मेजर जनरल बख्शी पाकिस्तान और आतंकवादियों के प्रति अपने कठोर रुख के लिए सम्मानित हैं, और इसीलिए ‘लिबरल’ धड़े में उन्हें नापसंद भी किया जाता है। लेकिन उनके यात्रा करने मात्र से विस्तारा में आगे से हवाई यात्रा न करने की धमकी देना तो पागलपन है भाई!
दोनों खिलाड़ियों पर लगाए गए 20 लाख रुपए के जुर्माने में से 1-1 लाख रुपए की रकम ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सुरक्षा बलों के 10 कांस्टेबलों के परिवारों को देने को कहा गया है। बची हुई 10 लाख रुपए की धनराशि को दृष्टिबाधितों के लिए बनाए गए क्रिकेट एसोसिएशन के फंड में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं।
राहुल गाँधी ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट 'द वायर' की एक वीडियो शेयर की। वीडियो में यह दिखाया गया है कि कुम्भ मेले के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिन स्वच्छता कार्यकर्ताओं के पैर धोए थे, वो मोदी से असंतुष्ट हैं। उन्हीं लोगों के एक्सक्लुसिव वीडियो सामने आने पर अब हो रही है इनकी 'सोशल धुनाई'!
पायल कहती हैं, "सोनी राजदान हमें ट्विटर पे ब्लॉक कर के 'Vote against Hate' कर के ट्वीट करती है, कितनी दोगली इंसान है। वो माफी नहीं माँगती कि कैसे वो जुनैद की नकली मॉब लिंचिंग वाली कहानी शेयर कर लोगों को गुमराह कर रही हैं और मानवता का ड्रामा कर रही हैं। यह मानवता इनको कश्मीरी पंडितो की उजड़ी हुई जिंदगी में नहीं दिखती।
ट्वीटर यूजर द्वारा किया गया ये दावा पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद है। सच्चाई तो ये है कि इस वीडियो या फिर इस मुद्दे को किसी मेनस्ट्रीम मीडिया ने इसलिए कवर नहीं किया, क्योंकि आज सूरत में भाजपा समर्थकों द्वारा कोई बाइक रैली नहीं की गई थी।
कुछ मुस्लिमों ने तो यहाँ तक कहा कि नॉन-मुस्लिम इमारतों व पूजा घरों का इस तरह से बर्बाद होना इस्लाम की सत्यता की पुष्टि करता है। कुछ ने कहा कि ये अल्लाह का दंड है जो इस्लाम न मानने वालों को मिलता है। दुनिया भर के कई हिस्सों के मुस्लिमों ने इस आग को लेकर ख़ुशी मनाई।
असल में उस पत्रकार ने वास्तविक गुंडागर्दी की तुलना भाजपा समर्थक के फेसबुक पोस्ट से करते हुए यह साबित करने का प्रयास किया कि दोनों ही एकसमान हैं, दोनों ही पक्षों की समान गलती है। उसकी नज़र में मनसे के गुंडों द्वारा भाजपा समर्थक को पीटा जाना फेसबुक पोस्ट करने जैसा ही है।
राष्ट्रपति भवन ने खंडन करते हुए इस प्रकार के किसी भी पत्र के मिलने की खबरों से इंकार कर दिया है। राष्ट्रपति भवन ने स्पष्ट किया है कि तीनों सेनाओं के 8 पूर्व प्रमुखों सहित 150 से अधिक पूर्व सैन्य अधिकारियों द्वारा लिखी गई कोई चिट्ठी उन्हें नहीं मिली है, जो मीडिया में चल रहा है।