राघव बहल के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आयकर विभाग ने हाल ही में राघव बहल के खिलाफ मेरठ की अदालत में कालाधन निरोधी कानून के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
अरुंधति राय द्वारा वित्तपोषित AltNews के संस्थापक प्रतीक सिन्हा क्या बिलकुल ही दिमाग से पैदल है या पूरी तरह सेंसलेस और संवेदनहीन है कि यदि कोई डेड बॉडी को भी बाहर सड़ने या जानवरों के खाने के लिए फेंक दे तो यह बर्बरता भी उसकी क्रूर और घृणित मानसिकता का स्पष्ट दस्तावेज नहीं कहा जा सकता?
"गुरुग्राम के मुस्लिम युवक द्वारा झूठे दावे करने के बाद गौतम गंभीर ने त्वरित टिप्पणी करते हुए टॉलरेंस और सेकुलरिज्म की बात की थी जबकि अपने लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिमों द्वारा पत्थरबाज़ी कर बसों को क्षतिग्रस्त करने और खुलेआम गुंडागर्दी करने की घटना पर वह चुप क्यों हैं?"
"जो मीडिया समूह या मीडिया पोर्टल मेरे नाम से यह स्टेटमेंट जारी कर रहे हैं कि 17 लोग घायल हुए हैं, वह गलत है। वहाँ कोई भी घायल नहीं है। उन्होंने आगे जोड़ा कि तीन लोग बाद में पुलिस स्टेशन आए थे कि वह घायल हैं लेकिन उन्हें देखकर यह साफ था कि कोई भी घायल नहीं था।"
काले दिल वाले इन असुरों की दृष्टि श्री कृष्ण के रथ पर है। यह हिन्दुओं पर है कि वह असुरों को रथ का पहिया तोड़ देने देते हैं, या आसुरिक इरादों को ही रथयात्रा के नीचे कुचल देते हैं...
शेखर गुप्ता ईमानदारी से कहते हैं कि पत्रकारों ने मोदी सरकार द्वारा चालू की गई कल्याणकारी योजनाओं की अनदेखी की, और जब उन्हें योजनाओं के कारण प्रगति दिखी तो उन्होंने उसे भी नजरअंदाज करने की कोशिश की।
राणा अय्यूब ये देखकर शायद अपने होशो-हवास गँवा बैठी कि उनके 'कट्टर दुश्मन' अमित शाह को देश का सौंपा गया है। इस बात से सदमे में डूबा राणा अय्यूब का दुखी हृदय ट्विटर पर फूट पड़ा और वो एक के बाद एक ट्वीट कर के भारत के नए गृह मंत्री के खिलाफ अपना जहर उगलते हुए देखी गई।
मेनस्ट्रीम मीडिया और कुछ तथाकथित-धर्मनिरपेक्ष-उदारवादी मारे गए आतंकियों की मौत का शोक मनाने में कभी विफल नहीं होते। वो अक्सर कुख़्यात आतंकियों के अपराधों पर पर्दा डालने पर उतारू हो जाते हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया ऐसे आतंकियों को ‘नायक’ या ‘शहीद’ का दर्जा...
'द वायर' ने गुरुग्राम की फेक दावों वाली ख़बर का सच सामने आने के बावजूद उसे लेकर 'डर का माहौल' वाला प्रोपेगैंडा फैलाना जारी रखा। न मुस्लिम की टोपी फेंकी गई, न शर्ट फाड़ी गई और न 'जय श्री राम' बोलने को कहा गया, फिर भी 'द वायर' झूठ फैला रहा है।