परमबीर सिंह की प्रेस वार्ता के बाद इंडिया टुडे ने ख़ुशी मनाते हुए रिपब्लिक टीवी पर तंज कसना शुरू कर दिया था। जैसे ही इस बात का खुलासा हुआ कि असल एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम है उसके बाद इंडिया टुडे के तेवर पूरी तरह बदल गए हैं।
एक और खुलासे के अनुसार, ऑडिट टीम ने पैनल के एक घर का दौरा किया था। जिसके बाद वहाँ रहने वालों ने बताया कि उन्हें इंडिया टुडे 2 घंटे ज्यादा देखने के लिए भुगतान किया जाता था।
मुंबई पुलिस कमिश्नर ने जिस टीआरपी स्कैम का दावा किया था, रिपब्लिक टीवी के अनुसार उसके एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम है। इस खुलासे ने मुंबई पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
रिपब्लिक टीवी मुंबई पुलिस कमिश्नर पर आपराधिक मानहानि का दावा करेगी। BARC ने ऐसी एक भी रिपोर्ट जारी नहीं की है जिसमें रिपब्लिक टीवी का नाम शामिल हो। यह सिर्फ और सिर्फ निराशा में उठाया गया एक कदम है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार किसी का अधिकार नहीं हथियाना चाहती है, आजादी पर आँच नहीं आने देना चाहती। लेकिन एक रिस्पांसिबल जर्नलिज्म हो। वो रिस्पांसिबिलिटी खुद तय करनी होती है।
अपने हाथ में माइक लेकर और कैमरे की ओर देखते हुए चित्रा ने अधिकारी पर बदसलूकी का इल्जाम लगाया था और पूछा था कि उनकी हिम्मत कैसे हुई पत्रकार को उनका काम सिखाने की।
द वायर के 'मनगढ़ंत' अध्ययन में बताया गया कि उन्होंने सोशल मीडिया के ट्रेंड्स का पिछले तीन महीने में विश्लेषण किया ताकि यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया पर अफवाहों को कैसे बढ़ाते हैं।