चे बाँट रहे थे: ‘पाकिस्तान चले जाओ’ पर ADG

मेरठ पुलिस पर गोली चलाने वाला दंगाई युवक हुआ कैमरे में कैद, जारी हुआ Video

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -