चीन तो हमेशा से दुनिया को ऐसी आपदा देने में अभ्यस्त रहा है। इससे पहले भी कई ऐसे रोग और वायरस रहे हैं, जो चीन से निकला और जिन्होंने पूरी दुनिया में कहर बरपाया। आइए, आज हम उन 5 चीनी आपदाओं के बारे में बात करते हैं, जिसने दुनिया भर में तहलका मचाया।
पाकिस्तान में डॉक्टरों का विरोध-प्रदर्शन देश में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी को लेकर सरकार की नीतियों के खिलाफ था। डॉक्टरों के उग्र होने की वजह एक यह भी है कि वहाँ अब तक 13 डॉक्टरों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इतना ही नहीं, एक डॉक्टर और एक नर्स की कोरोना से मौत भी हो चुकी है वहाँ।
जिन झोपड़ियों में आग लगी, और जिनका इससे नुकसान हुआ, वो हिंदू समुदाय के थे। झोपड़ियों में आग लगने से कम से कम तीन बच्चे जिंदा जल गए। जबकि एक महिला बुरी तरह से झुलस गई।
ये पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह की हरकत की है। कुछ ही दिनों पहले स्पेन ने चीन से 467 मिलियन यूरो के चिकित्सा उपकरण खरीदे थे, जिसमें 950 वेंटिलेटर्स, 5.5 मिलियन टेस्टिंग किट्स, 11 मिलियन ग्लव्स और 50 करोड़ से ज्यादा फेस मास्क शामिल थे। इन खरीदी गईं मेडिकल टेस्टिंग किट्स व उपकरणों में से ज्यादातर किसी काम के नहीं थे।
“सरकार और पुलिस डर की भावना पैदा करने के लिए ऐसे बयान दे रही है। कुछ नहीं होगा। कराची 20 मिलियन का शहर है, सरकार हर नुक्कड़ या हर सभा में अपना फैसला लागू नहीं कर सकती है।”
अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण से हो रही मौतों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वहॉं अब 3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 8,452 लोगों की जान भी जा चुकी है।
पीड़िता की मॉं का कहना है कि मुनीर ने फिरौती में चार लाख रुपए लेने के बाद भी उनकी बेटी को नहीं लौटाया। उसने कहा कि बच्ची ने इस्लाम कबूल कर लिया। उन्होंने अपनी अन्य बेटियों को अगवा किए जाने की आशंका भी जताई है।
मौलवी अब्दुल्ला ने पूरे हमले की साजिश रची थी। वह पाकिस्तानी नागरिक है और पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वो तहरीक-ए-तालिबान में सक्रिय रहा। फिर आईएसकेपी का प्रमुख बना। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी।
"भारत में लॉकडाउन को उस समय पूरी तरह से लागू कर दिया गया था, जब भारत में बहुत कम कोरोना के मामले सामने आए थे। इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि निश्चित तौर पर यह भारत सरकार का दूरगामी फैसला था। यही कारण है कि इतनी बड़ी आबादी वाले देश में यह महामारी तेजी से नहीं फैल सकी। सरकार का यह एक साहसिक फैसला है।"
"मेरे पिता में दो हफ्ते पहले कोरोना संक्रमण पाया गया। 1 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। अगले दिन उन्हें जला दिया गया। उनका शव पुलिस की देखरेख में एक गाड़ी में ले जाया गया जहाँ उन्हें जलाया गया। हम उनका जनाजा नहीं निकाल पाए।"