"मैं CAA और NRC के समर्थन में निकाली गई रैली में शामिल नहीं हो सका, क्योंकि मैं मीटिंग में बिज़ी था। मैं इसके लिए दु:ख व्यक्त करता हूँ। शिवसेना हमेशा से हिन्दुत्ववादी विचारधारा वाली पार्टी रही है। मैं इन दोनों मुद्दों का पुरज़ोर समर्थन करता हूँ, इसलिए मैं इस बारे में पत्र लिख रहा हूँ।"
"एक प्रचलित वाक्य है- विविधता में एकता। लेकिन हमारा देश एक कदम आगे जाता है। केवल विविधता में एकता नहीं बल्कि एकता की ही विविधता है। हम विविधताओं में एकता नहीं खोज रहे हैं, हम उस एकता को खोज रहे हैं जिससे विविधता निकली है।"
फरारी के दौरान भी उसने अपने फेसबुक पेज पर अपना फोटो पोस्ट किया था। उससे पहले उसने न सिर्फ़ एक पत्रकार की पिटाई की थी बल्कि कई अन्य मीडियाकर्मियों के साथ भी बदतमीजी की थी। उसने कई अख़बारों के पत्रकारों व फोटोग्राफरों की पिटाई की थी।
अरुंधति रॉय ने कहा कि पीएम मोदी ने जानबूझ कर झूठ बोला क्योंकि उन्हें पता है कि मीडिया उनके हाथ में है, जो सच्चाई नहीं दिखाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपी पुलिस मुस्लिमों के घर-घर जाकर उन्हें लूट रही है।
प्रधानमंत्री ने सीएए को लेकर हिंसा करने वालों को भी समझाया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अधिकार के साथ-साथ अपने दायित्व को भी निभाना चाहिए और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से बचना चाहिए। उन्होंने ऐसे लोगों को खुद से पूछने की सलाह दी कि क्या उनका रास्ता सही था, जो जलाया गया वो उनके बच्चों को काम आने वाला भी तो था।
“हमने पुलिस गोलीबारी में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों को मुआवजा नहीं देने का फैसला नहीं किया है, क्योंकि अपराधियों को मुआवजा देना अपने आप में एक अक्षम्य अपराध है। इससे पहले सरकार ने उन्हें मुआवजा देने का फैसला किया था, लेकिन अब हमने इसे वापस ले लिया है।”
NPR की शुरुआत मनमोहन सरकार के दौरान हुई। इसमें शामिल होना भारत में रह रहे लोगों के लिए अनिवार्य किया गया। साथ ही इसे NRIC की दिशा में पहला क़दम बताया गया। अमित शाह ने साफ किया है कि दोनों का कोई लेना-देना नहीं है।
आदित्य ठाकरे को पहले Y+ सुरक्षा मिली हुई थी। लेकिन अब आदित्य ठाकरे की सुरक्षा को बढ़ाकर Z श्रेणी का कर दिया गया है। वहीं पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को X श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी। लेकिन अब उन्हें केवल एक पुलिस एस्कॉर्ट दिया जाएगा।
पीरजादा वांकानेर से और जोशी जूनागढ़ से विधायक हैं। 2008 में 1500 लोगों की भीड़ की अगुवाई करते हुए उसे हिंसा के लिए उकसाया था। इस मामले में जिन लोगों को सजा सुनाई गई है, उनमें कॉन्ग्रेस के एक पूर्व विधायक और अन्य नेता भी हैं।
एनपीआर को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद से विपक्ष उसी तरह अफवाह फैलाने में जुट गया है जैसा उसने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर किया। जिस तरीके से CAA को NRC से जोड़ा गया, उसी तरह अब NPR को भी NRC से जोड़कर दिखाने की कोशिश हो रही है। जबकि हकीकत कुछ और ही है।