"जो मीडिया समूह या मीडिया पोर्टल मेरे नाम से यह स्टेटमेंट जारी कर रहे हैं कि 17 लोग घायल हुए हैं, वह गलत है। वहाँ कोई भी घायल नहीं है। उन्होंने आगे जोड़ा कि तीन लोग बाद में पुलिस स्टेशन आए थे कि वह घायल हैं लेकिन उन्हें देखकर यह साफ था कि कोई भी घायल नहीं था।"
काले दिल वाले इन असुरों की दृष्टि श्री कृष्ण के रथ पर है। यह हिन्दुओं पर है कि वह असुरों को रथ का पहिया तोड़ देने देते हैं, या आसुरिक इरादों को ही रथयात्रा के नीचे कुचल देते हैं...
शेखर गुप्ता ईमानदारी से कहते हैं कि पत्रकारों ने मोदी सरकार द्वारा चालू की गई कल्याणकारी योजनाओं की अनदेखी की, और जब उन्हें योजनाओं के कारण प्रगति दिखी तो उन्होंने उसे भी नजरअंदाज करने की कोशिश की।
राणा अय्यूब ये देखकर शायद अपने होशो-हवास गँवा बैठी कि उनके 'कट्टर दुश्मन' अमित शाह को देश का सौंपा गया है। इस बात से सदमे में डूबा राणा अय्यूब का दुखी हृदय ट्विटर पर फूट पड़ा और वो एक के बाद एक ट्वीट कर के भारत के नए गृह मंत्री के खिलाफ अपना जहर उगलते हुए देखी गई।
मेनस्ट्रीम मीडिया और कुछ तथाकथित-धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी मारे गए आतंकियों की मौत का शोक मनाने में कभी विफल नहीं होते। वो अक्सर कुख़्यात आतंकियों के अपराधों पर पर्दा डालने पर उतारू हो जाते हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया ऐसे आतंकियों को ‘नायक’ या ‘शहीद’ का दर्जा...
'द वायर' ने गुरुग्राम की फेक दावों वाली ख़बर का सच सामने आने के बावजूद उसे लेकर 'डर का माहौल' वाला प्रोपेगैंडा फैलाना जारी रखा। न मुस्लिम की टोपी फेंकी गई, न शर्ट फाड़ी गई और न 'जय श्री राम' बोलने को कहा गया, फिर भी 'द वायर' झूठ फैला रहा है।
रुबिका को इस्लाम की सीख देने वालों से भी ऊपर कुछ ऐसे नाम हैं जिनके ट्विटर हैंडल से पता चलता है कि राहुल गाँधी उनके प्रधानमंत्री हैं। महिला सशक्तिकरण को एक जुमला बनाने वाली इस पार्टी के समर्थक रुबिका लियाकत को गैंगरेप की धमकी देते हुए देखे जा सकते हैं।
यह महज़ संयोग है या फिर साज़िशन ऐसा किया गया? क्या 'द वायर' की पोलिटिकल रिपोर्टिंग वाक़ई बकवास और अनुभवहीन है, या जान-बूझ कर चुनावों को प्रभावित करने के लिए ऐसे लेख लिखे गए?
चौंकाने वाली बात यह है कि राघव बहल के ख़िलाफ़ लन्दन में लगभग 273 करोड़ रुपए (31 मिलियन पाउंड) की संपत्ति ख़रीदने को लेकर आरोप है, जिस पर सरकारी जाँच एजेंसियों की तलवार लटक रही है।