प्रगतिशील मुस्लिम चेहरे के तौर पर पहचान रखने वाले आरिफ़ मोहम्मद वंदे मातरम का उर्दू में अनुवाद कर चुके हैं। शाहबानो मामले में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था और मुस्लिम कट्टरपंथियों के सामने घुटने टेकने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार का विरोध किया था।
लोकसभा चुनाव से पहले टीएमसी छोड़ भाजपा में आए अर्जुन सिंह पर पहले भी हमले हो चुके हैं। इसी साल 25 जुलाई की रात उनके घर पर बम फेंके गए थे। आम चुनावों के दौरान भी टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें निशाना बनाया था।
मोदी की हर वक्त आलोचना को गैर वाजिब बताने के उनके बयान को सोनिया गाँधी ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। इसके बाद केरल की प्रदेश कॉन्ग्रेस ने थरूर से स्पष्टीकरण माँगा और पूर्व मंत्री वीरप्पा मोइली ने उन्हें 'पब्लिसिटी का भूखा' बताया।
तीन तलाक को जुर्म बनाने वाले मोदी सरकार के बिल का समर्थन करने वाले खान ने शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया था। इस मामले में राजीव गॉंधी की सरकार ने मुस्लिम नेताओं के दबाव में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटते हुए कानून संसद से पास करवाया था।
केंद्रीय मंत्री अरविन्द सावंत ने NRC की तारीफ़ करते हुए इसे मुंबई में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम बताया। उन्होंने कहा, "NRC से पता चलेगा कि असम में बांग्लादेश के कितने लोग अवैध रूप से रह रहे हैं। इसे मुंबई में करना बहुत ज़रूरी है।"
भगवा आतंकवाद की थ्योरी गढ़ने वाले दिग्विजय सिंह ने इससे पहले कहा था कि जितने भी हिंदू आतंकी पकड़े गए हैं वे आरएसएस से जुड़े हैं। उन्होंने कहा था कि हिंदू आतंकवादी संघ से आते हैं, क्योंकि संघ की विचारधारा नफरत फैलाने वाली है।
आज बांग्लादेशी घुसपैठियों की सबसे बड़ी पैरोकार ममता बनर्जी ने एक समय (2005 में) बांग्लादेशी घुसपैठियों पर चर्चा कराने की माँग को लेकर तत्कालीन लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी पर कागज़ फेंके थे। महीना यही था अगस्त का और तारीख थी चार।
"जब सेना की तारीफ होती है तो वे सबूत माँगने लगते हैं। मोदी का विरोध करने में पाकिस्तान की तारीफ़ करने लगते हैं। ऐसे गद्दारों के लिए एक नया कानून होना चाहिए, चाहे वे JNU में पढ़ रहे हों, या महाराष्ट्र में हों। उसके बाद कोई नसीरुद्दीन, हामिद अंसारी या सिद्धू नहीं होगा।"
बीजेपी नेता के निधन पर शोक प्रकट करते हुए नीतीश ने कहा- "अरुण जेटली जी असाधरण और प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। उन्होंने भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी बखूबी सँभाली। वह कानून के जानकार भी थे।"
सिद्धारमैया से पूछा गया था कि राज्य में गठबंधन सरकार के गिरने के लिए जेडीएस उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहा है। जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री ने एक कन्नड़ के एक कहावत का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब होता है कि जो वेश्याएँ नाच नहीं सकती वे डॉंस फ्लोर का रोना रोती हैं।