ऐसा नहीं है कि नसबंदी पर प्रोत्साहन कोई नई बात है, बल्कि देश भर में केंद्र व राज्य सरकारें अक्सर नसबंदी के लिए प्रोत्साहन का अभियान चलाते रहती है। लेकिन, जो संजय गाँधी ने किया था वो क्रूरता थी।
आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर इसकी कमान अमित शाह के हाथ में ही क्यों? आखिर विपक्षी की बेचैनी का कारण क्या है कि वो केंद्र सरकार के इस नए पहल का स्वागत करने की बजाए इसका विरोध कर रहा है।