भारत की बात करें तो इसकी अर्थव्यवस्था की विकास दर 1.9% की रफ़्तार से बढ़ेगी, जो 2019 में 4.2% थी। अगर भारत और चीन की तुलना करें तो चीन 2020 में 1.2% की आर्थिक विकास दर के साथ भारत से पीछे छूट जाएगा। इस दौरान अमेरिका (-5.9%), जर्मनी (-7%), फ़्रांस (-7.2%) और इटली (-9.1%) की हालत पस्त रहेगी।
"आज मैं अपने प्रशासन को विश्व स्वास्थ्य संगठन के वित्त पोषण को रोकने का निर्देश दे रहा हूँ। हर कोई जानता है कि वहाँ क्या चल रहा है। WHO को अमेरिकी करदाता प्रत्येक वर्ष 400-500 मिलियन डॉलर सहयोग के तौर पर देता है और वहीं इसके विपरीत चीन संगठन को लगभग 40 मिलियन डॉलर से भी कम प्रति वर्ष योगदान के रूप में देता है।"
कोहली ने कहा कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो सरकार के दिशानिर्देशों और क़ानून का सम्मान नहीं करते, जिनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, उन सबके अलावा भारत में स्थिति काफ़ी हद तक बहुत ठीक है।
पिछले दिनों पाकिस्तान के कराची व सिंध प्रांत से कुछ ऐसी रिपोर्ट आई थी जिसमें एनजीओ व सरकारी अधिकारी हिंदू व ईसाई समुदाय के लोगों को भोजन देने से मना कर रहे थे और पूछे जाने पर जवाब दे रहे थे कि भोजन मुस्लिम लोगों के लिए हैं।
इनमें दूसरे देशों ने भी अपने नागरिकों को निकालने के लिए फ्लाइट्स का इंतजाम किया। गल्फ देशों, यूरेशिया और पड़ोसी देशों के लोगों को निकाला गया। चुनौती यह थी कि अधिकतर विदेशी पर्यटक बड़े शहरों से काफ़ी दूर फँसे हुए थे।
इन वीडियोज के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तानी डॉक्टर की इन हरकतों को बेफिजूल बता रहे हैं। साथ ही सलाह दे रहे हैं कि उन्हें अब इन मामलों पर सीरियस हो जाना चाहिए।
महिलाओं ने दावा किया कि काफिर समुदाय विशेष पर अत्याचार करते हैं, इसीलिए वो इस वायरस के कारण तबाह हो जाएँगे। महिलाओं ने दावा किया कि इससे उनका तो कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन काफिरों की तबाही आ जाएगी, इसका उन्हें पूरा विश्वास है।
रक्सौल बॉर्डर पर भारतीय सुरक्षा कर्मियों ने जमातियों को रोकने का प्रयास किया था, मगर सभी जमाती जबरन नेपाल की सीमा में प्रवेश कर गए थे। यह सभी जमाती पाकिस्तान, इण्डानेशिया व भारत के थे। जिन्हें सीमा पार के बाद जालिम मुखिया ने शरण दी और उन्हें 10 बाइकों की व्यवस्था करके ले गया।
"भारत के लोगों ने जिस तरह से इस पर अमल किया, हम उसका समर्थन करते हैं। हमारे पास इसका विस्तृत आँकड़ा नहीं है, लेकिन हमें लगता है कि आप लॉकडाउन के माध्यम से कोरोना के बहुत बड़े प्रकोप को रोकने में सक्षम हैं।"
शव को 45-60 मिनट की अवधि तक 800-1200 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर जलाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय के तमाम विरोध के बावजूद भी स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह शवों के अंतिम संस्कार के आखिरी फैसले को परिवार और मजहब पर छोड़ने की इस माँग को कोरोना वायरस के संक्रमण की असीमित क्षमता को देखते हुए रद्द कर रहे हैं।