मीडिया के लोग आतंकवादियों के एक 'आम आदमी' से आतंकवादी बनने की घटना का बेहद फ़िल्मी तरीके से महिमामंडन करते नजर आते हैं। आतंकवादियों से अलग यह अपना एक अलग किस्म का बौद्धिक जिहाद चला रहे होते हैं, जिनका पहला संघर्ष सामान्य विवेक और तर्क क्षमता से नजर आता है।
जो ग्राफिक एनडीटीवी ने दिखाया उसमें पॉंच पार्टियों की तुलना की गई थी। इन दलों में सबसे कम 39 फीसदी बीजेपी सांसद दागी हैं। लेकिन ग्राफ बीजेपी का सबसे बड़ा दिखाया गया ताकि उसके सबसे ज्यादा दागदार होना का भ्रम पैदा किया जा सके।
जानकारी न हो तो ठगने में आसानी रहती है। ये गणित तीन पार्टी वाले चुनाव तक चलता है, मगर कई पार्टियों के बीच होने वाले चुनावों में नहीं, ऐसा बताए बिना अगर विश्लेषण सुनाए जाएँ तभी तो लोग देखेंगे-सुनेंगे! अगर पता हो कि इसके नाकाम होने की ही संभावना ज्यादा है तो भला न्यूज़ बेचने वाले पर भरोसा कौन करेगा?
लोगों ने एमके वेणु से पूछा कि क्या उन्होंने किसी पूर्व सीएम की आत्मा से बात कर के अरविन्द केजरीवाल की तारीफ कर दी? हालाँकि, 'द वायर' इन्हीं कारणों से जाना जाता है। भाजपा के विरोध में हवा बनाने के लिए वो कुछ भी कर सकता है। दिल्ली का कोई पूर्व सीएम जिन्दा ही नहीं हैं।
इससे पहले भी कई और महिलाओं ने अलग धर्म होने के बावजूद वहाँ बुर्का पहन एकजुटता दिखाई थी। इसलिए, सवाल उठता है कि जब उन महिलाओं पर ऊँगली नहीं उठी, तो गुंजा से सवाल क्यों? जाहिर है, उनकी राजनीतिक विचारधारा के कारण। इन्हें डर है कि गुंजा प्रदर्शन स्थल से कई ऐसी चीजों को रिकॉर्ड करके दुनिया के सामने पेश कर देंगी, जिससे उनकी फजीहत...
"जिस वाकये के बारे में आप बात कर रही हो, वो साल 2011 का है। 9 साल पहले का - जब केंद्र और असम दोनों में कॉन्ग्रेस सरकार थी। मगर उस समय आप चुप रहीं। अब अपना पॉलिटिकल प्रोपेगेंडा साधने के लिए बच्चे की मौत से जुड़े मामले को 9 साल बाद इस्तेमाल कर..."
मीडिया गिरोह की मानें तो अब अगर चीन की कोई नगर पालिका या ग्राम पंचायत भी भारत में फासिस्ट मोदी सरकार के दौरान चाउमीन में डाली जा रही शिमला मिर्च के खिलाफ प्रस्ताव जारी कर दे, तो मोदी सरकार की जड़ें हिलते देर नहीं लगेगी।
सीएए विरोध के नाम पर बच्चे उकसाए जा रहे हैं। उनसे आजादी के नारे लगवाए जा रहे। कट्टरपंथी उनका ब्रेनवॉश कर रहे हैं। बावजूद इसके बच्चों के अधिकार का हवाला दे मीडिया गिरोह इनकी करतूतों का समर्थन कर रहा है।
बीबीसी का कहना था कि शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों के पूर्वजों ने पाकिस्तान को ठुकराया था और भारत को अपनाया था। इसके जवाब में भाजपा के फायरब्रांड नेता योगी ने कहा कि उन लोगों ने पाकिस्तान न जाकर भारत पर कोई एहसान नहीं किया है।
शांतनु का कहना है कि यह केवल उनका और राघव का पक्ष सुनने की बात नहीं थी। बात उनके साथ हुए बर्ताव की है। जब लोग उन्हें पकड़ने की बात कर रहे थे, गुस्से से आगे बढ़ रहे थे, तब इंडिया टुडे ने भीड़ को सँभालने के लिए कुछ नहीं किया।