न्यायाधीश दीपक दुबे ने कहा, "मेरे नन्हे-मुन्ने मासूम फरिश्ते। तुम निर्दोष व निष्पाप हो। तुम्हारी मुस्कान ही सारा जहान है। तुम्हारी सूरत में अल्लाह का नूर बसता है।"
डेढ़ दशक से अधिक समय बीत जाने पर उनमें से किसी भी वादे पर लोगों ने अपने नेताओं को खरा उतरते नहीं देखा। उल्टे अब लोग इन नेताओं की खोखली बातों और भ्रष्टाचार आदि से तंग आ चुके हैं।